नमस्ते वणक्कम्।
आज की चुनौती
ख़ामोश चेहरे
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
9-9-26
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ख़ामोश चेहरे
आत्मज्ञानियों में,
आदर्श भक्तों में,
युगावतार पुरुषों में।
ख़ामोश रहकर,
चुपचाप रहने से
चिंतन-शक्ति बढ़ती है,
मानसिक शांति मिलती है,
नए-नए विचार जन्म लेते हैं
सामाजिक कल्याण के लिए।
शांत चेहरा,
शांत मुद्रा—
दूसरों को प्रभावित करने के लिए,
दूसरों का प्रेम पाने के लिए।
शांत चेहरे पर
एक मधुर मुस्कान,
मन में बड़ी-बड़ी योजनाएँ,
और जीवन में
मौन तपस्या।
मौन तपस्या में लगे
गौतम बुद्ध के धर्म ने
विश्व में अनेकों लोगों को
लोककल्याण के मार्ग पर लगाया।
मौन तपस्या में
रत्नाकर डाकू
महर्षि वाल्मीकि बने।
पत्नी-प्रेम में आसक्त
तुलसीदास
महान कवि बने।
मौन के राग में
मनुष्य स्वयं से जुड़ता है,
और इसी मौन के माध्यम से
विश्वबंधुत्व का भाव जागता है।
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