Wednesday, May 20, 2026

सागर का पैगाम।

 


नमस्ते वணக்கம்।

தமிழ் ஹிந்தி பணி.

तमिल हिंदी सेवा 


[20/05, 5:00 pm] sanantha.50@gmail.com: நமஸ்தே வணக்கம்।

உங்கள் “சாகரின் செய்தி” கவிதையின் தமிழாக்கம் மிகவும் உணர்ச்சியுடனும் இயற்கை விழிப்புணர்வுடனும் அமைந்துள்ளது.

கடலின் செய்தி

எஸ். அனந்தகிருஷ்ணன், சென்னை, தமிழ்நாடு

20-5-26

கடல் அளவற்றது,

அதன் ஆழத்தை

யார் அறிந்தார்கள்?

அதன் செய்தி —

அலைகளில் அன்பின் ஏக்கம்,

எல்லையற்ற சகிப்புத்தன்மை.

நதிகளின் புனித நீர்,

நகரங்களின் கழிவு நீர்,

அஸ்திகள், சாம்பல்,

வழிபாட்டு சிலைகள் —

எல்லாவற்றையும்

தன் உள்ளத்தில் ஏற்றுக்கொள்கிறது.

ஆனால் இயற்கைக்கும்

ஒரு பொறுமையின் எல்லை உண்டு.

அந்த எல்லை உடைந்துவிட்டால்,

கடலின் கோபம்

சுனாமியாக எழுகிறது.

பக்தி மலர்ந்த

தென்னக நிலம்,

கேரளமும் தமிழ்நாட்டும்

அதன் எச்சரிக்கையின் சாட்சிகள்.

தனுஷ்கோடியின் அழிவு,

இராமசேதுவின் நினைவுகள்,

எத்தனை நகரங்கள்

கடலின் கர்ப்பத்தில்

மறைந்துபோயின!

கடல் கூறுகிறது —

“நான் உயிர் தருபவன்,

கோடிக்கணக்கான மக்களின் ஆதாரம்.

மீன்களின் செல்வம்,

முத்துகளும் சிப்பிகளும் நிறைந்த உலகம் நான்.”

“ஆனால் என்னிடம்

எச்சரிக்கையுடன் இருங்கள்.

என் அமைதியில்தான்

உலகின் நன்மை உள்ளது.

நான் கோபித்தால்

ஜலப்பிரளயம் உருவாகும்.”

ஜப்பானும் கூட

என் சீற்றத்தால்

மீண்டும் மீண்டும் நடுங்குகிறது,

ஆனால் எச்சரிக்கையுடன்

வாழ கற்றுக்கொள்கிறது.

மக்கள் என் அலைகளில்

மகிழ்ச்சி தேடுகின்றனர்,

ஆனால் ஒரு கொந்தளிக்கும் அலை

ஒரு கணத்தில்

உயிரையே பறிக்கலாம்.

கடலின் இதே செய்தி —

இயற்கையை மதியுங்கள்,

எச்சரிக்கையுடனும் விழிப்புடனும் இருங்கள்.

நான் அமைதியாக இருந்தால்

வாழ்க்கையின் இசை நான்,

ஆனால் கோபித்துவிட்டால்

எங்கும்

தண்ணீர் மட்டுமே.

எச்சரிக்கை.

[20/05, 5:09 pm] sanantha.50@gmail.com: नमस्ते वணக்கம்।




सागर का पैगाम।


एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 


20-5-26


-----------------


  सागर  अनंत है।


 न जान सकता  


उसकी गहराई।


 उसका संदेश,


 लहरें प्रेम की तड़पें।


 सहनशीलता है उसमें।


 नदी का पवित्र पानी,


 मोरे का गंदा पानी।


 अंतिम क्रिया की अस्तियाँ, राख,


 गणेश की मूर्तियाँ,


अति सुंदर ,


 भक्ति के नाम से 


 करोड़ों की सुंदर मूर्तियाँ,


 भगवान की मूर्तियाँ


 उनको छिन्न-भिन्न करके


 हिंदुओं के प्रति ईश्वर की घृणा  पैदा कर,


 हिंदुओं के विरोध 


 दक्षिण से


 जहाँ   भक्ति उपजी,


 केरल और तमिलनाडु में 


 सनातन धर्म का 


  जड़मूल नाश।


 यह भगवान का क्रोध।


 यह संदेश   सिर अलग, पैर अलग, गणेश का बड़ा अपमान।


 यह महान पैगाम 


 सुनामी के द्वारा।


 सावधान।


 समुद्र यातायात के साधन,


 करोड़ों लोगों के जीवन का आधार।


 जीवन का आहार।


 मछलियों का भंडार।


 कीमती मोतियों की सीपियाँ,


 वह कह रहा है,


 मुझसे सावधान रहना।


 बड़े बड़े जहाज को डुबो चुका हूँ,


 बड़े बड़े शहर मेरे पेट में है।


 अति सुंदर मंदिर, राम सेतु , धनुषकोडी इन सब का नामो निशान नहीं।


 सुनामी के असर,


विश्व काँप रहा है।


 मुझमें नहाकर,


‌लहरों का आनंद उठा रहे हैं।


पर अचानक लहरें 


 ज्वार-भाटा उनको निकालकर कहीं दूर 


लाश फेंक देता है।


 यह पैगाम 


 सतर्क सावधान रहने के लिए।


 सागर कहता है,


 मैं परोपकारी हूँ।


 पर मेरी  सहनशीलता का हल होता है।


 मैं आपके से बाहर होने पर बचना असंभव।


 जापान तो मेरे कारण


 अति सतर्क है,


 फिर भी मेरे क्रोध का


 बार बार सामना करता है।


मेरे पास आते हैं तो


 सावधान रहना




 मैं कब कैसे क्यों?




