Friday, March 28, 2025

नीति नेऱि विलक्कम् नैतिक मार्ग व्याख्या -कवि कुमरगुरुपरर्

 कुमरगुरुपरर् 17वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि थे। उनका दिव्य स्मारक काशी में है।
शिक्षा के महत्व पर निम्न उनका  दूसरा पद  है



தொடங்குங்கால் துன்பமாய் இன்பம் பயக்கும் ==तोडंगुंकाल्  तुन्बमाय इन्बम  पयक्कुम 

மடம்கொன்று அறிவு அகற்றும் கல்வி நெடுங்காலம் =मडम् कोन्ऱु अऱिवु अकट्रुम्  कल्वि नेडुंकालम् 

முன் பயக்கும் சில நீர இன்பத்தின் முற்றிழாய் = मुन पयक्कुम्  सिल नीर इन्बत्तिन मुट्रिलाय्

பின் பயக்கும் பீழை பெரிது.  पिन पयक्कुम्  पीष़ै पेरितु.

कुमरगुरुपरर्   नारी को संबोधित करके कहते हैं कि

 शिक्षा अध्य्यन के श्रीगणेश करते समय दुख होगा।

अध्ययन के बाद शाश्वत सुख होगा। मूर्खता को शिक्षा मार डालेगी। काम और लौकिक इच्छा के सुख शुरुआत में अति आनंद- सा लगेगा।बाद में निरंतर दुख देगा ही। दुख से छूट कभी नहीं होगा।

 लौकिक काम सुख अस्थाई है, सुख सा लगकर दुख देगा।

शिक्षा विद्या से प्राप्त सुख स्थाई होती है। शिक्षा आरंभ में दुख सा लगेगा, बाद में निरंतर सुख देता रहेगा।











Thursday, March 27, 2025

नीतिनेरि विलक्कम्

 தமிழ் ஹிந்தி பணி.तमिऴ् हिंदी सेवा।


நீதிநெறி விளக்கம். नैतिक मार्ग व्याख्या।


குமரகுருபரர் =कुमरगुरुपरर्  --कवि 


அறம் =धर्म 


பொருள்=अर्थ  


 இன்பமும் =सुख


வீடும் ==मोक्ष


பயக்கும்புறங்கடை நல்லிசையும் நாட்டும் - உறும்கவலொன்றுஉற்றுழியும் கைகொடுக்கும் கல்வியின் ஊங்கில்லைசிற்றுயிர்க்கு உற்ற துணை. ---तमिऴ् मूल।


 கல்விதான் =कल्वितान् ==शिक्षा ही

 மனிதனுக்கு  मनितनुक्कु=मनुष्य को 

 உற்ற துணையாகும்=युक्त सहायक है।


 

கல்வி நமக்கு  =कल्वि नमक्कु  =शिक्षा हमको

அறவழிகளான  =अऱवऴिकळान  இறையன்பு, ==ईश्वर प्रेम

இறைப்பற்று  इरैप्पट्रु  =ईश्वर भक्ति 

நல்லொழுக்கம்,  नल्ओऴुक्कम् --अनुशासन्

பணிவு , =पणिवु =विनम्रता

மன அமைதி मन अमैति =मानसिक शांति 

 ஆத்ம ஞானம், ==आत्मज्ञानम् =आत्मज्ञान 

 தேசப் பற்று,  =देशप्पट्रु --देशभक्ति

மனிதநேயம், _मनितनेयम् =मनुष्यता 

 சுயநலமின்மை, =सुयनलमिन्मै --निस्वार्थता

தியாகம்,=त्यागयम् ==त्याग 


 தானம் =दानम् =दान


 பரோபகாரம் =परोपकारम् =परोपकार 


ஆகிய  -आकिय =आदि

 உயர் பண்புகளைத்  =ऊँचे गुण


தரும்.  तरुण =देंगी।


 அதன் விளைவாக=अतन् विळैवाक==

  उसके परिणाम स्वरूप 

நாட்டிலும் --नाट्टिलुम् --देश में 

 அயல் நாட்டிலும்   =अयलनाट्टिलुम्‌ =विदेश में भी 

செல்லும் இடங்களில் எல்லாம்


चेल्लुम्  इडंगलिल् एल्लाम् =जहाँ जाते हैं सब जगह 

 சிறப்பைத் தரும். ==चिरप्पेत् तरुम् =विशेषता देगी।

கவலைகளைப் போக்கும்.

