Wednesday, August 5, 2026

कण्णदासन चित्रपट गीत।

 

तमिऴ हिंदी सेवा

नागरी लिपि में।

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पाप की क्षमा --पावमन्निप्पु तमिल चित्रपट में 

कवि सम्राट कण्णदासन् का गीत का तमिऴ अनुवाद।

अनुवादक --एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।



 वंदे नाळ् मुतल= आये दिन से

इंद नाळ वरै --इस दिन तक 

 वानम् माऱविल्लै -- आकाश न बदला।

वानमतियुम् नीरुम् कडल् काट्रुम् = आकाश , चंद्र, नीर, समुद्र पवन

मलरुम् मण्णुम् कॊडियुम् सोलैयुम् नदियुम माऱविल्लै =

फूल, मिट्टी,लता,उद्यान नदी नहीं बदले

 मनितन माऱिविट्टान --= मनुष्य बदल गया।

मतत्तिल एरिविट्टान = मद में चढ़ गया।

निलै माऱिनाल् = स्थिति बदलने पर

गुणम् माऱुवार== गुण में बदलेंगे।

जातियुम भेदमुम् कूऱुवार = जातिभेद बोलेंगे।

वेदना विधि ऍनऱोतुवार= वेद विधि पढ़ेंगे।

मनुष्य बदल गया, मद में चढ़ गया।

पऱवैयैक्कंडान = पक्षी को देखा

विमानत्तै पड़ैत्तान  =वायुयान का पता लगाया।

पायुम मीनकळिल् पडकिनैक्कंडान।

तैर थी मछलियों  में नाव को देखा।

ऍतिरोलि केट्टान वानोलि पडैत्तान्= गूँज बना आकाशवाणी का आविष्कार किया।

 न जाने किसको देखा , धन का पता लगाया।

मनुष्य बदल गया।

इन्बमुम् कातलुम इयऱ्क्कैयिन नीति  =

सुख और प्यार प्रकृति की नीति।

एट्रताऴ्वुकळ  मनितनिन जाति।==

ऊँच नीचे मनुष्य की जाति।

पारिल इयर्क्कै पडैत्ततैऍल्लाम्=

 संसार में प्रकृति की सृष्टि सब को 

मनितन् माऱिविट्टान = मनुष्य ने बदल दिया।

मद पर चढ़ गया।










 

कालों में वह वसंत காலங்களில் அவள் வசந்தம்.

 कालों में वह वसंत =कालंगलिल  अवळ वसंतम्।

कण्णदासन के गीत।

 चित्रपट --पाप की क्षमा।

अपने प्रेयसी के बारे में।

 तन कादलियैप्पटृरि।

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  ऋतुओं में वह वसंत ऋतु।== कालंगलिल् अवळ्‌धसंतम्लओं में वह चित्र कला ==कलैकलिल अवळ् ओवियम्।

मासों में वह मृगशीर्ष --- मातंगलिल् अवळ्‌मार्कऴि

फूलों में वह चमेली --पूक्कलिल् अवळ् मल्लिकै

 पक्षियों में वह कबूतर -- पऱवैकळिल् अवळ् मणिप्पपुऱा।

गीतों में वह लोरी ==पाडलकऴिल् अवळ् तालाट्टु

फलों में वह आम== कनिकऴिल् वह मांगनी

वायु में  वह  समीर =काट्रिनिल अवऴ तेन्ऱल्

 दुग्ध समान  हँसने में  वह बच्ची। --पाल् पोल् चिरिप्पतिल् पिळ्ळै।

बर्फ सा गले लगाने में वह कुमारी -- पनि पोल अणैप्पतिल् कन्नि।

नयनों सी सुरक्षा में माँ --कण पोल वार्प्पतिल् अन्नै।

कवि बनायी मुझको।

कालों में वह वसंत।

 

 


तमिल सिनेमा गीत। पाप की क्षमा

  तमिऴ चित्रपट  गीत सम्राट कण्णदास  के गीत 

 पाव मन्निप्पु(पाप  की क्षमा) के गीत।

तमिल हिंदी सेवा देवनागरी लिपि में 

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति अनुवाद 

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  सिलर्  सिरिप्पार,  ==कुछ लोग हँसेंगे

