Saturday, November 10, 2012

जनता सावधान ;

जनता  सावधान ; 
विश्व वन्द्य  स्वामी  विवेकानंद ,
जिनके भाषण से , भारत का सम्मान बढ़ा ,
उनकी तुलना एक देश द्रोही से;
करनेवाले कितना होंगे नीच;
गुजरात की प्रगति देख;
प्रत्यक्ष प्रमाण;
उनकी तुलना  एक तहखाने के दादा से;
एक कमीने से ';
जिसको भूलना है;
भुलाना है;
उनकी याद रखते  है तो 
कैसे हैं येनेता;  काले धन छिपानेवाले।
लुटेरों  केसाथ  चिपककर  रहनेवाले;
जनता को बुद्धू  समझ रहे हैं।
आगे  इनको ऐसी सीख  सिखाना है,
जिससे   फिर जनता के आगे 
खड़े रहने का,बोलने का ताकत  न हो;
देश केलिए,देश की तरक्की  के लिए,
देश का सर ऊँचा  रखने  के लिए,
पैसों का मोह छोड़,
चुनिए  नेकों को;
ईमान्दारियों  को;
पता चल गया जिसके मन में बसा है ;
ब्लाक मार्केट का दादा 
जिसका नाम लेना भी पाप  है;
भारतीयों के लिए।
मणिशंकर अय्यर ड्रमुख दल की पूँछ पकड़कर आगे बढते है. 45 साल हो गये तमिलनाडु में. कांग्रेस अकेले चुनाव लडकर जीत नहीं सकता. दाऊद जो तहखाना दादा है उनकी तुलना करनेवाले कितना नीच होंगे;वह भी स्वामी विवेकानन्द  और आत्मनिर्भर गुजरात के मुख्य मंत्री केसाथ; समझता हूँ इन की बुद्धि फिर गयी है. मोदी साधक दाऊद के पिछलग्गू कांग्रेस. जनता समझ गयी. आगे कांग्रेस का दाल नहीं गलेगा.1967 से तमिलनाडु में दाल नहीं गला  कांग्रेस का।. क्या वह अकेले आनेवाले संसद चुनाव में लडकर तमिलनाडु में जीत सकता है. उनको जयललिता या करुणानदि का समर्थन चाहिये . मतदाता जागो; देश को बचाओ ;एक सुमगलेर जिसका नामोनिशान मिटाना है,छी!धूर्त. उनका नाम ले रहा है।

Friday, November 9, 2012

तमिल-हिंदी सीखो उलोकम =धातु

  तमिल-हिंदी सीखो 

उलोकम =धातु 
इरुम्बू=लोहा 
तंगम=सोना 
पित्तलै =पीतल
तामिरम=ताम्बा 
वेंकलम=काँच 
पंच लोकं=  पञ्च-धातु।

तमिलनाडु के हिंदी प्रचारक


तमिलनाडु   के   हिंदी प्रचारक

महात्मा  गांधीजी ,राष्ट्र पिता  ने   देश-भर  भ्रमण  करने के बाद  ,  देश की  एकता   के लिए एक आम भाषा   के रूप  में   हिंदी को चुना।  वे बड़े  दूरदर्शी  थे।भविष्य के ज्ञाता थे।