कवलैकलैप्पोक्कुम्। --चिंताएँ दूर करेंगी।

உற்ற துணையாக  उप्र तुणैयाक 

योग्य साथी के रूप में 


இறுதிவரை இருக்கும்.  इरुतिवरै इरुक्कुम्।

अंत तक रहेगा।


 கை கொடுக்கும் தெய்வமாக இருக்கும்.

 कै कोडुक्कुम् देय्वमाक 

हाथ देनेवाले ईश्वर के रूप में  रहेगा।

 मानव का सच्चा साथी शिक्षा ही है।

 एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा अनूदित  भावार्थ। व्याख्या।

Thursday, March 20, 2025

हिंदी अंग्रेजी

 

ब्लॉग देखकर योग्य हो तो सम्मान करनेवालों की संस्थान हो तो  अच्छा होगा।

 पचास हजार, एक लाख खर्च करके प्रकाशन वह जमाना आज नहीं, 

 पर सम्मान पैसे लेकर देने के साहित्य अकादमी ज़्यादा है। करोड़ों रूपयों के चुनाव के लिए खर्च करनेवाले   सांसद विधायक को भारतीय भाषा की प्रगति में ध्यान नहीं। वे अंग्रेज़ी माध्यम की प्रधानता दे रहे हैं  सीबीएससी मेट्रिकुलेशन चलाकर L.K.G to U.G P.G. तक।

 हिंदी तमिल  CBSE में ३०% अंक काफी है।

 फिर उच्च शिक्षा केवल अंग्रेज़ी।

 भारतीय भाषाओं के खर्च केवल दिखावे के लिए।

 लाखों जवानों की नौकरी का आधार अंग्रेज़ी, न भारतीय भाषाएँ।


Tuesday, March 18, 2025

स्वर्ग नरक सुख

 नमस्ते वणक्कम्।


 जवानी भूलें, =வாலிபத் தவறுகள் 


 जवानी की स्वार्थता ==வாலிப சுயநலம் 


बुढ़ापे में स्वर्ग नरक की वेदनाएं। =முதுமையில் ஸ்வர்க நரக வேதனைகள்


शुभ परिणाम  சுப விளைவுகள் 


अशुभ परिणाम  =அரசுப் விளைவுகள் 


 रोग नीरोग काया =நோய் நோயற்ற உடல்


 हमारे ऋषियों मुनियों =நமது ரிஷிகள் முனிவர்கள் 



भक्त आध्यात्मिक चिंतनके लोग  ==பக்தர்கள் ஆன்மீக சிந்தனைகள் உள்ளவர்கள் 

संसार को  ==உலகத்திற்கு 


सुखांत जीवन =சுகமான முடிவுற்ற வாழ்க்கை 


जीने मार्ग दिखाते हैं। வாழ வழிகாட்டுகின்றனர்.



पर उनका जीवन =ஆனால் அவர்கள் வாழ்க்கை


 आर्थिक समृद्धि की ओर नहीं था।

செல்வச் செழிப்புள்ளதாக இல்லை.


 जग कल्याण के लिए =°உலக நலனுக்காக 

 दिगंबर जीवन, --நிர்வாண வாழ்க்கை 


कौपीन पहनकर जीवन, =கோவணம் அணிந்த வாழ்க்கை 


 जड़ मूल फल खाकर  =வேர் கிழங்கு பழங்கள் சாப்பிட்டு

 भूखा प्यासा जीवन

பசி தாகமான வாழ்க்கை.

 अनशन,मौन जीवन =உண்ணாவிரதம் மௌனமான வாழ்க்கை.


 ऐसे महानों के नाम = இப்படிப்பட்ட மஹான்களின் பெயர்களை


 आज भी लेते हैं। இன்றும் சொல்கிறோம்.


 महावीर, बुद्ध का नाम लेते हैं  =மாவீரர் புத்தர் பெயரைக் கூறுகிறோம்.

 यह याद रखना  இதை நினைவில் வைத்துக் கொள்ளுங்கள்.