सिलर अऴुवार  ==कुछ लोग रोएँगे

 नान चिरित्तुक्कोंडे  = मैं हँसते हुए 

अऴुकिन्रेन। == रोता हूँ।

पासम् -- स्नेह 

नेंचिल ==दिल में 

मोदुम् --टकराएगा।

अंतप्पादैयै --उस मार्ग को

भेदंगळ् --भेदभाव

मूडुम==बंद करेगा।

उऱवै =नाते को 

ऍण्णि =सोचकर 

चिरिक्किन्रेन =हँसता हूँ।

उऱिमै यिल्लामल् --अधिकार रहित 

रोता हूँ =अऴुकिन्ऱेन्।

कुछ लोग रोएँगे, 

कुछ लोग हँसेंगे

मैं रोते हुए हँसता हूँ।

 करुणै पॊंगुम् उळ्ळम् -- करुणा उमड़ते दिल

 अतुल कडवुळ् वाऴुम् इल्लम् =वह ईश्वर बसे आवास।

  करुणै मऱंते वाऴ्ककिन्रुरार् = करुणा भूलकर जीते हैं 

कडवुलैत्तेडि अलैकिन्रार्==भगवान  की खोज में भटकते हैं।

कुछ लोग रोते हैं, कुछ लोग हँसते हैं,

मैं रोते हुए हँसता हूँ।

 कालम् ऒरु नाळ्  माऱुम् -- वक्त एक दिन बदलेगा।

कवलैकऴ याउम् तीरुम् = चिंताएँ सब मिट जाएँगे।

वरुवतै ऍण्णि चिरिक्किन्रेन == जो कुछ आनेवाले हैं 

उसको सोचकर हँसता हूँ।

वंततै ऍण्णि अऴुकिन्रेन् --जो आये हैं, उन्हें सोचकर रोता हूँ।

कुछ लोग रोएंगे, कुछ लोग हँसेंगे 

मैं रोते हुए हँसता हूँ।




 



नीति रीति व्याख्या --நீதி நெறி விளக்கம்.

 तमिऴ भाषा में भक्ति और आध्यात्मिक साहित्य 

का अनंत सागर हैं।  मानव जीवन अस्थाई है।

 आध्यात्मिक दिव्य चिंतन ही  ब्रह्मानंद है।

 मन की चंचलता मिटानेवाली है।  सांसारिक माया से 

मानव को बचाने ईश्वर का ध्यान प्रधान है।

   ऐसे भक्त कवियों में भगवान कार्तिकेय की कृपा से 

 कवि बने । पाँच साल तक कुमरगुरुपरर्  गूँगे थे।
तिरुच्चेंदूर भगवान कार्तिकेय का पुण्य क्षेत्र है।
उनके माता-पिता  शिवकाम सुंदरी और षण्मुख शिखामणि कविरायर
 उनको तिरुच्चेंदूर ले गये। वहाँ सुब्रह्मण्य की कृपा से गूंगा बच्चा बोलने लगा।
वर कवि बनकर कंदर कलिवेण्बा की रचना की।भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) उनके स्वप्न में बालक के रूप में आकर काव्य रचने का ज्ञान दिया। उनका 1625 ई. में उनका जन्म हुआ। 18  मई महीनेमें 1688 में वारणासी में स्वर्ग सिधार गये। उनके गुरु मासिलामणि देसिकर थे।गुरु की आज्ञा से मुगल काल में सनातन धर्म की रक्षा के लिए काशी पहुँचे।
तब काशी विश्वनाथ मंदिर मुगल बादशाह के अधीन था। कुमरगुरुपरर. काशी मंदिर को सौंपने की आज्ञा दी। तब बादशाह ने अरबी भाषा में बोलने की आज्ञा दी। कुमरगुरुपर् ने
सकल कला वल्ली माला लिखकर बादशाह को तर्क में हराकर काशी को मुगल चंगुल से छुडाया। 
तमिलनाडु के ताम्रभरनी नदी तट पर जन्म लेकर  गंगा नदी के तट पर स्वर्ग सिधारे।

उनके द्वारा रचित ग्रंथ हैं---मदुरै कलंबकम्, नीति नेरि विलक्कम्, तिरुवारूर नान्मणिमालै,
मुत्तुक्कुमारसामी पिल्लैत तमिल् ,काशी कलंबकम् चितंबरम् मुम्मणिक्कोवै,सकलकला वल्लि मालै आदि। 

   अब नीति नेरि विलक्कम  नीति गीत १०२ के सार हिंदी मेंअनुवाद कर रहा हूँ।
भगवान के अनुग्रह से वह ग्रंथ  हिंदी भाषियों को पसंद आएगा।

1. जवानी पानी के बुलबुले के समान है।अति संपत्ति भी हवासे बनी पीनी के बुलबुले के समान है। यह शरीर भी पानी में लिखे अक्षर समान है। जवानी,संपत्तियाँ और शरीर अस्थिर और मिटने वाले हैं। अतः ये सब के रहते ईश्वर की प्रार्थना करनी चाहिए। 

शिक्षा की विशेषता 
2.

