Saturday, November 3, 2012

hamaare guru shiv-2




शिव भगवान के दाये हाथ में डमरू है.संसार के कारक समस्ती सप्त स्वरुप का सूचक है वह डमरू.समझाने  केलिए कहें तो सतगुरु के हाथ में उनकी इच्छानुसार विस्तृत और संकुचित करने के लिए है.यह संसार ब्रह्म ज्ञानी के लिए उसकी इच्छा पर निर्भर है.
शिव के समीप एक हिरन है.वह मृग मन का प्रतीक है.मन चंचल है हिरन सा.उछल कूदने  वाला हिरन मन सा.आत्म -वस्तु मृग-सा  मन  की दृष्टी  तक नहीं पहुंचेगी.इसी कारण से शिव -नटराज के पैर के समीप है.बाघ अहंकार का प्रतीक है.अतः बाघ को मारकर उसका चरम कटी प्रदेश और शरीर को ढका हुआ है.अहंकार का वध नटराज से ही संभव है
भारत  में जितनी धार्मिक सहिष्णुता है,
उतनी और कहीं नहीं है।

मनुष्य  मन  अत्यधिक चंचल हैं।
क्या  वह थोड़ी देर चुप रह सकता हैं।

उस मन को काबू में लाने के प्रयत्न  में  वह हार जाता है।
मानसिक न्यंत्रण एक बड़ी तपस्या  है।
मन को काबू में रखने की बाधाएं  प्राकृतिक है।
अतः अप्राकृतिक न्यंत्रण मुश्किल हैं।

खुशबू,बदबू ,ठंडी हवा  ,गरम हवा,गर्मी,सर्दी,
प्राकृतिक परिवर्तन,उत्तेजना ,प्रेरणा,प्रोत्साहन आदि 
मनुष्य में प्राकृतिक बाधायें हैं।


Friday, November 2, 2012

तमिल और हिंदी सीखो। विना सोर्कल =केल्वि सोर्कल==प्रश्नवाचक शब्द

तमिल और हिंदी सीखो।

विना सोर्कल =केल्वि  सोर्कल==प्रश्नवाचक शब्द 

यार=कौन 
ऍन्न= क्या 
येन =क्यों 
एप्पोलुतू ==कब 

एँगे =कहाँ 

एप्पडी =कैसा 

एतर्क्काका =किसलिए 
यारुक्काक= किसकेलिए 

इतु   एन्न?==यह  क्या है?
इतु  पेना .=यह  कलम है।

इतु   यार ?=यह कौन है?

इवन   पैयन = यह लड़का है।
इवल सिरुमी।=यह लडकी है।
अवल यार?=वह कौन है?
अवल सीता .=वह सीता है।
अवन  यार?=वह कौन है?
अवन रामन।=वह रामन है।






Tuesday, October 30, 2012

शादी एक पवित्र बंधन है. कब से ?