 राजवंश जो अपने अहंकार वश =அரச குலங்கள் தன் ஆணவத்தால்


 अपनी शक्ति दिखाने  =தன் வலிமையைக் காட்ட

 अपने प्रेम निभाने = தன் காதலைக் கடைபிடிக்க 


 हज़ारों वीरों को ஆயிரக்கணக்கான  வீரர்களை 

 वीर पत्नियों  को =

 வீர மனைவிகளை


उनकी संतानों को  =அவர்களின் குழந்தைகளை

अनाथ बनाये ==அனாதை ஆக்கினார்கள்.


उन राजाओं के   वंश =அந்த அரச குலங்கள்


 आज पता नहीं। இன்று தெரிவதில்லை.


 केवल इतिहास के छात्र  =வரலாற்று மாணவர்கள் 

विवश होकर पढ़ते हैं। =வேறு வழியின்றி படிக்கின்றனர்.



 पर भक्त कवि संत ऋषियों के नाम =ஆனால் பக்தி கவிஞர்கள், சாதுக்கள் ரிஷிகளின் நாமங்கள் 


 आध्यात्मिक मार्ग का पालन =ஆன்மீகம் வழியை கடைப்பிடிக்க 

 आज भी लोग लेते हैं। =இன்றும் மக்கள் கூறுகிறார்கள்.

 यही सूक्ष्म  भगवान की लीला है, இதுதான் நுண்ணிய இறைவனின் லீலை.


 जिनके कारण संसार स्थिर है, அதன் காரணமாக உலகம் நிலைத் திருக்கிறது.

 न्याय है ! நியாயம் இருக்கிறது.


ईमानदारी है, =நாணயம் இருக்கிறது.


 वही धर्म है, அதுதான் அறம்.


 मजहब मत मतांतर संप्रदाय नहीं है।=மதங்கள் சம்ரதாயங்கள் வேறுபாடுகள் கிடையாது.


 प्राकृतिक प्रकोप सिखाता है कि

  मजहब मत मतांतर संप्रदाय नश्वर है।

இயற்கைச் சீற்றங்கள் ம்தம் மத வேறுபாடுகள் சம்பிரதாயங்கள் அழியக்கூடியவை.

 धर्म ही शाश्वत है। =அறம் தான் நிலையானது‌

 धर्मो रक्षति रक्षित रक्षणः।=

அறத்தை அழிப்பவனை அறம் அழிக்கும். அறம் காப்பவனை அறம் காக்கும்.


 அனைவரையும் ஆட்டிப் படைப்பது 

ஆண்டவனே.

 सबहीं नचावत राम गोसाईं।

पऴनी एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

 शिवदास।

Monday, March 17, 2025

कबीर

 शूनै पड्या  न  छूटियो,सुनी रे जीव अबूझ!


कबीर मरि मैदान मैं ,करि इन्द्रियाँ सूं झूझ . 

    


      हे नर! तू तो अज्ञानी !शून्य प्रदेश में एकांत में  छिपकर माया मोह से बच नहीं  सकता.


इन्द्रियों से जीतने  सांसारिक मैदान में खड़े होकर लड़;इन्द्रिय्वासनाओं को जीतने की शक्ति 


वैराग्य से नहीं ,उनको भोगते नष्ट करने में है.आसक्ति में अनासक्त  रहकर चल बसने में ही काम्य  है.


    

 மனிதனே!   நீ ஞானமற்றவன் ! சூன்யமான இடத்தில் தனிமையில் ஒழிந்து


மாயை -மோஹத்தில்   இருந்து தப்பிக்க முடியாது. ஐம்புலனை வெல்ல உலகின் மைதானத்தில்  நின்று போரிடு . ஐம்புலனை வெல்லும் சக்தி வைராக்யத்தில்  கிடையாது.அதை அனுபவித்து அழிக்க  வேண்டும்.பற்றில் பற்றற்று மரணத்தில் பலன் உள்ளது.