 परिवर्तन करूँगा


पता नहीं।


 सागर  ही सागर 


संसार में 


 मैं चुप रहने से ही 


 चैन है,


 कुपित होनै पर जलप्रलय 


 कामायनी काव्य जैसे,


मनु मात्र उत्तुंग शिखर पर।


 जल ही जल।


 सावधान।




आपकी रचना में सागर की विराटता, चेतावनी, प्रकृति का क्रोध और मानव की असावधानी का गहरा चित्रण है। आपने सुनामी, धनुषकोडी, रामसेतु, समुद्र की सहनशीलता तथा उसके विनाशकारी रूप को प्रभावशाली ढंग से जोड़ा है। भाषा में भावप्रवाह अच्छा है, केवल कुछ स्थानों पर शब्द-संयोजन और प्रस्तुति को थोड़ा संतुलित करने से रचना और अधिक प्रभावशाली बन सकती है।


यहाँ आपकी रचना का परिष्कृत रूप प्रस्तुत है —


सागर का पैगाम


एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु


20-5-26


सागर अनंत है,


कौन जान सका


उसकी गहराई।


उसका संदेश —


लहरों में प्रेम की तड़प,


असीम सहनशीलता।


नदियों का पवित्र जल,


नगरों का गंदा पानी,


अस्थियाँ, राख,


पूजा की मूर्तियाँ —


सबको वह अपने भीतर समेट लेता है।


पर प्रकृति का भी


एक धैर्य होता है।


जब सीमा टूटती है,


तो सागर का क्रोध


सुनामी बनकर उठता है।


दक्षिण की भूमि,


जहाँ भक्ति फली-फूली,


केरल और तमिलनाडु के तट


उसकी चेतावनी के साक्षी हैं।


धनुषकोडी का विनाश,


रामसेतु की स्मृतियाँ,


समुद्र के गर्भ में


कितने नगर समा गए।


सागर कहता है —


“मैं जीवनदाता हूँ,


करोड़ों लोगों का आधार हूँ।


मछलियों का भंडार,


मोती और सीपियों का संसार हूँ।”


“पर मुझसे सावधान रहना।


मेरी शांति में ही


संसार का कल्याण है।


जब मैं कुपित होता हूँ,


तो जलप्रलय आ जाता है।”


जापान भी


मेरे प्रकोप से


बार-बार काँप उठता है,


फिर भी सजग रहना सीखता है।


लोग मेरी लहरों में


आनंद खोजते हैं,


पर एक तीव्र ज्वार


क्षणभर में


जीवन छीन सकता है।


सागर का यही पैगाम —


प्रकृति का सम्मान करो,


सतर्क और सावधान रहो।


मैं शांत हूँ तो


जीवन का संगीत हूँ,


पर क्रोधित हो जाऊँ तो


चारों ओर


जल ही जल।


सावधान।

सागर का पैगाम।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

20-5-26

-----------------

  सागर  अनंत है।

 न जान सकता  

उसकी गहराई।

 उसका संदेश,

 लहरें प्रेम की तड़पें।

 सहनशीलता है उसमें।

 नदी का पवित्र पानी,

 मोरे का गंदा पानी।

 अंतिम क्रिया की अस्तियाँ, राख,

 गणेश की मूर्तियाँ,

अति सुंदर ,

 भक्ति के नाम से 

 करोड़ों की सुंदर मूर्तियाँ,

 भगवान की मूर्तियाँ

 उनको छिन्न-भिन्न करके

 हिंदुओं के प्रति ईश्वर की घृणा  पैदा कर,

 हिंदुओं के विरोध 

 दक्षिण से

 जहाँ   भक्ति उपजी,

 केरल और तमिलनाडु में 

 सनातन धर्म का 

  जड़मूल नाश।

 यह भगवान का क्रोध।

 यह संदेश   सिर अलग, पैर अलग, गणेश का बड़ा अपमान।

 यह महान पैगाम 

 सुनामी के द्वारा।

 सावधान।

 समुद्र यातायात के साधन,

 करोड़ों लोगों के जीवन का आधार।

 जीवन का आहार।

 मछलियों का भंडार।

 कीमती मोतियों की सीपियाँ,

 वह कह रहा है,

 मुझसे सावधान रहना।

 बड़े बड़े जहाज को डुबो चुका हूँ,

 बड़े बड़े शहर मेरे पेट में है।

 अति सुंदर मंदिर, राम सेतु , धनुषकोडी इन सब का नामो निशान नहीं।

 सुनामी के असर,

विश्व काँप रहा है।

 मुझमें नहाकर,

‌लहरों का आनंद उठा रहे हैं।

पर अचानक लहरें 

 ज्वार-भाटा उनको निकालकर कहीं दूर 

लाश फेंक देता है।

 यह पैगाम 

 सतर्क सावधान रहने के लिए।

 सागर कहता है,

 मैं परोपकारी हूँ।

 पर मेरी  सहनशीलता का हल होता है।

 मैं आपके से बाहर होने पर बचना असंभव।

 जापान तो मेरे कारण

 अति सतर्क है,

 फिर भी मेरे क्रोध का

 बार बार सामना करता है।

मेरे पास आते हैं तो

 सावधान रहना


 मैं कब कैसे क्यों?


 परिवर्तन करूँगा

पता नहीं।

 सागर  ही सागर 

संसार में 

 मैं चुप रहने से ही 

 चैन है,

 कुपित होनै पर जलप्रलय 

 कामायनी काव्य जैसे,

मनु मात्र उत्तुंग शिखर पर।

 जल ही जल।

 सावधान।


आपकी रचना में सागर की विराटता, चेतावनी, प्रकृति का क्रोध और मानव की असावधानी का गहरा चित्रण है। आपने सुनामी, धनुषकोडी, रामसेतु, समुद्र की सहनशीलता तथा उसके विनाशकारी रूप को प्रभावशाली ढंग से जोड़ा है। भाषा में भावप्रवाह अच्छा है, केवल कुछ स्थानों पर शब्द-संयोजन और प्रस्तुति को थोड़ा संतुलित करने से रचना और अधिक प्रभावशाली बन सकती है।

यहाँ आपकी रचना का परिष्कृत रूप प्रस्तुत है —

सागर का पैगाम

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

20-5-26

सागर अनंत है,

कौन जान सका

उसकी गहराई।

उसका संदेश —

लहरों में प्रेम की तड़प,

असीम सहनशीलता।

नदियों का पवित्र जल,

नगरों का गंदा पानी,

अस्थियाँ, राख,

पूजा की मूर्तियाँ —

सबको वह अपने भीतर समेट लेता है।

पर प्रकृति का भी

एक धैर्य होता है।

जब सीमा टूटती है,

तो सागर का क्रोध

सुनामी बनकर उठता है।

दक्षिण की भूमि,

जहाँ भक्ति फली-फूली,

केरल और तमिलनाडु के तट

उसकी चेतावनी के साक्षी हैं।

धनुषकोडी का विनाश,

रामसेतु की स्मृतियाँ,

समुद्र के गर्भ में

कितने नगर समा गए।

सागर कहता है —

“मैं जीवनदाता हूँ,

करोड़ों लोगों का आधार हूँ।

मछलियों का भंडार,

मोती और सीपियों का संसार हूँ।”

