अध्यापक दिवस — भावाभिव्यक्ति रचना
आज की चुनौती
अध्यापक दिवस
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक एवं स्नातकोत्तर हिंदी अध्यापक
5-9-26
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स्वर्गीय राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी
के जन्मदिवस को
हम अध्यापक दिवस के रूप में
मनाते हैं।
उनके जीवन का प्रारंभिक काल
महाविद्यालय में
प्राध्यापक के रूप में बीता।
वे एक नामी और
आदर्श प्राध्यापक रहे।
अध्यापक की सेवा है—
छात्रों को ज्ञान देना,
उनके अज्ञान के अंधकार को मिटाना,
भावी देश के
सुनागरिक बनाना,
अच्छे आचरण की शिक्षा देना
और उच्च महत्वाकांक्षाओं के लिए
प्रेरित करना।
ऐसे अध्यापक
सीढ़ी के समान होते हैं,
जो अपने विद्यार्थियों को
एक-एक पायदान चढ़ाते हुए
जीवन के शिखर तक
पहुँचाने का आदर्श कार्य करते हैं।
उनका सम्मान करने,
उनके प्रति अपना आभार
प्रकट करने का
शुभ दिन,
शुभ अवसर है—
अध्यापक दिवस।
संत तिरुवल्लुवर ने कहा है—
जिस प्रकार निर्धन व्यक्ति
धनी के सामने
सिर झुकाकर विनय करता है,
उसी प्रकार
धनी और अज्ञानी व्यक्ति भी
शिक्षित गुरु के सामने
विनयशील होकर झुकते हैं।
अध्यापक ही
इस जगत का ज्ञान देने वाले,
जीवन जीने की कला सिखाने वाले
और समाज में
अभिवादन एवं व्यवहार की
प्रणालियाँ सिखाने वाले होते हैं।
कबीरदास जी के अनुसार
गुरु भगवान से भी बड़े हैं।
“शिक्षक पारस मानिये,
खुद को लोहा मान।
उसको छूते ही बनें,
सारे कनक समान॥”
अर्थात् सच्चा शिक्षक
पारस पत्थर के समान होता है।
उसके ज्ञान और संस्कार का स्पर्श
साधारण विद्यार्थी को भी
अनमोल बना देता है।
“कुमति कीच चेला भरा,
गुरु ज्ञान-जल होय।
जनम-जनम का मोरचा,
पल में डारे धोय॥”
गुरु के ज्ञानरूपी जल से
शिष्य के मन की
कुमति और अज्ञान का मैल
दूर हो जाता है।
शिक्षक और शिक्षा के बिना
इस जगत की प्रगति
असंभव है।
अतः भारत में
5 सितंबर को
अध्यापक दिवस मनाया जाता है।
इस अवसर पर
केंद्र और राज्य सरकारें
उत्कृष्ट अध्यापकों को
सम्मानित करती हैं।
विश्व शिक्षक दिवस
5 अक्टूबर को मनाया जाता है।
गुरु ज्ञान का दीप जलाएँ,
अज्ञान का अंधकार मिटाएँ,
विद्यार्थियों का भविष्य सँवारें।
जय गुरु!
गुरु महान!
राधाकृष्णन जी की भूमिका स्पष्ट करें
तिरुवल्लुवर कथन सरल बनाकर लिखें
दोहराई पंक्ति एक बार रखें
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