அறம் பொருள் இன்பமும் வீடும் பயக்கும்
புறங்கடை நல் இசையும் நாட்டும் - உறும் கவல் ஒன்று
உற்றுழியும் கைகொடுக்கும் கல்வியின் ஊங்கு இல்லை
சிற்றுயிர்க்கு உற்ற துணை.

अऱम् = धर्म

पोरुल = अर्थ, धन

इन्बमुम्= सुख भी

वीडुम् = मोक्ष भी

पुरंगकडै =अपने शहर के बाहर भी

नल इसैयुम  नाट्टुम् =  सुयश देगा।

उट्रुलियुम्   कैकोडुक्कुम् = होनेवाले दुख के वक्त साथ देगा।

कल्वियिन ऊँगु इल्लै = शिक्षा के समान और कोई नहीं

चिट्रुयिऱक्कु उट्र तुणै=  लघु काल जीनेवाले अल्प ज्ञानी मनुष्य

 के लिए उपयुक्त साथी ।

17वीं शताब्दी के भक्त तमिल कवि काशीवासी मुगलों  की

आधीनता से काशी मंदिर को छुडाये कुमरगुरुपरर् का कहना है

 कि  मनुष्य  धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष देनेवाले, होनेवाले दुख के

 समय साथ देनेवाले ,अपने शहर के बाहर भी सुयश देनेवाले ,

लघु 
 लघु काल जीनेवाले  अल्प ज्ञानी मनुष्य

 के लिए उपयुक्त साथी   विद्या के समान और कोई नहीं है।

3. கல்வியின் இன்பம்

தொடங்கும்கால் துன்பமாய் இன்பம் பயக்கும்
மடம் கொன்று அறிவு அகற்றும் கல்வி நெடுங்காமம்
முன் பயக்கும் சில நீர இன்பத்தின் முற்றிழாய்
பின் பயக்கும் பீழை பெரிது

शिक्षा का सुख

तोडंगुम काल-अध्ययन के प्रारंभिक काल में

तुन्बमाय = दुख मय 

इन्बम् पयक्कुम  =बाद में सुख देगा।

मडम कोन्ऱु  =मूर्खता मारकर 

अऱिवु = ज्ञान देकर

अकट्रुम= अज्ञानता दूर

 करेगी।

नेडुंकामम् -- अधिक

कामेच्छा 

सिल नेर इन्बम् = कम

समय का सुख

मुट्रिलाय = सुंदर

आभूषण की सुंदरी

पिन पयक्कुम पीलै पेरितु

 = कामांधता में आनेवाले संताप

 अधिक है।


 
17वीं शताब्दी के भक्त तमिल कवि काशीवासी मुगलों  की

आधीनता से काशी मंदिर को छुडाये कुमरगुरुपरर् का कहना है

 कि  हे सुंदर आभूषण की सुंदरी!  विद्या अध्ययन का

 आरंभकाल  दुखमय होने पर भी वह ज्ञान देकर अज्ञानता

 मिटाकर स्थायी सुख देगा। 

अधिक कामेच्छा कम समय का अस्थाई दुख देगा। कामांधता

 में आनेवाले संताप स्थाई होगा।














 

Tuesday, August 4, 2026

संताप

 संताप!?

 मानव जीवन में 

 निश्चित है।

 सुख दुख के मधुर मिलन में होता

 जागता मानव जीवन।

  

मानव का जीवन  

 पाप का फल है।

 कहते हैं 

मानव जीवन 

दुर्लभ है। 

सच है क्या?

 राम का जीवन दुख मय।

 कृष्ण का जन्म जेल में।

 अपनी माता के आलिंगन में नहीं।

 दानवीर कर्ण को माँ का प्यार न मिला।

 कुंती के पति रोगग्रस्त।

 बच्चे अवैध संबंध  से।

 दशरथ के  अपने पुत्र नहीं है।

 राजा भर्तृहरि की पत्नी के अवैध संबंध से संन्यासी बने।

मानव जीवन में शांति कहाँ?

 प्रधानमंत्री मोदी  की पत्नी ,

 जयललिता  का जीवन।

 सीता के दुख।

 मानव जीवन संताप  का   अनंत सागर।

Monday, August 3, 2026

प्रार्थना இறைவணக்கம்.

 இனிய காலை வணக்கம்.