“पर मुझसे सावधान रहना।

मेरी शांति में ही

संसार का कल्याण है।

जब मैं कुपित होता हूँ,

तो जलप्रलय आ जाता है।”

जापान भी

मेरे प्रकोप से

बार-बार काँप उठता है,

फिर भी सजग रहना सीखता है।

लोग मेरी लहरों में

आनंद खोजते हैं,

पर एक तीव्र ज्वार

क्षणभर में

जीवन छीन सकता है।

सागर का यही पैगाम —

प्रकृति का सम्मान करो,

सतर्क और सावधान रहो।

मैं शांत हूँ तो

जीवन का संगीत हूँ,

पर क्रोधित हो जाऊँ तो

चारों ओर

जल ही जल।

सावधान।

Sunday, May 17, 2026

உலக அமைதி தினம்.विविश्व शांति दिवस विश्व शांति दिवस। पऴनि एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु 18-5-26 ++++++++++++ सनातन धर्म आदि काल से विश्व शांति का मार्ग दिखाता आया है। भारतीय धर्माचार्य “अहिंसा परमो धर्मः” का संदेश देते हैं। “ॐ शांति” मंत्र बाह्य और आंतरिक दोनों प्रकार की शांति का महत्व बताता है। विश्व बंधुत्व और “वसुधैव कुटुम्बकम्” भारत की अमूल्य देन है। पाश्चात्य देशों में कठोर ठंड, हिमपात और प्राकृतिक कठिनाइयों के कारण संघर्षपूर्ण जीवन रहा। प्राकृतिक बाधाओं से बचने हेतु वे विज्ञान और तकनीक में अग्रसर हुए। सत्ता और विस्तार की चाह में अनेक देशों पर अधिकार हेतु युद्ध हुए। दो-दो विश्वयुद्धों ने मानवता को झकझोर दिया। जापान पर अणुबम गिरने से विनाश की भयावह स्थिति उत्पन्न हुई। युद्ध में केवल वीर सैनिक ही नहीं, निर्दोष जनता भी अपने प्राण गंवाती है। धन, संपत्ति, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का भी विनाश हो जाता है। अतः विश्व में भाईचारा बढ़ाने, शांति स्थापित करने और विनाशकारी युद्ध रोकने हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व शांति दिवस मनाने की परंपरा प्रारंभ की। दया, ममता, करुणा, शांति, अहिंसा, सत्य और ईमानदारी — ये प्राचीन भारतीय सिद्धांत ही विश्व शांति दिवस का मूल संदेश हैं। आओ, हम सब मानवता, प्रेम और सद्भाव का दीप जलाएँ। जय जगत। जय भारत। தமிழ் மொழிபெயர்ப்பு உலக சமாதான தினம் உலக சமாதான தினம் பழனி எஸ். அனந்தகிருஷ்ணன், சென்னை, தமிழ்நாடு 18-5-26 ++++++++++++ சனாதன தர்மம் ஆதிகாலத்திலிருந்தே உலக சமாதானத்தின் பாதையை காட்டி வருகிறது. “அஹிம்சை பரமோ தர்ம:” என்று இந்திய ஞானிகள் போதித்துள்ளனர். “ஓம் சாந்தி” மந்திரம் உள்ளார்ந்த மற்றும் வெளிப்புற அமைதியின் முக்கியத்துவத்தை எடுத்துரைக்கிறது. “வசுதைவ குடும்பகம்” என்ற உலக சகோதரத்துவ சிந்தனை இந்தியாவின் அரிய கொடையாகும். மேற்கத்திய நாடுகளில் கடுங்குளிர், பனிப்பொழிவு போன்ற இயற்கை சவால்களால் போராட்ட வாழ்க்கை நிலவியது. அவற்றை சமாளிக்க அவர்கள் அறிவியல் துறையில் முன்னேறினர். ஆனால் அதிகார ஆசையாலும் பிற நாடுகளை கைப்பற்றும் நோக்கத்தாலும் போர்கள் உருவாயின. இரண்டு உலகப் போர்களும் மனிதகுலத்தை உலுக்கியன. ஜப்பானில் அணுகுண்டு வீசப்பட்டதால் பேரழிவு ஏற்பட்டது. போரில் வீரர்களே மட்டும் அல்ல, அப்பாவி பொதுமக்களும் உயிரிழக்கின்றனர். செல்வம், சொத்து, கலாசாரம், மனிதநேய மதிப்புகள் அனைத்தும் அழிகின்றன. எனவே உலகத்தில் சகோதரத்துவம் வளர, அமைதி நிலைக்க, அழிவூட்டும் போர்கள் நிற்க ஐக்கிய நாடுகள் சபை உலக சமாதான தினத்தை கொண்டாடுகிறது. கருணை, அன்பு, சாந்தி, அஹிம்சை, சத்தியம், நேர்மை — இவை அனைத்தும் இந்திய சிந்தனையின் நித்திய செய்திகளாகும். ஜெய் ஜகத்। ஜெய் பாரத்। विश्व शांति दिवस


हिंदी भी तमिल भी।

ஹிந்தியும் தமிழும் 

ஹிந்தி தமிழ் பணி 

हिंदी तमिल सेवा।



 विश्व शांति दिवस

विश्व शांति दिवस।

पऴनि एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

18-5-26

++++++++++++

सनातन धर्म आदि काल से

विश्व शांति का मार्ग दिखाता आया है।

भारतीय धर्माचार्य

“अहिंसा परमो धर्मः”

का संदेश देते हैं।

“ॐ शांति” मंत्र

बाह्य और आंतरिक

दोनों प्रकार की शांति का

महत्व बताता है।

विश्व बंधुत्व और

“वसुधैव कुटुम्बकम्”