उन्होंने   चेन्नै  को केंद्र बनाकर  दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की।  1918 में स्थापित यह संस्था निस्वार्थ देश भक्त  प्रचारकों के अथक परिश्रम से फूली-फली।
1965 -67में हिन्दी का विरोध चला।बसें जलाई गयीं।रेल जले। कई हिंदी प्रचारक  क्रातिकारियों के कारण  अपमानित हुए।हिंदी के नाम्  लेनेवालों की जान का  खतरा था।
उस समय मैं हिंदी के प्रचार क्षेत्र में आया।मेरी मां  गोमतिजी और मामा सुब्रह्मणि यम जी सब हिंदी प्रचार  में लगे थे। तिरुच्चिहिंदी प्रचार सभा के सचिव टी।पि।वीराराघवन जी, संगठक  श्री  ई।तन्गाप्पंजी,श्री आर।के।नारासिम्हनजी ,श्री वि।एस।राधाकृष्णन जी, श्री सुमतींद्र,श्रीमती मीनाक्षीजीसब  सभा  की सेवा में लगे रहे।
श्री मति प्रेमाजी कालेज के  प्राध्यापिका के साथ हिंदी प्रचार में लगी रही।मदुरै में जी।पि।माधावाचारीजीऔर उनके दोस्त प्रचार कार्यमे लगे रहे।सेलम में बालाकंदसामी 
जैसे प्रचारक थे। तमिलनाडु  के  पलानी केंद्र में मैं और मेरी माँ  बिलकुल हिंदी प्रचार मुफ्त  में कर रहे थे।माँ  आज भी कर रहीं हैं।19667 से 1977 तक हिंदी सेवा के बाद 
मुझे सरकारी aided  स्कूल में नौकरी मिल गयी। चेन्नैमें  हिंदी के प्रचार में लगा। लेकिन यहाँ प्रचार दुसरे ढंग का था। जो भी हो सभाके संकट  काल में  मैंने साथ दिया;मेरे संकट कालमें सभा ही साथ दिया।अतः मैं सभा के प्रति आभारी हूँ .

लेकिन आज सभा आमजनता में प्रचार करनेवाले  प्रचारकों के प्रति ध्यान न देकर स्कूल -कालेज की प्रगतिमें लगी है।स्थाई हिंदी प्रचारकों की नियुक्ति में ध्यान नहीं दे रहीं है। सभा केचुनाव  में नए लोग आ नहीं सकते।चुनाव के बाद या पहले  अदालत में मुकद्दमा चल रहे हैं या चल रहे थे।ऊटी में बी।एड।प्रशिक्षण कालेज बंद।
राज्य सरकार का समर्थन भी नहीं;केंद्र सरकारका भी।प्रचार कार्य हो रहा हैं।लाखों की संख्या में विद्यार्थी पढ़ रहे है।
तमिल कवी सम्राट कणणदासन की एक कविता है:
हिंदी मोर नाचो;धीरे-धीरे ;
एक दिन मातृभूमि अपनाएगी।
लेकिन अब हिंदी क्षेत्र में भी  हिंदी प्रचार की ज़रुरत है।
भारतीय भाषाएं अंग्रेजों के जमानेमें  विकास की दिशा में बढ़ रहीं थी।
आजादिके  67 वर्षके  बाद अंग्रेजी जीविकोपार्ज की भाषा बन गयी।
तब भारतीय भाषाएँ --अब जनता को इस दिशा में भी सावधान रहना है और ध्यान देना है।

Thursday, November 8, 2012

तमिल -हिंदी सीखिए

तमिल -हिंदी  सीखिए 
  
अंगु  वरुबवन  एन्नुडैय  नन्बन .===जो वहाँ आता है,वह मेरा दोस्त है।=அங்கு  வருபவன் என்னுடைய  நண்பன்.
उण मै   पेसुबवनिन   उल्लम  अमैति याक इरुक्कुम==जो सच बोलता है,उसका दिल शांत रहेगा। 
गंगै   आरू ओडुम  नाडू एन्नु डै य   भारत नाडू।==जिस देश में गंगा बहती है,वह मेरा भारत नाडू।
नान पादुम पाडल   तेयवीकमानतु ।==जो गाना मैं गाता हूं ,वह दैविक है।

Wednesday, November 7, 2012

तमिल-हिन्दी सीखो। "अपना " का प्रयोग

तमिल-हिन्दी   सीखो।

"अपना "   का  प्रयोग

राम  अवन  मनैवियै नेसिककिरान ==राम उसकी  पत्नी से प्रेम  करता  है।(अन्य  पुरुष )

