Monday, August 10, 2015

मेडम क्यूरी --


महान वैज्ञानिक मैडम मैरी क्युरी का प्रेरणादायी जीवन

Posted on  by ----अच्छी खबर.com से 


भारत में एवं विश्व के अनेक देशो में ---भारतत्तिल   मेलुम  उलकिन  अनेक नाडुकलिल 
 अनगिनत महिलाओं ने अपनी उपलब्धियों से---एन्निक्कैयिल अडंगा पेन्गल  तन  कन्दुपिडिप्पाल 
 अपने देश का नाम रौशन किया है।   तंगल  नाट्टिन  पेयरै  ओलिपोरुन्तियताक्की    उल्लनर.

 कुछ महिलाएं अपने कार्य तथा अपनी सोच के कारण --सिल (sila)पेन्कल  तन सेयल  मट्रूम  थान सिंतनैयिन   कारणत्ताल
-हर किसी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। ==ओव्वोरुवरुक्कुम  तूण्डुतलीन  ऊ ट्रू आक  इरुक्किन्रनर.  
--जनहित और राष्ट्र कल्याण के लिए --मक्कल नन्मैक्काकवुम  नाट्टू नलनुक्काकवुम 
अपने प्राणों की भी परवाह न करने वाली मैडम क्युरी==तन उयिरैये पोरुत्पडुत्तात    मेडम क्युरी 
समस्त विश्व के लिए एक आर्दश उदाहरण हैं। ==उलकम मुलुमैक्कुम  आदर्शामाना  उतारणम. 

 लिंग और सिमाओं से परे हर किसी के लिए मैरी क्युरी प्रेरणा स्रोत हैं।==पाल मट्रूम  एल्लैकलैक कडान्तु  तून्दुतल ऊ ट्रू.
Madam Curie Life Essay Biography in Hindi
मैडम क्युरी
मैडम क्युरी एक रशियन महिला थीं।==மேடம் க்யூரி  ஒரு ரஷ்யப்  பெண்.
 उनका जन्म वारसा (पोलैंड) में 7 नवंबर 1867 को हुआ था। =அவர் வார்சாவில் ஏழான் தேதி  நவம்பர் ௧௮௬௭இல்  பிறந்தார்.
माता पिता सुयोग्य अध्यापक थे।-=அப்பா -அம்மா இருவரும்  தகுதியுள்ள  ஆசிரியர்.
 माँ अध्यापिका तथा पिता प्रोफेसर थे।=அம்மா ஆசிரியர் மற்றும் அப்பா பேராசிரியர்.
 माता-पिता की शिक्षाओं का असर मैरी क्युरी पर भी पड़ा।--பெற்றோரின் கல்வி யின்  நல்விளைவு  மேடம் க்யூரி  க்கு   ஏற்பட்டது .
 वे बचपन से ही पढाई लिखाई में तेज थीं।--அவர்  குழந்தைப் பருவத்திலேயே படிப்பதில் எழுதுவதில்  கெட்டிக்காரி .
 माता पिता के प्रोत्साहन तथा पढाई में रुची के कारण==பெற்றோரின் உற்சாகம் மேலும் படிப்பில்   ஆர்வம்  காரணமாக 
 वे सभी प्रारंभिक कक्षाओं में अवल्ल रहीं।==அவர் எல்லா வகுப்பிலும் முதலாவதாக இருந்தார்.
 परंतु बचपन में ही घर की तंग ==ஆனால் குழந்தைப் பருவத்தில்  இருந்தே வீட்டில் துன்பம் 
आर्थिक स्थिति के कारण --பொருளாதார நிலையின் காரணமாக 
उन्हे अपनी बहन के पास ---அவர் தன சகோதரியிடம்  படிப்பதற்காக 
      पढने के लिए पेरिस जाना पड़ा। =  பாரிஸ் செல்ல வேண்டி  வந்தது.