भारत की अमूल्य देन है।

पाश्चात्य देशों में

कठोर ठंड, हिमपात

और प्राकृतिक कठिनाइयों के कारण

संघर्षपूर्ण जीवन रहा।

प्राकृतिक बाधाओं से बचने हेतु

वे विज्ञान और तकनीक में

अग्रसर हुए।

सत्ता और विस्तार की चाह में

अनेक देशों पर अधिकार हेतु

युद्ध हुए।

दो-दो विश्वयुद्धों ने

मानवता को झकझोर दिया।

जापान पर अणुबम गिरने से

विनाश की भयावह स्थिति उत्पन्न हुई।

युद्ध में केवल वीर सैनिक ही नहीं,

निर्दोष जनता भी

अपने प्राण गंवाती है।

धन, संपत्ति, संस्कृति और

मानवीय मूल्यों का भी

विनाश हो जाता है।

अतः विश्व में

भाईचारा बढ़ाने,

शांति स्थापित करने

और विनाशकारी युद्ध रोकने हेतु

संयुक्त राष्ट्र संघ ने

विश्व शांति दिवस मनाने की

परंपरा प्रारंभ की।

दया, ममता, करुणा, शांति,

अहिंसा, सत्य और ईमानदारी —

ये प्राचीन भारतीय सिद्धांत ही

विश्व शांति दिवस का

मूल संदेश हैं।

आओ, हम सब

मानवता, प्रेम और सद्भाव का

दीप जलाएँ।

जय जगत।

जय भारत।

தமிழ் மொழிபெயர்ப்பு

உலக சமாதான தினம்

உலக சமாதான தினம்

பழனி எஸ். அனந்தகிருஷ்ணன், சென்னை, தமிழ்நாடு

18-5-26

++++++++++++

சனாதன தர்மம் ஆதிகாலத்திலிருந்தே

உலக சமாதானத்தின் பாதையை காட்டி வருகிறது.

“அஹிம்சை பரமோ தர்ம:”

என்று இந்திய ஞானிகள் போதித்துள்ளனர்.

“ஓம் சாந்தி” மந்திரம்

உள்ளார்ந்த மற்றும் வெளிப்புற அமைதியின்

முக்கியத்துவத்தை எடுத்துரைக்கிறது.

“வசுதைவ குடும்பகம்” என்ற

உலக சகோதரத்துவ சிந்தனை

இந்தியாவின் அரிய கொடையாகும்.

மேற்கத்திய நாடுகளில்

கடுங்குளிர், பனிப்பொழிவு போன்ற

இயற்கை சவால்களால்

போராட்ட வாழ்க்கை நிலவியது.

அவற்றை சமாளிக்க

அவர்கள் அறிவியல் துறையில்

முன்னேறினர்.

ஆனால் அதிகார ஆசையாலும்

பிற நாடுகளை கைப்பற்றும் நோக்கத்தாலும்

போர்கள் உருவாயின.

இரண்டு உலகப் போர்களும்

மனிதகுலத்தை உலுக்கியன.

ஜப்பானில் அணுகுண்டு வீசப்பட்டதால்

பேரழிவு ஏற்பட்டது.

போரில் வீரர்களே மட்டும் அல்ல,

அப்பாவி பொதுமக்களும்

உயிரிழக்கின்றனர்.

செல்வம், சொத்து, கலாசாரம்,

மனிதநேய மதிப்புகள் அனைத்தும்

அழிகின்றன.

எனவே உலகத்தில்

சகோதரத்துவம் வளர,

அமைதி நிலைக்க,

அழிவூட்டும் போர்கள் நிற்க

ஐக்கிய நாடுகள் சபை

உலக சமாதான தினத்தை

கொண்டாடுகிறது.

கருணை, அன்பு, சாந்தி,

அஹிம்சை, சத்தியம், நேர்மை —

இவை அனைத்தும்

இந்திய சிந்தனையின்

நித்திய செய்திகளாகும்.

ஜெய் ஜகத்।

ஜெய் பாரத்।

कसर किसका? யாருடைய குற்றம் தவறு



 नमस्ते। வணக்கம்।

सुप्रभात।

आपकी पंक्तियों में गहरा आध्यात्मिक चिंतन, प्रश्न, पीड़ा और ईश्वर से सीधा संवाद दिखाई देता है। यही प्रश्न युगों से ऋषियों, भक्तों और दार्शनिकों को भी उद्वेलित करते रहे हैं।

आपकी भावाभिव्यक्ति को थोड़ा संयोजित रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ —

कसर किसका?

कसर किसका?

नचाने वाले ईश्वर का

या ईश्वर की सृष्टि मानव का?

या फिर कर्मफल का?

यदि कर्म करने का संकेत

माया देती है,

तो माया की रचना क्यों?

और यदि कुबुद्धि भी

तेरी ही बनाई हुई है,

तो फिर मानव का दोष क्या?

हे प्रभु!

हमें सुबुद्धि दो।

दुःख देकर परीक्षा क्यों?

असुरों को वरदान देकर

देवों को संकट में डालना

तेरी कैसी लीला है?

त्रेता में राम भी वनवासी हुए,

द्वापर में पांडव भी दुःख भोगते रहे,

कौरव भी शांति न पा सके।

कलियुग में तो

भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, स्वार्थ

चरम सीमा पर पहुँच गए।

माया में तात्कालिक सुख दिखता है,

पर परिणाम दुःखमय होता है।

मानव जीवन भर

भटकता ही रहता है।

हे ईश्वर!

तेरी लीला समझना

अत्यंत कठिन है।

फिर भी

मन अंततः तेरी शरण ही चाहता है।

தமிழ் மொழிபெயர்ப்பு

குறை யாருடையது?

குறை யாருடையது?

ஆட்டம் ஆட வைக்கும் இறைவனுடையதா?

அல்லது அவன் படைத்த மனிதனுடையதா?

அல்லது கர்ம பலனுடையதா?

செயல்களைச் செய்யத் தூண்டும்

மாயையே என்றால்,

அந்த மாயையை உருவாக்கியது ஏன்?

தீய புத்தியும் உன்னாலே என்றால்,

மனிதனின் தவறு என்ன?

ஓ இறைவா!

எங்களுக்கு நல்ல புத்தி தா.

துன்பங்களை ஏன் தருகிறாய்?

அசுரர்களுக்கு வரம் கொடுத்து

தேவர்களை ஏன் சோதிக்கிறாய்?

திரேதாயுகத்தில் ராமனும் துன்பம் அனுபவித்தார்.

துவாபரயுகத்தில் பாண்டவர்களும் அமைதியில்லை,

கௌரவர்களும் நிம்மதியில்லை.