Tuesday, February 18, 2025

तिरुमूलर। तिरु मंत्र

 


नमस्ते वणक्कम्।

  भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक दृष्टांत के साथ  ईश्वर के महात्म्य  और आध्यात्मिक  अमूल्यता   का महत्व है।

 संत तिरुमूलर  के तिरु मंत्र  ऐसे ही एक महान ग्रंथ हैं।


सूर्य कांत रूई  के  ढेर को  चंद मिनट में जैसे जलाते हैं और धूप के प्रभाव से राख हो जाता है,वैसे ही भगवान झट तीन मलों को जलाकर राख कर देते हैं।

संत तिरुमूल  ने वैज्ञानिक ढंग से  अद्भुत उदाहरण दिया है। आध्यात्मिक प्रयत्न अज्ञानता, 

माया,( प्रारब्ध कर्म ,संचित कर्म,  काम्या कर्म   तीनों को खत्म कहते हैं)कण्म ज्ञान आध्यात्मिक चिंतन से ईश्वरीय करुण को सूर्य के रूप में अन्य तीन मूल को रूई  की तुलना के रुपक देते हैं।

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Monday, February 17, 2025

जीवन के दिन चार

  नमस्ते वणक्कम्।

जीवन के दिन है चार।

 अवस्थाएँ हैं 

 अति सूक्ष्म बिंदुएँ,

  अंधकार में मिलकर,

 तम में पलकर

 गर्भावस्था में  दस महीने।

 गर्भ से बाहर आकर

 शैशवास्था में 

 रोकर हँसकर पलना।

 आश्रित जीवन से शुरू।

 शैशवास्था में से बचपन,

 बचपन से लडकपन,

 जवानी, प्रौढ़ावस्था बुढापा।

  छे अवस्थाएँ 120साल 

 अधिकतम मानव जीवन।

 एक एक अवस्था बीतते बीतते

 आश्रित मानव जीवन निराश्रित सा

 पचास साल, फिर बुढ़ापे में आश्रित।

 माँ का प्यार धीरे धीरे   

 पिता का दुलार धीरे  धीरे।

 पति पत्नी का प्यार अंत तक।

 संतानों का पालन,

 जिम्मेदारी बुढापा।

 बहु दामाद का

 बेटे बेटियों का प्यार

 बुढ़ापे में मिलना भाग्य की बात।

कर्मफल, विधि की विडंबना।।

 सनातन धर्म में 

 आसक्ति की अवस्थाएँ  दो


 शारीरिक शक्ति तक।

प्रौढावस्था में अनासक्ति का श्रीगणेश।

वृद्धावस्था में परिपक्व मन,

 माया मोह तजकर,

 संन्यासी जीवन।

 केवल मोक्ष की चिंता,

ईश्वर का  आत्मचिंतन।

काशी में मरणावस्था में 

 कुछ लोग जलने तैयार।

 न रिश्तों की बातें।

 केवल ईश्वर ध्यान।

 ये 120की पूर्ण जीवन 

 संतोष असंतोष 

 शांति शांति 

 हास्यमय अश्रुमय जीवन।

 यही  मानव जीवन।

सुख दुख की आँख मिचौनी।

  दिन और रात समान।

उजियारे और अंधकार भरा।

 यथार्थता यही, चार दिन की चाँदनी।

 अपना अपना भाग्य।

 सबहीं नचावत राम गोसाईं।।

 

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई द्वारा स्वरचित 

 भावाभिव्यक्ति यथार्थ चित्रण।

[18/02, 3:55 am] Meta AI: आपकी यह रचना मानव जीवन की वास्तविकता को बहुत ही सुंदर और यथार्थ तरीके से चित्रित करती है। आपने मानव जीवन की विभिन्न अवस्थाओं, जैसे कि गर्भावस्था, शैशवास्था, बचपन, जवानी, प्रौढ़ावस्था, और बुढ़ापे का वर्णन किया है।


आपकी रचना में कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं:


- मानव जीवन की विभिन्न अवस्थाएं और उनकी विशेषताएं।

- मानव जीवन में सुख और दुख की अनिवार्यता।

- मानव जीवन में रिश्तों और प्रेम की महत्ता।

- मानव जीवन में आत्म-चिंतन और ईश्वर की ओर बढ़ने की आवश्यकता।

- मानव जीवन की नश्वरता और मृत्यु की अनिवार्यता।


आपकी रचना में सनातन धर्म के सिद्धांतों का भी वर्णन है, जैसे कि आसक्ति और अनासक्ति की अवस्थाएं, और मोक्ष की चिंता।


आपकी यह रचना हमें मानव जीवन की वास्तविकता को समझने और जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में सुख और दुख को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती है।