सुप्रभात। नमस्ते।



  இறை

வணக்கம்.


प्रार्थना।


 மணமான மகிழ்ச்சி.

वैवाहिक खुशी।

 இறைவன் அளித்தது..

ईश्वर की देन।

 மனைவி உயிரெடுத்த துன்பம்  இறைவன் அளித்தது.

 पत्नी  के प्राण लेकर दुख ईश्वर की देन।


 இறைவனை பழிப்பதா?

ईश्वर की निंदा करनी है?


 இறைவனைப் போற்றுவதா?


ईश्वर  की प्रशंसा करूँ?

  புரியாத மனித ஞானம்.

ना समझ मनुष्य ज्ञान।


 மனவேதனை

 ஏன்

 இருக்கிறோம் என சளிப்பு.

मनुष्य की वेदना 

क्यों जीते हैं।

मन में नीरसता।


 இறைவனின் சூக்ஷ்மம்.

ईश्वर की सूक्ष्मता।

  இயற்கையான  ஞானம்.

 प्राकृतिक ज्ञान। सहज ज्ञान।

 இறைவனளிப்பது.

ईश्वर की देन।



 நமது சேர்க்கை அளிப்பது 

செயற்கை  ஞானம்.


हमारे संग की देन

कृत्रिम देन।

 அதில் மாயையும் இருக்கும்.



उसमें माया होगी।

 ஆன்மீக    ஆனந்தம் இருக்கும்.

 आध्यात्मिक आनंद होगी।

 நல்வழி இருக்கும்.

सुमार्ग रहेगा।

 தீய வழி இருக்கும்.

दुर्मार्ग रहेगा।

 ஆண்டவன் அருளிருந்தால் தான் மாயைபிடிக்காமல் ஆன்மீகம் பிடிக்கும்.



भगवान का अनुग्रह रहें तो आध्यात्मिकता पसंद होगी।

 உலகம் மாயை.

जग माया है।।

 உலகநாதன் உண்மை.

जगन्नाथ सत्य है।

கபீர் பக்தி कबीर भक्ति

 तंमिल हिंदी सेवा

தமிழ் ஹிந்தி பணி.


சே. அனந்த கிருஷ்ணன்.

एस. अनंतकृष्णन 


संत कबीर 

கபீர்.

नहाये धोये क्या हुवा,

मन का मैल न जाए।

मीन सदा जल में रहे,

धोये बांस न जाये।

மன அழுக்கு அதாவது மனத்தூய்மை இன்றி குளிப்பதால் கழுவுவதால் என்ன பயன்?

 மீனகள் எப்பொழுதும் தண்ணீரில் இருந்தாலும் அதன் துர்நாற்றம் போகாதே.


भले जाय बद्री

भले जाय गया

कहे कबीर सुनो भाई साधो 

सबसे बड़ी दया।

  பத்ரிநாத் சென்றாலும்  காசிக்குச் சென்றாலும் நல்லது நடக்குமா?

 கபீர் சொல்கிறார் 

கேள்

சகோதரா!

இரக்க குணம் தான் பெரிது.


मथुरा जाउ भावे द्वारका।

भले जांच जगन्नाथ।

साथ संगति भक्ति बिन,

कुछ भी न आवे हाथ।


மதுரா போனாலும் துவாரகா பிடித்தாலும்

ஜகந்நாதன் பிடித்தாலும்

 உடன் உள்ளத்தில் பக்தி இல்லாமல் 

 எதுவும் நடக்காதே.




 मन में ही मक्का,

दिल में द्वारिका।

काया काशी जान।

दस  द्वारा का देहरा

देह माही ज्योती बसान।

ना तीर्थ में,

ना मूरत में 

 मोटो ढूँढे रे बन्दे।

मैं तेरे पास में।

 மனதே

 மக்கா,

மனதே துவாரகா

 உடலே காசிதான்.

தெரிந்து கொள்.

 பத்து துவாரங்கள் உள்ள உடல் 

 அதில் தான் இறைவன்  குடியமர்ந்து உள்ளான்.

 என்னை எங்கே தேடுகிறாய் பக்தா!

 உடலில் ஒளியாக உள்ளேன்.

நான் புனித இடத்தில் இல்லை.

நல்ல நேரத்தில் இல்லை.

 என்னை  எங்கே தேடுகிறாய்.

 நான் உன். மனதில் உன் அருகிலேயே உள்ளேன்.

   மனதில் தூய பக்தி இருந்தால் கடவுளே உனக்குள் 

 என்னருகில் இருக்கிறார்.