Tuesday, July 29, 2014

भक्ति श्रद्धा,


भक्ति श्रद्धा,व्रत के साथ स्नान वगैरह करके देव-दर्शन के बाद खाना 

एक ज़माना; वह तो चला गया'

यातायात की तरक्की ,भोजनालय के स्वादिष्ट भोजन ,

ट्रेवल एजेंसी के भोजन वर्णन आदि 

पहले भोजन ,फिर दर्शन की चाह बढ़ने लगी है.

फिर वाणिज्य की समस्या; भक्ति कई परिवारों को खाना खिला रही है;

जो भक्त आते हैं ,दुगुना ,तिगुना मूल्य बताकर

लूटना तो साधारण बात बन गयी हैं;

मंदिर के गोपुर ,जो मेरे बचपन में दूर से दीख पड़ते थे ,

अब उन्हें गगन चुम्बी इमारतें छिपा रही हैं;

सुन्दर शिल्प-कला के मंडपों को दुकानें छिपाकर सुन्दर दुकानें बन रही हैं.

भक्तों के ईश्वर नाम की गूंजें

अब आइये मिठाई खाइए ,कपडे लीजिये .मालाएं लीजिये

और ऐसी आवाजें ईश्वर के भजन की मधुर ध्वनियों को

मंद कर रही है;

भक्ति का बाज़ार-खुला सा लगता है.

कब क्या होगा पता नहीं ,भक्तों की भीड़ एक ओर ,

भक्तों की भक्ति की कमी दूसरी ओर.

आगे भक्ति रस ,वाणिज्य रस की रूचि के आगे 

Thursday, June 12, 2014

महाभारत में अंतर्जातीय विवाह

भारत देश अति प्राचीन ;
ज्ञान का क्षेत्र;

विविधता में विचारों की एकता का केंद्र ;
सहिष्णुता का प्रधान अंग ; धार्मिक सहिष्णुता में विलक्षण ;
भारत है महान.
महाभारत  में  ईर्ष्या,प्रतिशोध ,अधर्म प्रधान ;
फिर भी धर्म का मार्ग दर्शक;
निष्काम कर्तव्य मार्ग ;
निष्काम- भक्ति मार्ग ;
निष्काम समाज -सुधार;
भृगु पुत्र का विवाह :--
भृगु मुनि एक ब्राह्मण थे; उनका पुत्र सौनिक .
उसकी शादी हुयी क्षत्रिय राजा ययाति की कन्या  सुकन्नी के साथ.
यह विवाह है  प्रतिलोम.
सलारकर -सलार्करै  का विवाह :--
मुनि सलारकर ने  नागलोक की कन्या  सलार्कारै से शादी की ;
यह नागलोक और भूलोक के अंतरजातीय विवाह;
यह अनुलोम विवाह;
ययाति और देवयानी का विवाह:
ययाति क्षत्रिय और देवयानी शुक्राचार्य ब्राह्मण की बेटी 
शुक्राचार्य की अनुमति से यह ब्याह हुआ.--प्रतिलोम विवाह;
शांतनु महाजा और सत्यवती (परिमाल्गंधी )का विवाह 
वशु  क्षत्रिय और उनकी पत्नी देव-कन्य थी;
देव-कन्या किसी शाप से मच्छ कन्या के रूप में पैदा हुयी ;
उस कन्या के पालित पिता ने वर पाया कि
उनकी बेटी राजकुमारी  होनी चाहिए.
इसी कारण शांतनु और देवयानी की शादी हुयी.
ऐसे ही पांडू -प्रथै; कृष्ण -रुकमनी ,कृष्ण -जाम्पवती की शादी हुयी;
जाम्पावती  शिकारी  जाती की थी;
ऋषय श्रुंग -शांता की शादी ;
अर्जुन -द्रौपती,/इदुम्बी/उलूपी /सुभद्रा /
अंतरजातीय शादियाँ किसी प्रकार के विरोध के बिना महाभारत में हुयी हैं.
अतः अंतरजातीय विवाह नया नहीं हैं.
केवल कलियुग की बात नहीं हैं ; भारतीय परंपरा में  हुआ है;
इतिहास में आजकल की सोनिया तक की कहानी हैं;
इसको कलियुग का बलि मानना गलत है 

Wednesday, May 21, 2014

saalon se saavdhan


नाते -रिश्ते  काम के या नाकाम के ,
 मेरे अनुभव में साले सब  लुटेरे
रामायण के शकुनि ,
रामायण के मंथरा,
न जाने अपनी पहन के परिवार
या वर पक्ष के अहित चाहनेवाले;
निर्दयी साले  बहनोई मरें तो
बहन की संपत्ति लूटने तैयार;
मरणसन्न शल्य चकित्सा में भी
न आनेवाले बहन के बेटे से लाखो लेने तैयार
बहनोई जिन्दा है  तो दुखी होने वाले
मृत्यु के इंतज़ार में प्रार्थना करनेवाले
ऐसे सालों और सालियों से सावधान. 