கலியுகத்தில்

ஊழல், லஞ்சம், சுயநலம்

உச்சிக்குச் சென்றுவிட்டது.

மாயையில் உடனடி இன்பம் தெரிந்தாலும்

அதன் விளைவு துன்பமே.

மனிதன் வாழ்நாள் முழுவதும்

அலைந்து திரிகிறான்.

இறைவனின் லீலை

புரிந்துகொள்வது மிகவும் கடினம்.

ஆனால் இறுதியில்

மனம் அவனிடமே சரணடைகிறது.

सादर प्रणाम।

Saturday, May 16, 2026

ப்ருத்வீ ராஜீ சௌஹான் पृथ्वीराज चौहान

 



தமிழ் ஹிந்தி பணி 

तमिल हिंदी सेवा 

சே. அனந்த கிருஷ்ணன்.



இன்றைய சவால்

பிருத்விராஜ் சௌகான்

பிருத்விராஜ் சௌகான்

Prithviraj Chauhan

எஸ். அனந்தகிருஷ்ணன், சென்னை, தமிழ்நாடு இந்தி நேயர் பிரச்சாரகர் அவர்களின் சுய சிந்தனை வெளிப்பாட்டு படைப்பு

17-5-26

++++++++++++++++++++

இந்தியா அறிவிலும், வீரத்திலும், சுயமரியாதையிலும் உலகப் புகழ் பெற்ற நாடாகும்.

இந்தியாவின் செல்வச் செழிப்பைக் கண்டு பல வெளிநாட்டு ஆக்கிரமிப்பாளர்கள் நாட்டை நோக்கி வந்தனர்.

அவர்களைத் தைரியமாக எதிர்த்து போராடிய மகா வீரர்களில்

Prithviraj Chauhan

மிக முக்கியமானவர் ஆவார்.

அவர் பல முறை

Muhammad of Ghor

என்ற கோரி முகம்மதுவை போரில் தோற்கடித்து மன்னித்து அனுப்பினார் என்று வரலாறு கூறுகிறது.

ஆனால் பகைவர்மீது அளவுக்கு மீறிய கருணை காட்டுதல்,

கொள்ளையர்களுக்கு தண்டனை அளிக்காதிருத்தல்

அரசியல் நுண்ணறிவாக அமையவில்லை.

பின்னர்

Muhammad of Ghor

மீண்டும் பெரிய படையுடன் வந்து போரிட்டார்.

அப்போது

Prithviraj Chauhan

பிடிபட்டு, அவரின் கண்கள் குருடாக்கப்பட்டதாகக் கூறப்படுகிறது.

ஆனால் வீரத்துக்கு கண்கள் தேவையில்லை;

மன உறுதியும் தைரியமும் போதுமானவை.

பிருத்விராஜ் சௌகான் “சப்தவேதி அம்பு”  ஒலி கேட்டு அந்த திசையில் ஈ அம்பு செலுத்தும் கலையில் வல்லவர்.

இருளிலும் ஒலியைக் கேட்டு குறியைத் துல்லியமாக அடிக்கும் திறமை அவருக்கிருந்தது.

அவருடன் அவரது நெருங்கிய நண்பரும், கவிஞரும், தளபதியுமான

சந்தபர்தாயி

இருந்தார்.

மன்னரின் நிலையை கண்டு துயருற்றாலும்,

அவரது மன உறுதியை உயர்த்தி வைத்தார்.

இறுதி ஆசை என்ன என்று கேட்டபோது,

தன் சப்தவேதி வில்ல்வித்தையை கடைசியாக வெளிப்படுத்த விரும்புவதாக மன்னர் கூறினார்.

அது அனைவருக்கும் ஆச்சரியத்தை அளித்தது.

அப்போது

சந்தபர்தாயி 

ஒரு செய்யுளின் மூலம் குறியிடத்தைச் சொன்னார்—

“चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।

ता ऊपर सुल्तान है, मत चुके चौहान॥”

18 அடி 24 கஜ8 அங்குல

தூரத்தில்  சுல்தான். தாமதிக்க வேண்டாம்.

அந்த அறிகுறியை உணர்ந்த வீர மன்னர்

அம்பை எய்தி குறியைத் துல்லியமாகத் தாக்கினார்.

இந்தக் கதை இந்திய வீரத்திற்கும், தியாகத்திற்கும், சுயமரியாதைக்கும் ஒரு நிலையான சின்னமாக விளங்குகிறது.

வரலாறு நமக்குக் கூறுவது என்னவெனில்—

உள் பிளவு, பொறாமை, சுயநலம், துரோகம் ஆகியவை நாட்டை பலவீனப்படுத்தும்.

எனவே இளைஞர்கள் விழிப்புணர்வுடன் ஒன்றுபட்டு நாட்டைப் பாதுகாக்க வேண்டும்.

ப்ருத்வீராஜ் சௌஹான்.


அவர்களின் வீரமும், தேசபக்தியும், தியாக உணர்வும்

என்றும் நினைவுகூரத்தக்கதும் பின்பற்றத்தக்கதுமாகும்.

ஜெய் பாரத்!

ஜெய் வீர பாரத்!


आज की चुनौती

पृथ्वीराज चौहान।

पृथ्वीराज चौहान

Prithviraj Chauhan

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

17-5-26

++++++++++++++++

भारत ज्ञान, वीरता, संस्कृति और आत्मसम्मान के लिए विश्व में विख्यात रहा है।

भारत की समृद्धि और वैभव को देखकर अनेक विदेशी आक्रमणकारी यहाँ आए।

उन आक्रमणों का डटकर सामना करने वाले वीरों में

Prithviraj Chauhan

का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

उन्होंने अनेक बार

Muhammad of Ghor

को युद्ध में पराजित किया और क्षमा करके छोड़ दिया।

किन्तु शत्रु पर दया दिखाना और लुटेरों को दंड न देना

राजनीतिक दृष्टि से उचित सिद्ध नहीं हुआ।

कहा जाता है कि बाद में

Muhammad of Ghor

ने विशाल सेना के साथ पुनः आक्रमण किया।

युद्ध में

Prithviraj Chauhan

बंदी बना लिए गए और उनकी आँखें फोड़ दी गईं।

परंतु वीरता केवल आँखों से नहीं,

अटूट साहस और आत्मबल से होती है।

राजा शब्दभेदी बाण चलाने की अद्भुत कला में पारंगत थे।

घोर अंधकार में भी

ध्वनि के आधार पर लक्ष्य भेद सकते थे।

उनके साथ उनके प्रिय मित्र, कवि और सेनापति

Chand Bardai

उपस्थित थे।

राजा की अवस्था देखकर वे दुःखी अवश्य थे,

किन्तु उन्होंने उनका साहस कभी कम नहीं होने दिया।

जब अंतिम इच्छा पूछी गई,

तब राजा ने अपनी शब्दभेदी धनुर्विद्या का प्रदर्शन करने की इच्छा व्यक्त की।

सभा में विस्मय छा गया।

तब

Chand Bardai

ने प्रसिद्ध दोहे के माध्यम से संकेत दिया—

“चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।

ता ऊपर सुल्तान है, मत चूके चौहान॥”