शादी एक पवित्र बंधन है. कब से ? मानव  सभ्य बन्ने के बाद. पाषाण युग  के बाद. ज्ञान  प्राप्ति के बाद.  मनुष्य समाज  में मनुष्यता आने के बाद. पाश्चात्य देशों में  इसका कोई ठोस बंधन नहीं है. कारण वे विज्ञानिक है.
उनका जीवन सैद्धांतिक  और प्रायोगिक  आधार पर है.  भारत में सिद्धांत  का जितना महत्त्व है,उतना  प्रायोगिक का नहीं; सरकारी  पाठशालाओं में विज्ञान सिखाते हैं,जहाँ  प्रायोगिक वर्ग नहीं है;वहां प्रयोग शाला भी नहीं है.
कोरे सिद्धांत  काम का नहीं है. आधुनिक युग में ज्ञान  का विस्फोट हो गया.इतना सोचता हैं,कि देवकी और vasudev  को अलग-अलग कोठी में रखें तो कृष्णा का जन्म ही नहीं होता. या गर्भ-पात का दवा देता रहता.एक बच्चे का जन्मा लेना ,उसे मारना  यह तो प्रायोगिक नहीं है; राम का जन्म भी आजकल का  स्पर्म बैंक का पूर्व रूप. अतः शादी सभ्यता का बंधन है;  संयम  की जरूरत हैं. वह तो प्राकृतिक उत्तेजना है. ब्रह्मचारी  का पाठ  रुष्य श्रुंग को सिखाया गया;केवल सैद्धांतिक ;प्रयोग में असफल ही रहा. साmaaजिक  बंधन ,क़ानून तोड़ना आजकल एक डाकू और एक खूनी,एक भ्रष्टाचार मंत्री के लिए आसान है तो  ईश्वर की दी हुयी प्राकृतिक इच्छा को अपने संयम से या कोई धार्मिक या जाति  बंधन से  दबाना  असंभव है;इसीलिये  जब शादी की उम्र बढ़ाई गयी  तब से  बलात्कार,तलाक,शादी के बाद दुसरे पुरुष से सम्बन्ध,दूsरी स्त्री के सम्बन्ध से अपनी पत्नी की हत्या,दूsरे पति या पुरुष से सम्बन्ध रखकर अपने पति की ह्त्या ये सब हो रही है. यह तो आजकल की बात नहीं है; बिना पिता के बच्चे का जन्मा होना ईसाई धर्म में है;संत कबीर की जीवनी में है.शीरड़ी  के जीवन में है.महाभारत में तो पुत्रोत्पत्ति कैसे हुई,इसकी चर्चा करना देव्निन्दा है. आधुनिक बुद्धिबल  बहुत सोचता है. अतः हमारे पूर्वजों  ने सोच समझकर समाज कल्याण के लिए सयानी होने के पहले ही शादी की व्यवस्था  बना रखीं है.उसमें केवल पुरुषों के लिए दूसरी शादी करने की अनुमति  है. इसे नारी को भी लागू करने पर  शादी की उम्र १५ साल ही उचित है,जिससे बलात्कार कम होगा.इतना ही नहीं ,तीस साल की उम्र अंग शिथिल हो जाता है. मानसिक नियंत्रण या हस्त मैथुन पुरुषों में हीनता प्रवृत्ति लाती है; परिवार में अशांति,पति-पत्नी में झगडा,गैर पुरुष सम्बन्ध ,तलाक  आदि. देवदासी  प्रथा,बहु पत्नी ,बहु-पति ये सब हामारी पौराणिक कथाओं में,पुरानों में,इतिहास में है. कम उम्र की शादी  से मोहनदास करमचन्द की जीवनी तरक्की हुई.विवाहिक जीवन में वे सानंद रहे; जब परिवार में पति-पत्नी दोनों में संदेह का ज्वार-भाटा होता  रहता है,वह मनुष्य जीवन के सर्वांगीण विकास में बाधक रहेगा ही.  आजकल यही हो रहा है तनाव मय  पारिवारिक जीवन.

Sunday, October 28, 2012

क्या मायन के अनुसार दुनियां का विनाश होगा?



क्या  मायन  के अनुसार दुनियां का विनाश होगा?

  कहा जाता है कि  दिसंबर 21,2012 के दिन  संसार  का नाश होगा?
जब यह किम्वदंती फैली,कुछ लोग चिंता मग्न हो गये।
कहा गया है कि ये मायन लोग अति प्रतिभाशाली  थे।
उन्कीदैनिकी के अनुसार दुनिया में प्रलय होगा।