Wednesday, May 7, 2014

मधुर चालीसा

एक जीव की हत्या न करना मधुर है.
योग्य को कुरीती से पुरस्कार न देना मधुर है.
न्यायप्रिय नृप बनना मधुर है.
किसी से अच्छाई  को छोड़कर बुराई न कहना मधुर है.
६.
जितना हो सके उतना धर्म कर्म करना अच्छा है.
सद्विचारों के लाभप्रद वचन मधुर हैं.
अशिक्षित -नीच लोगों के संग में न रहना मधुर है.

Tuesday, May 6, 2014

sukhchaaleesa

सुख चालीसा

त्रिनेत्र शिव की प्रार्थना सुख प्रद;
तुलसी माला पहने विष्णु की प्रार्थना सुख प्रद
ब्रह्मा की स्तुति करना सुख प्रद. 
भिक्षा लेकर भी विद्या-अध्ययन करना सुख प्रद.
शिक्षाविदों से मिलकर संभाषण करना सुख प्रद.
अति सुन्दर मोती -सी अर्द्धांगिनी की बात मानकर जीना सुख प्रद.
बड़े सज़्ज़नों के अधीन जीना सुख-प्रद.
संपन्न व्यक्ति का दान सुख प्रद.
सम विचारों की पत्नी से जीना सुखप्रद.
अशाश्वत जीवन की श्रेष्ठता मानकर सन्यास ग्रहण करना सुख प्रद.

INIYAVAI NARPATHU


pathinen keel kanakku is a ancient tamil literature which has eighteen books written by different poets.
iniyavai naarpathu written by boothanchendanar.
in this sweet forty there are forty poems which are sweet happy for a person.

1.TO PRAY GOD SHIVA WHO IS HAVING THREE EYS IS SWEET.
   TO PRAY VISHNU WHO WEARS TULASI LEAVES GARDEN IS SWEET .
   TO PRAY BRAHMA WHO HAS FOUR HEAD IS SWEET.
2.THE DONATION GIVEN BY A RICHEST PERSON IS SWEET.
 TO LIVE WITH A EQUAL THOUGHTS WIFE IS SWEET.
IT IS GOOD TO BECOME SAINT TO KNOWING THAT THIS WORLD'S LIFE IS MORTAL.

3.IT IS SWEET TO HAVE  OBEDIENT CHILDREN.
THAT EDUCATION IS SWEET WHICH MAKES A MAN NEVER FAULTLESS.
   A FORMER'S LIFE IS SWEET  WHO IS HAVING BULLS TO PLOUGH FIELD 
WHEREEVER WE GO THERE HAVING A GOOD FRIEND IS SWEET.

4. A king who is having an army of elephant it is sweet for him.

 NOT TO GROW  TAKING  OTHERS FOOD IS SWEET.
A COLONY SITUATED NEAR A GREEN FOREST ON A RIVER BANK IS SWEET.
WHEN A PERSON PRAISED BY A  GREAT PERSONS IS A SWEET PERSON.

Sunday, May 4, 2014

चार रत्नों की कड़ी.-chain of four gems -நான்மணிக்கடிகை 24

भविष्य में होनेवाली घटनाएँ ,न जाननेवाली स्त्रियाँ रोग जैसी है;
प्यार भरे सज्जन जग के आभूषण जैसे हैं.
अल्प बुद्धिवाले उगते पौधे को नष्ट करनेवाले घास जैसे हैं.
निर्दयी लोग पाषाण दिलवाले हैं.

the women who dose not know the future incidents she is like a disease.
lovely gentlemen are  like a ornamant in the world.
a little knowledge persons are like a grass which spoils the growing crops.
a merciless person's heart is like a stone.

பிணியன்னர்  பின்நோக்காப் பெண்டிருலகிற்
கனியன்ன ரன்புடைமாக்கள்--பிணிபயிரின்
புல்லன்னர் புல்லறிவி நாடவர்--கல்லன்னர்
வல்லென்ற நெஞ்சத் தவர்.

25.धार्मिक लोगों से बढ़कर ऊंचे कुल में जन्मे लोग और कोई नहीं है;
माँ से बढ़कर ऊँचे नाते -रिश्ते और कोई नहीं है;
संपत्ति-समृद्धि से  बढ़कर शोभनीय वस्तु और कोई नहीं है.
शोध कर देखने पर जवानी की तुलना में और कोई पर्व नहीं है.

no one is  in the world's great family  in which   a religious person born.
no one is  not a great relation to us  like a mother.
except wealth nothing is beautiful thing in this world.
youth alone is great when comparing to other ages.