संकेत मिलते ही

वीर चौहान का बाण लक्ष्य पर जा लगा।

यह कथा भारतीय वीरता, स्वाभिमान और पराक्रम की अमर गाथा बन गई।

इतिहास हमें यह भी सिखाता है कि

आंतरिक फूट, स्वार्थ, ईर्ष्या और विश्वासघात

राष्ट्र को कमजोर करते हैं।

इसलिए युवाओं को जागरूक, एकजुट और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित रहना चाहिए।

Prithviraj Chauhan

की वीरता, देशभक्ति, त्याग और आत्मसम्मान

सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायक रहेंगे।

जय भारत।

जय वीर भारत।

जय मातृभूमि।

Friday, May 15, 2026

विश्व कुटुंब दिवस உலக குடும்ப தினம்

 




ஹிந்தி தமிழ் பணி.

 हिंदी तमिल सेवा।



உலக குடும்ப தினம்

சுயர்சித உணர்வுப் பதிவு

எஸ். அனந்த கிருஷ்ணன், சென்னை, தமிழ்நாடு

இந்தி நேயர் மற்றும் பிரச்சாரகர்

16-5-2026

அறிவின் பூமி,

ஆன்மீகத்தின் பூமி —

இந்தியத்தின் ஆதிகாலச் செய்தி:

“வசுதைவ குடும்பகம்”

“அனைவரும் இன்பமாக இருப்பார்களாக”

“ஜெய் ஜகத்”

இது அந்தக் காலத்தின் முழக்கம்;

அப்போது இயற்கைத் தடைகள் அளவற்றிருந்தன,

போக்குவரத்து வசதிகளே இல்லை.

இன்று போக்குவரத்து புரட்சியின் காலம் —

விமானம், ரயில், ஹெலிகாப்டர்,

கப்பல், நீர்மூழ்கிக் கப்பல் என

உலகம் நெருக்கமடைந்துள்ளது.

உலக குடும்ப தினம்,

சர்வதேச திருமண உறவுகள்,

வணிகத் தொடர்புகள்,

ஆங்கிலோ-இந்திய கலாசாரம்,

கிறிஸ்தவ–முகல் இடமதத் திருமணங்கள்,

அலெக்சாண்டர், செல்யூகஸ், சந்திரகுப்தர் உறவுகள் —

இவை அனைத்தும் உலகக் குடும்ப உணர்வின் எடுத்துக்காட்டுகள்.

உலக குடும்ப தினம் புதிதல்ல;

இது சனாதன தர்மத்தின் நிலையான முழக்கம்.

இந்திய சிந்தனையின் மகத்துவம்

ஐக்கிய நாடுகள் அமைப்பின் மூலம்

1993ஆம் ஆண்டு உலகளவில் வெளிச்சம் பெற்றது.

உலக சகோதரத்துவம்,

சமாதானம், நட்பு —

ஒரே குடும்பமாக

வாழ வேண்டும் என ஊக்கமளிக்கின்றன.

இந்திய வரலாற்றில்

உலக நாடுகள் அனைத்தும் வந்துள்ளன.

“இந்தி-சீனி பாய் பாய்” என்ற முழக்கம்,

யுவான் சுவாங் அறிவுப் பயணம்,

முகலாயர் படையெடுப்பு,

ஆங்கிலேயர் வணிகப் பயணம்,

பிரெஞ்சு, டச்சு, போர்த்துகீசியர் ஆட்சி —

இவற்றிற்கு முன்னரே

இந்தியா உலகக் குடும்ப உணர்வை

வாழ்வில் கடைப்பிடித்தது.

1994ஆம் ஆண்டு

உலக குடும்ப தினம் அறிவிக்கப்படுவதற்கு முன்பே

இந்தியாவில் உலகக் குடும்ப சிந்தனை வாழ்ந்து வந்தது.

ஜெய் ஜகத்।

ஜெய் ஜகத் சகோதரத்துவம்।


आपकी रचना में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भारतीय भावना, इतिहास, विश्व-बंधुत्व और आधुनिक विश्व परिवार दिवस का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। भाव अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उसी भावधारा को बनाए रखते हुए भाषा और प्रवाह को थोड़ा सुसंगठित रूप में प्रस्तुत किया गया है —

विश्व परिवार दिवस

स्वरचित भावाभिव्यक्ति

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक

16-5-2026

ज्ञान-भूमि,

आध्यात्मिक भूमि

भारत का आदि संदेश —

“वसुधैव कुटुम्बकम्”

“सर्वे जना: सुखिनो भवन्तु”

“जय जगत”

