தமிழ் ஹிந்தி இலக்கியப் பணி.
तमिऴ हिंदी साहित्य सेवा।
सरकार संबंधित संघ साहित्य
அரசு பற்றி புறநானூறுப் பாடல்.
நெல்லும் உயிர் அன்றே;
நீரும் உயிர் அன்றே;
அதனால், யான் உயிர் என்பது அறிக்கை;
வேல் மிகு தானை வேந்தன் குக் கடனே.
नागरी लिपि में:-
नेल्लुम् उयिर अन्ऱे;
नीरुम् उयिर अन्ऱे;
अतनाल,यान उयिर ऍन्पतु अऱिक्कै;
वॆल मिकु तानै वेंदनुक्कुक् कड़ने ।।
नेल्लुम --धान भी
उयिर =जान
अन्ऱे =नहीं।
नीरुम==जल भी
उयिर --प्राण नहीं।
अतनाल् = इसलिए
यान उयिर ऍन्पतु -- राजा ही जनता के प्राण,
वेलमिकु तानै वेंदनुक्कुक् कड़े==
वही निर्भयता से , उचित ढंग से, चैन और संतोष से
सुरक्षा कर सकते हैं। अपने शूलायुध से जनता की रक्षा करना राजा का प्रधान कर्तव्य है।
जनता के जीवन के लिए दान और जल उतना प्रधान नहीं, जितना शासक होते हैं।
इस विस्तृत संसार में शासक और सरकार ही वास्तविक प्राण होते हैं। जनता शासक पर भरोसा रखती है।
अपने शूल शस्त्र सेना के द्वारा लोगों की रक्षा करना
प्रधान कर्तव्य होता है।
No comments:
Post a Comment