वास्तव में यह दुनिया नश्वर  है।
 परिवर्तनशील है।
 मनुष्य  चतुर,चालाक है।
  फिर भी उनकी मृत्यु निश्चित  है।
संसार तो रहेगा ही।
 मनुष्य जो बुद्धिजीवी  है,उसी के कारण  वनस्पतियों  का ,पशु-पक्षियों का विनाश होगा। भूमी गरम होगी।
जल,थल, वायु का प्रदूषण होगा।
 इस प्रकार  प्राकृतिक विकार के कारण अतिवृष्टि होगी  या अनावृष्टि होगी।बरफ पिघलेगा। भूकंप होगा।धरती सूखेगी। यह तो बुद्धिमान   मनुष्य  का  कर्म-फल है।उसीको भोगना  पड़ेगा।
दूसरा  चतुर मनुष्य अपने लोभ के  कारण  या  अहम् की भावना  लेकर आपस में कट  मरेगा।लूट-मार-डकैती के  कारण मरेगा।कुर्सी केलिए   मरेगा। पद के  लिए मरेगा।पदोन्नति केलिए मरेगा।जाति  के नाम से धर्म -सम्प्रदाय केनाम से कट मरेगा।
देश की सीमाओं केलिए ,दुसरे देशों के व्यवहार में भाग लेकर मरेगा।आजादी के लिए ,अपने हक केलिए मरेगा।
सर्वशक्तिमान  ईश्वर की लीला निराली है।
ईश्वर ने  केवल मनुष्य को सोचने की शक्ति दी है ।वही भले-बुरे का पहचान सकताहै। फिर भी वह  अत्याचार  करता है;अन्याय करता है;खून करता  है।डाका डालता  है।भ्रष्टाचार करता है।
ईश्वर  या  प्राकृतिक दंड से कोई भी बच नहीं सकता। यज्ञ होम-हवन ,जप-तप  जो  भी हो ,उसको  किये कुकर्मों से नहीं बचाएगा।
अतः  मनुष्य के कारण  प्रकृति अपना संतुलन खो बैठेगा।
पीढी     दर पीढ़ी  संताप  सहते रहेंगे।

जब उनका कृत्य  अत्याचार और्  प्रकृति के विरुद्ध 
अपनी चरम सीमा पर 
पहुँचेगा ,तभी संसार का विनाश होगा।

आज भी संसारमें  न्यायप्रिय लोग रहते हैं;प्रदूषण से प्रकृति को बचाने के प्रयत्न  में हैं।  ईश्वर के भरोसक  हैं। आज भी संसार बिगड़ा  नहीं  है।
संसार में जब तक अच्छे लोग रहेंगे,तब तक संसार का  विनाश नहीं होगा।
70%अच्छे  हैं। 
प्रतिभावान,जो   संसार को सद-मार्ग 
 दिखाकर  जल्दी मिट जाते हैं।
उसको अपनाना या छोड़ना  सोच-समझ रखनेवाले मनुष्य पर निर्भर  है।
विनाश काले विपरीत बुद्धि जब आएगी,तब संसार रहेगा,पर जल-प्रलय होगा।
यह तो मनुष्य पर अवलंबित  है। 






Wednesday, October 24, 2012

o. हिंदी-तमिल सीखो

hindi-tamil seekho.  हिंदी-तमिल सीखो


नान पाडिक कोंडु इरुक्किरें।==मैं गा रहा हूँ।

नान विलैयाडिक  कोंडु इरुक्किरें।=मैं खेल रहा हूँ।

नान साप्पिट्टूक  कोंडिरुक्किरें।=मैं  खा रहा हूँ।

नान पेसिक्कोंडू  इरुक्किरें।=मैं  बोल रहा हूँ।

नान  सिनिमा  पार्त्तुक कोंडु  इरुक्किरें==मैं  सिनेमा देख रहा हूँ।

Tuesday, October 23, 2012

सामन्य जनता के लिए तीर्थ है;प्रार्थना है;उपवास है; जपहै; तप है;




हम लिखते हैं  आजकल की राजनीति केअत्याचार, भ्रष्टाचार, खून,बेरहमी;नमक हलाल आदि पर।


आज नवरात्री;दीपावली;सूर संहार,महिषासुर वर्द्धिनी;मोहिनी अवतार;
कृष्ण अवतार,वामन अवतार; मुहर्रम ,ईस्टर;

ये धार्मिक त्यौहार।सिखाते हैं हमें;
अन्याय और शासक धनियों के विरुद्ध 
सामान्य व्यक्ति लड़कर जीत नहीं सकता।
ईश्वरीय शक्ति खुद लड़कर नाश करता है।
शासक तो अपनी कुर्सी की रक्षा के लिए सब कुछ कर सकता है।
उसमें बल है;दल हैं ;अधिकार हैं;
सामन्य जनता के लिए तीर्थ है;प्रार्थना है;उपवास है; जपहै; तप है; 
संताप है।यहीं भोले भाले   दुर्बल लोगों को ईश्वरीय देन  है;
अतः मंदिरों  में  भीड़ अधिक हैं;