यह वह नारा था,

जब प्राकृतिक बाधाएँ असीमित थीं,

आवागमन के साधन नहीं थे।

आज आवागमन क्रांति का युग है —

हवाई जहाज, रेल, हेलिकॉप्टर,

जहाज और पनडुब्बियों का जमाना है।

विश्व परिवार दिवस,

अंतरराष्ट्रीय वैवाहिक संबंध,

व्यावसायिक संबंध,

आंग्ल-भारतीय संस्कृति,

ईसाई-मुगल अंतर्मजहबी विवाह,

सिकंदर, सेल्युकस और चंद्रगुप्त के संबंध —

ये सब विश्व परिवार की भावना के उदाहरण हैं।

विश्व परिवार दिवस नया नहीं,

यह सनातन धर्म का शाश्वत संदेश है।

भारतीय विचारधारा का महत्व

संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से

1993 में विश्व-पटल पर उजागर हुआ।

विश्व-बंधुत्व, भ्रातृत्व,

शांति और मित्रता —

एक परिवार की तरह

रहने की प्रेरणा देते हैं।

भारत के इतिहास में

विश्व के अनेक देश आए।

“हिंदी-चीनी भाई-भाई” का नारा,

ह्वेनसांग की ज्ञान-यात्रा,

मुगलों के आक्रमण,

अंग्रेजों का व्यापारिक आगमन,

फ्रांसीसी, डच और पुर्तगालियों का शासन —

इन सबके पहले ही

भारत विश्व-परिवार की भावना को

जी रहा था।

1994 में

विश्व परिवार दिवस की घोषणा से पूर्व ही

भारत में विश्व-परिवार की चेतना विद्यमान थी।

जय जगत।

जय जगत भ्रातृत्व।

आपकी रचना में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भारतीय भावना, इतिहास, विश्व-बंधुत्व और आधुनिक विश्व परिवार दिवस का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। भाव अत्यंत प्रेरणादायक हैं। उसी भावधारा को बनाए रखते हुए भाषा और प्रवाह को थोड़ा सुसंगठित रूप में प्रस्तुत किया गया है —

विश्व परिवार दिवस

स्वरचित भावाभिव्यक्ति

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक

16-5-2026

ज्ञान-भूमि,

आध्यात्मिक भूमि

भारत का आदि संदेश —

“वसुधैव कुटुम्बकम्”

“सर्वे जना: सुखिनो भवन्तु”

“जय जगत”

यह वह नारा था,

जब प्राकृतिक बाधाएँ असीमित थीं,

आवागमन के साधन नहीं थे।

आज आवागमन क्रांति का युग है —

हवाई जहाज, रेल, हेलिकॉप्टर,

जहाज और पनडुब्बियों का जमाना है।

विश्व परिवार दिवस,

अंतरराष्ट्रीय वैवाहिक संबंध,

व्यावसायिक संबंध,

आंग्ल-भारतीय संस्कृति,

ईसाई-मुगल अंतर्मजहबी विवाह,

सिकंदर, सेल्युकस और चंद्रगुप्त के संबंध —

ये सब विश्व परिवार की भावना के उदाहरण हैं।

विश्व परिवार दिवस नया नहीं,

यह सनातन धर्म का शाश्वत संदेश है।

भारतीय विचारधारा का महत्व

संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से

1993 में विश्व-पटल पर उजागर हुआ।

विश्व-बंधुत्व, भ्रातृत्व,

शांति और मित्रता —

एक परिवार की तरह

रहने की प्रेरणा देते हैं।

भारत के इतिहास में

विश्व के अनेक देश आए।

“हिंदी-चीनी भाई-भाई” का नारा,

ह्वेनसांग की ज्ञान-यात्रा,

मुगलों के आक्रमण,

अंग्रेजों का व्यापारिक आगमन,

फ्रांसीसी, डच और पुर्तगालियों का शासन —

इन सबके पहले ही

भारत विश्व-परिवार की भावना को

जी रहा था।

1994 में

विश्व परिवार दिवस की घोषणा से पूर्व ही

भारत में विश्व-परिवार की चेतना विद्यमान थी।

जय जगत।

जय जगत भ्रातृत्व।

Monday, May 11, 2026

माँ का घर தாய் வீடு

 


नमस्ते वणक्कम्।

தமிழ் ஹிந்தி பணி 

तमिऴ् हिंदी सेवा।

तमिल भी हिंदी भी 

माँ का घर

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

12-5-26

++++++++++++

माँ न होती तो मैं नहीं,

अरुण सूक्ष्म बिंदु-सा जीवन,

जिसे बिना सूक्ष्मदर्शी यंत्र के

देख पाना भी संभव नहीं।

एक-एक महीने पलकर,

दस महीनों में आकार पाकर,

मानव बना यह जीवन।

वही माँ का पावन गर्भ,

वही प्रथम मातृभूमि,

जहाँ दसवें महीने तक

पंचतत्वों की सुविधाओं में

अंधकारमय पेट के भीतर

सुरक्षित रहा मानव।

माँ का वह घर ही

मेरे अस्तित्व का आधार।

स्तनपान बिना

स्वास्थ्य कहाँ संभव?

मातृभाषा ही पहली बोली,

विचार-अभिव्यक्ति का प्रथम साधन।

मातृभूमि में ही

स्वतंत्र जीवन का विस्तार।

माँ का घर —

प्यार का अनंत गगन,

प्यार का अथाह सागर,

प्यार का मधुर रस,

प्यार का दिव्य अलंकार,

प्यार का निर्मल भाव।

निष्कलंक ममता का

अक्षय संसार।

வணக்கம்.

உங்கள் கவிதையின் உணர்வு மிகவும் ஆழமானது.

“தாயின் கருவறையே மனிதனின் முதல் வீடு” என்ற சிந்தனை மிக உயர்ந்த தத்துவ உணர்வை தருகிறது.

அதை தமிழில் உணர்வோடு வடிவமைத்தால் இவ்வாறு அமையும்:

அம்மாவின் வீடு

எஸ். அனந்தகிருஷ்ணன், சென்னை

12-5-26

++++++++++++

அம்மா இல்லையேல்

நானில்லை.

அணுவைப் போலியொரு

சிறு உயிர்த்துளி,

நுண்ணோக்கி இல்லாமல்

காண முடியாத அதிசயம்.

மாதம் மாதமாக வளர்ந்து,

பத்து மாதங்கள் கடந்தபின்

மனித உருவம் பெற்றேன்.

அம்மாவின் கருவறையே

என் முதல் தாயகம்.

அங்கே பத்து மாதங்கள் வரை

பஞ்சபூதங்களின் அருளில்

இருள்மிகு கருவறைக்குள்

பாதுகாப்பாய் வாழ்ந்தேன்.

அம்மாவின் அந்த வீடே

என் உயிரின் அடித்தளம்.

தாய்ப்பால் இல்லாமல்

உடல்நலம் இல்லை.

தாய்மொழியே

முதல் பேச்சு.

எண்ணங்களின்

முதல் வெளிப்பாடு.

தாய்நாட்டில்தான்

சுதந்திரமான வாழ்க்கை.