--आर्थिक तंगी का वास्तविक कारण था, पिता का शासन की शोषण नीति के विरुद्ध आवाज उठाना। मैरी के पिता देशभक्त थे उन्हे जनता के प्रति हो रही नाइंसाफी पसंद नही थी। उनकी इस विद्रोहात्मक नीति के कारण उनकी तनख्वाह आधी कर दी गई थी।
पेरिस के स्कूल में पढते हुए मैरी क्युरी ने अपने अखंड अभ्यास के बलपर अनेक छात्रवृत्ति प्राप्त की, जिससे उनकी पढाई के खर्च का बोझ मैरी क्युरी की बहन पर नही पड़ा । अपनी शिक्षा का मार्ग स्वयं ही प्रशस्त करते हुए अपनी प्रतिभा के कारण सभी अध्यापकों की प्रिय शिष्या थीं।
मैरी क्युरी फ्रांस में डॉक्टरेट पूरा करने वाली पहली महिला हैं। उनको पेरिस विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने वाली पहली महिला होने का भी गौरव प्राप्त हुआ। यहीं उनकी मुलाकात पियरे क्यूरी से हुई जो उनके पति बने। इस वैज्ञानिक दंपत्ति ने 1818 में पोलोनियम की महत्त्वपूर्ण खोज की। कुछ ही महीने बाद उन्होंने रेडियम की भी खोज की। जो की चिकित्सा विज्ञान और रोगों के उपचार में एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी खोज साबित हुई। 1903 में मेरी क्यूरी ने पी-एच.डी. पूरी कर ली। इसी वर्ष इस दंपत्ति को रेडियोएक्टिविटी की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। 1911 में उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में रेडियम के शुद्धीकरण (आइसोलेशन ऑफ प्योर रेडियम) के लिए रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भी मिला। विज्ञान की दो शाखाओं में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली मैरी क्युरी पहली महिला वैज्ञानिक हैं।
मैरी क्युरी का सफर इतना आसान नही था। शुरुवात से उन्होने संघर्ष किया था। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु अध्ययन काल में ही कुछ बच्चों को ट्युशन पढाती थीं। वैवाहिक जीवन में भी पति की असमय मृत्यु ने उनकी जिम्मेदारियों को और बढा दिया। दो बेटीयों का भविष्य और पति द्वारा देखे सपनो को सफल बनाना, मैरी क्युरी का उद्देश्य था। शोध कार्य के दौरान एकबार उनका हाँथ बहुत ज्यादा जल गया था। फिर भी मैरी क्युरी का हौसला नही टूटा। उनका कहना था कि,
“There is nothing to fear in life. That’s the only thing you need to understand.”
“जीवन में कुछ भी नहीं जिससे डरा जाए। आपको बस यही समझने की ज़रुरत है।”
मैरी क्युरी की आर्दश शिक्षा का ही परिणाम था कि उनकी दोनों बेटीयों को भी नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ। बड़ी बेटी आइरीन को 1935 में रसायन विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को 1965 में शांति के लिए नोबल पुरस्कार मिला। मैरी क्युरी का एक मात्र ऐसा परिवार है जिसके सभी सदस्यों को नोबल पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
मैरी क्युरी के द्वारा पेरिस में क्यूरी फाउंडेशन का सफल निर्माण किया गया, जहां उनकी बहन ब्रोनिया को निदेशक बनाया गया। अपने पति पियरे क्युरी के सपनो को पुरा करने के उद्देश्य से मैरी क्युरी अमेरीका गई, जहाँ उन्हे बहुत सम्मान प्राप्त हुआ और उन्हे प्रयोगशाला हेतु लगभग एक लाख डॉलर का चंदा मिला एवं वहाँ के प्रेसीडेंट ने उन्हे रेडियम की वह अनमोल धातु, जो संसार में कम और मूल्यवान वस्तु है, अहदनामे के रूप में प्रदान की, जिसके अंर्तगत ये अधिकार दिया गया कि इस सम्पत्ती पर मैडम क्युरी के बाद उनकी संतानो का परंपरागत अधिकार होगा। परंतु त्याग एवं उदारता की प्रतीमूर्ति मैडम क्युरी ने इस अहदनामें की शर्त में परिवर्तन करा के इसे फ्रांस की प्रयोगशाला में जमा करा दिया। शर्त में ये लिखवा दिया कि इसका उपयोग सार्वजनिक लाभ के लिए संसार भर में किया जायेगा। उनका कहना था कि,
“Radium is not to enrich any one. It is an element for all people.”
“रेडियम किसी को समृद्ध बनाने के लिए नहीं है। यह तत्व सभी लोगों के लिए है।”
दया और करुणा की भावना से ओत-प्रोत, मानवता की मशाल को सदैव प्रज्वलित करने वाली मैडम क्युरी ने नोबल पुरस्कार से प्राप्त राशी को सार्वजनिक कार्यों हेतु दान कर दिया था। उन्होने ने जेनिया के अस्पताल में बच्चों की सहायता हेतु काफी धनराशी दान कर दी तथा 1914 के विश्व युद्ध में पिङित लोगों की सहायता के लिए स्वीडन में दान दिया। युद्ध के मोर्चों पर वे स्वंय गईं और वहाँ उन्होने रेडियम तथा एक्स-रे उपचार के अनेक केन्द्र खोले। घायलों की सक्रिय सेवा हेतु उन्होने एक बङी गाङी में चलता-फिरता अस्पताल खोला था। जिसके माध्यम से लगभग डेढ-दो लाख रोगियों की सेवा उन्होने स्वंय की थी। अनेक उपलब्धियों तथा धन-दौलत की अधिकता के बावजूद उनका जीवन सरल और साधारण था। नए शोधों के प्रति उनकी कर्मठशीलता तथा निरंतर कार्य की वजह से 1934 में ही अतिशय रेडिएशन के प्रभाव के कारण मैरी क्यूरी का निधन हो गया। सादा जीवन और उच्च विचार की भावना लिए मैरी क्युरी का कहना था कि,
“व्यक्ति मात्र के विकास के बगैर हम विश्व को सुंदर नहीं बना सकते। इस लक्ष्य के लिए हमें सदा प्रयासरत रहना होगा, मानवता के लिए भी अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। हमारा प्रमुख कर्तव्य उनके लिए हो, जिनके लिए हम सर्वाधिक उपयोगी हो सकते हैं।“
मैडम क्युरी आज भले ही इस संसार में नही हैं किन्तु उनके द्वारा किये गए कार्य तथा समर्पण को विश्व कभी नही भूल सकता। आज भी समस्त विश्व में मैरी क्युरी श्रद्धा की पात्र हैं तथा उनको सम्मान से याद करना हम सबके लिए गौरव की बात है। मैरी क्युरी को महिला दिवस के उपलक्ष पर शब्दों की भावांजली से शत्-शत् नमन करते हैं।
अनिता शर्मा

