आज का छला ,अभी से फूँक फूँककर चला।
छला जाने से सतर्कता आ जाती है।
प्यार करके ठगने पर , सनक हो जाता है।
सतर्कता आती नहीं। प्यार क्यों होता है दीवाना?
दिल दिल में भिन्न भिननता, पर
घृणितों के प्रति भी दीवाना।
प्यार के हार में हत्या आत्महत्या
प्यार के न मिलने पर अम्ल फेंकना।
यह घृणित व्यवहार क्यों?
यह कौन सी माया? कौन सी शैतानियत ?
आसुरी व्यवहार क्यों ?
युवकों! जागो! जितेंद्र बनो।जीतो संसार।
मोर जैसा नाच मत। मनुष्यता जानो। मनुष्य बनो।
Wednesday, January 20, 2016
आज का छला ,अभी से
Monday, January 18, 2016
वसुदैव कुटुंबकम
विदेशी वस्तुएँ लेना मना है।
पढने में सुनने में लिखने में
आनंद।
व्यवहार में देखें तो
जीविकोपार्जन की भाषा अंग्रेज़ी
पेट्रोल डीजल विदेशी।
पहनावा ओढावा विदेशी।
कार मोटर मोब इल विदेशी
बडी बडी योजनाएँ विदेशी।
मुगल ईसाई धर्म विदेशी
हमारे वेदों के रचयिता अति दूरदर्शी
बताकर चले गये-
वसुदैव कुटुंबकम्।
सर्वे जनाः सुखिनो भवंतु।
आकाश एक। सूरज एक।
चांद एक। सारे संसार है मेरादेश।
Sunday, January 17, 2016
दीवाना
दीवाना हूँ देश का। दिली दोस्तों।
जरा सोचो।
अर्द्ध नग्न अभिनेत्रियों के सम्मान में
देश का कल्याण होगा क्या ?
अभिनेता जो दूसरों के संकेत का मोहक रूप देता है
उससे देश का भला होगा क्या?
अभिनय को ही बल दोगे तो
सत्य का कहाँ ठिकाना।
निराकार में साकार देखना भक्ति है।
साकार में ईशवर साक्षात्कार बाह्याडंबर ,
वायु निराकार बिना उसके जीना असंभव।
जल निर्मल बिना उसके सूख जाता जग।
मिट्टी उर्वरा न हो तो न पनपता वनस्पतियाँ।
आकाश में काले नभ देता पानी।
आग उष्णता न हो क्या बाकी तत्व।
पंच तत्वों का बनता बिगडता जग।
प्रकृति को जानो पहचानो।
कृत्रुम छोडो।सहज सरल सत्य जीवन अपना लो।
स्वस्थ जीवन स्वस्थ आचार स्वस्थ अनुशासन
सोचो जीवन बनेगा कितना आनंद।
Wednesday, January 13, 2016
भारतीय
हम भारतीय अग जग में व्यापित।
हम केवल अपनी सुरक्षा चाहते हैं
हमारे पूर्वज अपने लिए नहीं
राज पद भी त्यागकर वन को बनाया
अपना निवास स्थान।
राजमहल की सुख -सुविधाएँ तज
सानंद कपडे तक निकाल फेंके महावीर ।
सोलह साल की उम्र में घर छोड
तिरुवण्णामलै मैं आजीवन कोपीन मात्र वस्त्र पहन
अचल रह विदेशों को भी अपनी ओर खींचे
रमण महर्षि।
अर्द्ध नग्न फक्री विश्व वंद्य नेता
राष्ट्र पिता महात्मा गाँधीजी।
धन को तुच्छ माननेवाले
विश्वप्रसिद्ध स्वामी विवेकानंद
जंगल में सर्दी में नंगे बदन
यूनानी सिकंदर की संपत्ति को हाथ की मैली सा
ठुकरानेवाले दांडियायन।
त्याग,प्रेम,अनासक्त जीवन
माया से दूर आदर्श भारत और कहीं नहीं।
Tuesday, January 12, 2016
समाज
समाज को देखा।
विकारों को देखा।
प्रेम त्याग सेवा भाव से युक्त
तनमनधन अर्पित करनेवाले
निस्वार्थ लोगों के एक वर्ग का त्यागमय जीवन।
दूसरों को मार पीट लूट शोषित जीनेवालाएक वर्ग।
इन दो वर्गों में पहला वर्ग त्याग को सुख मानता है।
दूसरा वर्ग भोग को ही सुख मानता है।
त्याग में आत्मीयता और आनंद है।
भोग के अंत में दुख ही बचता है।
Thursday, November 26, 2015
बदलाव
अगजग देखो,
जागकर देखो
जहा अच्छा है या बुरा।
ईशवर की रीतिनीति देखो।
इस जग को देखो।
हिरन सा साधु।
साँप सा विषैला।
बडी मछलियाँ
छोटी मछलियाँ
मकडियाँ
छिपकलियाँ
जोंघु
न जाने
विषैली पेड पौधे
आरोग्यप्रद जटिबूटियाँ.