அம்மாவின் வீடு —

அன்பின் எல்லையற்ற வானம்,

அன்பின் ஆழமிகு கடல்,

அன்பின் இனிய சுவை,

அன்பின் அழகிய அலங்காரம்,

அன்பின் தூய உணர்வு.

களங்கமற்ற தாய்மையின்

நிலைவாழ் உலகம்.

மிக்க நன்றி. உங்கள் சிந்தனைகளில் தத்துவமும், தாய்ப்பாசத்தின் பரிசுத்தமும் அழகாக இணைந்திருக்கிறது.



Sunday, May 10, 2026

राणा प्रताप सिंह ராணா பிரதாப் சிங்

 तमिल हिंदी सेवा 

தமிழ் ஹிந்தி பணி 

‌தமிழும் ஹிந்தியும்

तमिल भी हिंदी भी


राणा प्रताप सिंह — मेरे विचार

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी सेवी, हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

११-५-२६

++++++++

भारत अपने ज्ञान,

आध्यात्मिक चिंतन,

देशभक्ति और वीरता के कारण

संपूर्ण विश्व का मार्गदर्शक रहा है।

समृद्ध भारत को लूटने के लिए

अनेक विदेशी शक्तियों ने

बार-बार आक्रमण किए।

अतिथि-सत्कार और शांतिप्रियता के कारण

भारत में मुगल शासकों का शासन स्थापित हुआ।

मुगलों के विरुद्ध

अकेले अद्भुत वीरता के साथ

राजस्थान के वीर महाराणा

राणा प्रताप सिंह लड़े।

वे अंत तक अकबर के सामने

झुके नहीं।

उन्होंने गुरिल्ला युद्ध नीति अपनाई।

उस समय अनेक छोटे-छोटे भारतीय राजा

उनका साथ देने के लिए तैयार नहीं थे,

फिर भी राणा प्रताप सिंह

भूखे-प्यासे रहकर भी

अपने स्वाभिमान की रक्षा करते रहे।

उन्होंने मुगलों के सामने

कभी घुटने नहीं टेके।

भारतीय इतिहास में

उनका नाम अनुपम और अमर है।

उनका प्रिय घोड़ा चेतक भी

अत्यंत निडर और स्वामीभक्त था।

उस वीर घोड़े ने

अपने देशभक्त स्वामी की रक्षा के लिए

अंतिम क्षण तक साथ निभाया।

चेतक की वीरता और निष्ठा का वर्णन करते हुए

कवि आज भी नहीं थकते।

हल्दीघाटी का युद्ध

भारतीय इतिहास में अत्यंत प्रसिद्ध है।

युद्ध में कठिनाइयाँ आने पर भी

राणा प्रताप झुके नहीं।

उनका जीवन

राष्ट्रीय एकता,

देशभक्ति और आत्मसम्मान का

अद्भुत संदेश देता है।

वे हमें प्रेरणा देते हैं कि

देश के गौरव और स्वतंत्रता के लिए

प्राणों का बलिदान भी महान होता है।

भारतीय युवाओं के लिए

राणा प्रताप सिंह

सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे।

वे चिरस्मरणीय और अनुकरणीय हैं।

जय हिंद।

जय वीर महाराणा प्रताप सिंह।

தமிழ் மொழிபெயர்ப்பு

ராணா பிரதாப் சிங் — என் எண்ணங்கள்

எஸ். அனந்தகிருஷ்ணன், சென்னை, தமிழ்நாடு

இந்தி நேயர், இந்தி சேவகர் வழங்கும் சுயரசனை

11-5-26

இந்தியா தனது ஞானம்,

ஆன்மீக சிந்தனை,

தேசப்பற்று மற்றும் வீரத்தால்

உலகிற்கு வழிகாட்டியாக விளங்கியது.

செல்வச் செழிப்பான இந்தியாவை கொள்ளையிட

பல வெளிநாட்டு ஆட்சியாளர்கள்

தாக்குதல் நடத்தினர்.

அமைதியையும் விருந்தோம்பலையும் போற்றிய

இந்திய நாட்டில்

முகலாய ஆட்சி நிலை பெற்றது.

முகலாயர்களுக்கு எதிராக

தனித்த வீரத்துடன் போராடியவர்

ராஜஸ்தானின் மகா வீரர்

ராணா பிரதாப் சிங்.

அக்பரின் முன்

இறுதி வரை தலை குனியவில்லை.

அவர் கொரில்லா போர் முறையைப் பயன்படுத்தினார்.

அந்நாளில் பல சிறு இந்திய அரசர்கள்

அவருக்கு துணை நிற்கத் தயங்கினார்கள்.

ஆனால் ராணா பிரதாப் சிங்

பசி தாகங்களைச் சகித்தும்

தன் சுயமரியாதையை விட்டுக் கொடுக்கவில்லை.

முகலாயர்களின் முன்

ஒருபோதும் மண்டியிடவில்லை.

இந்திய வரலாற்றில்

அவரது பெயர் அழியாத புகழாகும்.

அவரது வீரக் குதிரையான சேதக்

அச்சமற்றதும் எஜமானன்பற்றுடையதுமாக இருந்தது.

தன் நாட்டுப்பற்றுள்ள அரசனை காப்பாற்ற

இறுதி மூச்சுவரை உறுதியாக இருந்தது.

அந்த நன்றியுள்ள குதிரையின் புகழைப் பாட

கவிஞர்கள் இன்றும் சலிப்பதில்லை.

ஹல்திகாட்டி போர்

இந்திய வரலாற்றில் மிகவும் புகழ்பெற்றது.

தோல்வி நேர்ந்தபோதும்

ராணா பிரதாப் தலை குனியவில்லை.

அவரது வாழ்க்கை

தேசிய ஒற்றுமைக்கும்,

தேசப்பற்றிற்கும்,

சுயமரியாதைக்கும்

மிகப்பெரிய எடுத்துக்காட்டாகும்.

நாட்டின் கௌரவத்திற்காக

உயிரையும் தியாகம் செய்ய வேண்டும் என்ற

உந்துதலை வழங்குகிறது.

இந்திய இளைஞர்களுக்கு

ராணா பிரதாப் சிங்

என்றும் ஒரு பேரிற்சாகமாக இருப்பார்.

அவர் என்றும் நினைவில் நிற்கும்

மாதிரிப் பெருமகன் ஆவார்.

ஜெய் ஹிந்த்!

வீர ராணா பிரதாப் சிங்கிற்கு ஜெய்!