हिन्दी   के समान  ही  अवन -उसकी   अन्य पुरुष

तन्नुडैय =अपना

राम  अपनी पत्नी  से प्यार करता  है।= रामन   तन्नुडैय   मनैवियै नेसिक्किरान।

अवन  तन्नुडैय  कारै   ताने  ओट्टूकिरान ===वह अपनी गाडी खुद चलाता है।  खुद =ताने।

वह अपने निजी  घर में   रह्ता है।==अवन तन  सोंद  वीटटिल   वसिक्किरान। .   (निजी=सोंद )

नान  एन्नुडैय  वीटटिरक्कुप  पोकिरें।==मैं   अपने घर जाता  हूँ .

(तमिल  में अन्य पुरुष में ही तन ,तन्नुडैय  का   प्रयोग होता  है।)

नी उन्नुडैय  =तुम अपना

नान  एन्नुडैय  =मैं   अपना

नांगल  एन्गलुडैय  ==हम हमारा





Monday, November 5, 2012

तमिल-हिन्दी सीखो करण कारक =से=आल


तमिल-हिन्दी  सीखो 
करण  कारक =से=आल  

मनितन   कणकलाल पार्क्किरान।==मनुष्य आँखों से देखता है।

मनितन  कातुकलाल  केटकिरान =मनुष्य  कानों से  सुनता है।

मनितन  मूक्काल  सुवासिक्किरान= मनुष्य नाक से सूंघता है।

मानितन  नाक्काल  रुसी पार्क्किरान=मनुष्य जीभ से स्वाद लेता है।

मनितन पर्क्कलाल कटिक्किरान।==-मनुष्य दांतों से काटता है।

कण= आँख 
कातु =कान 

मूक्कू =नाक 

नाक्कु =जीभ 
पल=दाँत 

आल =से =(करण  कारक)

कण +आल=कणणाल  = आँख से 

कणकल =आँखें =आँखों से 
मूक्कु  +आल =मूक्काल =नाक से 

नाक्कू +आल =नाक्काल ==जीभ से 

पल +आल=पल्लाल =दाँत से 

पर्कल =दाँत 
पर्कलाल =दांतों से 











Saturday, November 3, 2012

तमिल -हिंदी सीखो था;थे;थी;थीं।

तमिल -हिंदी सीखो ---था;थे;थी;थीं।

अपूर्ण -भूत =  तोडर इरंद कालम 

रामन  पाडिक्कोंडिरुन्तान = राम  गा रहा था।=राम =रामन (तमिल में )

सीतै   तुणी   तुवैत्तुक कोंडिरुन्तान .==सीता कपडा सी रही थी।

पैयन  पडित्तुक  कोंडिरुन्तान .= लड़का पढ़ रहा था।

था=इरुन्तान  
थी= इरुन्ताल 
थे और थीं = इरुन्तार ;इरुन्तोम ;इरुन्तार्कल; इरुन्तनर; इरुन्तन;

पिताजी थे= अप्पा इरुन्तार;
माताजी थे=अम्मा इरुन्तार।
लड़के थे--पैयन्कल  इरुन्तनर ./इरुन्तार्कल।
कुत्ते थे--नायकल  इरुन्तन।

तमिल में उत्तम पुरुष आदर सूचक शब्द  की क्रिया   इरुन्तोम।
हम दिल्ली में थे।==नांगल दिल्लियिल इरुन्तोम।
आप=आदर सूचक केलिए == इरुन्तीर /इरुन्तीर्कल।
आप  हमारे साथ थे ==नींगल एन्गलुडन  इरुन्तीर्कल।

वे थे =अवर इरुन्तार;एक वचन 
वे थे=अवर्कल इरुन्तार्कल (बहुवचन)

गांधीजी थे=गाँधी    इरुन्तार।

गांधीजी और तिलकजी थे।-गान्दिजीयुम  तिलकरुम इरुन्तनर।।