इन सबों को मिलाकर
ईश्वर ने बनाया
अहं ब्रह्मास्मि का
अहंकारी मनुष्य।
दंड मृत्यु दंड तय करके।
मरता है.मारता है।
जो भी भला बुरा करता है
नाटक का मंच
दृश्य बदलता रहता है।
Wednesday, November 25, 2015
पवित्रता
भारत में पवित्र स्थानों में से
पवित्रता भागती जा रही है।
छल करते चल।तभी होगीआय।
दुकानों में निश्चित दाम नहीं
चलतेफिरते व्यापारी छलते फिरते है
त्रिकम्बेश्वर गया नकली रुद्राक्ष
नाना प्रकार के
स्थानीय लोगों को पता है
पुलिस को पता है
ठग का व्यापार फिर भी चुप।
Wednesday, October 21, 2015
जो औरों ने नहीं बतायी;
क्या सोचना है? क्या करना है ?
वही हमारी परेशानी है;
पल पल में बदलता हैं संसार.
किसी की बुद्धि किसी का ज्ञान ,किसी का आविष्कार
उन्हीं को दोहराने से हम जी रहे है.
हमारा अपना नहीं जग को छोड़ने के लिए
हम अपना सोचकर कुछ प्रकट करते हैं
बाद में पता चलता हैं वह औरों की देन है;
किसी की कहानी हमें सुनाने पर लगता है वह उन्हीं का
बाद में पता चलता है वह और किसी महान की है;
सोचते विचारते सब ऐसा ही लगता हैं
पुरानी बातों का नया आवरण;
हमारा अपना क्या है ?
वही हमें सोचना विचारना है पर ऐसी कोई बात नहीं
जो औरों ने नहीं बतायी;
Monday, September 21, 2015
ताज़्ज़ुब उसकी प्रगति ;
ऐसी वैसी भाषा नहीं है?
१९वी सदी में जो सरल हिन्दी ,,
भारतेंदु काल से अति तीव्र गति से विश्व की तीसरी भाषा;
कितने विरोध ;
तमिलनाडु में बसें जली ; रेल जली. कइयों के प्राण चले;
अपने आप पली ; जल सींचे कुछ लोग ;
अनुकूल वर्षा भी हुयी ;
ताज़्ज़ुब उसकी प्रगति ;
पर अंग्रेज़ी मगर मच्छ उसको निगलना ही चाहता है;
फिर भी आग़े हैं हिंदी;
नेहरू की गलती ; अन्नादुराई की अदूरदर्शिता ;
आज जयललिता प्रधान मंत्री बनना चाहती
मुरासोली मारन केंद्र में मंत्री बनना चाहता हैं
उनकी एक मात्र योग्यता
हिंदी विरोधीदलों का बयान
वे सब जानते हैं हिंदी;
राष्ट्र पिता गांधीजी की दूरदर्शिता चमक रही है
हिंदी की हो रही है
Thursday, September 17, 2015
सोचो ; शुभ कार्य में न करो देरी ;
किसानों की अड़चनें दूर करो मोदीजी
काले धनियों के धन छीन
हर भारतीय को बनाओ करोड़पति
अनंतकाल पूजनीय बनोगे मोदीजी ;
आजीवन स्थिरप्रधान मंत्री आप ही मोदीजी।
१३०० करोड़ काले धन में एक करोड़ सिर्फ
एक करोड़ भारतीयों को बाँटो ;
हाथ में न दो;
बनाओ हर बचत हिसाब की स्थाई निधि ;
गरीबी भगा दो ;हर महीने मिले सूद ;
केवल ५% सूद ; पूँजी रहे देश हित के काम ;
जुग जुग जिओ बनो ;
भारत के स्थायी प्रधान मंत्री;
अग जग की प्रशंसनीय प्रधान मंत्री बनो;
दुःख हरो देव ; सोचो ; आगे बढ़ो ;
निधि है भारत में ; नीति चाहिए उचित बँटवारे के लिए;
सोचो ; शुभ कार्य में न करो देरी ;
जन्म दिन की हमारी माँग ;
पूरी करो ;सार्थक बनाओ इस उच्च पद का ;
और इस जन्म पुनीत कर्म का।
Wednesday, September 16, 2015
दोस्त मिले अनेक ;
ज्ञान, उम्र , अनुभव ,न्याय ,ईमानदारी के मार्ग दर्शक ;
बड़े बड़े ; उनके प्रयत्न ;पर दाल न गला ;
ईश्वर की माया ;
एक तो रोग ,
न तो बुढ़ापा
न तो दुर्घटना ;
उनको सदा के लिए संसार से भगा देता;
दोस्त केलिए दोस्त ;
पिता के लिए पुत्र ;
पति के लिए पत्नी ;
पुत्र के लिए माँ -बाप ;
यम के निर्दय करकमल उठाकर ले चलने से
चन्द दिन रहते हैं ;
फिर ईश्वरीय देन कहते दुःख सहने के आदि हो जाते !
अशाश्वत संसार में जीने की आशा से
अन्याय अत्याचार भ्रस्टाचार रिश्वत आदि को
अपनाकर धर्म अर्थ काम मोक्ष में फंसकर
संसार धाम छोड़ देते हैं;
यही दार्शनिक समझाते रहते हैं ,
ढोंगियों के शासक ,सन्यासी उनके अनुचर
सब काल कवलित हो जाते हैं;
संसार योन ही चलता हैं