हज़ारों की मौत हुयी ;

मनुष्य  के मन जब मज़बूर हो  जाता है ,तब उगती है भक्ति ;

डाक्टर  जब अपनी अंतिम  कोशिश में ,
रोगी को बचा नहीं सकता
तब दिखाते है हाथ ऊपर;

अचानक सुनामी  आयी ,
ईश्वर की याद के लिए समय नहीं,

याद दिलाने कोई  सतर्क न  रहे ;
अचानक  भूकम्प  आया

हज़ारों  की मौत  हुयी  ;

याद ईश्वर की  करने नहीं दिया समय;

ईश्वर तो अति चतुर ,विश्वके सृजनकर्ता
सोच समझकर करते हैं  ऐसा
अपने को याद करो तो विवश हूँ  बचाने ,
अचानक ही कुछ करूँ  तो मनुष्य भूल जाएगा मुझे ,
तभी मौका दूंगा ,उसकी बुद्धि काम न करेगी ;
सुख देता हूँ मुझे भूलकर भूलें करने ;
दुःख देता हूँ मुझे  याद करने ,
 सदा जो दोनों दशाओं में याद करते हैं मेरी
उनपर करता हूँ कृपा की वर्षा ; पर
इसमें इस परीक्षा में कम ही लोग सिद्धि  पाकर
सिद्ध पुरुष बन जाते हैं.






अक्षरो के आदि अक्षर अकार  वैसे ही
जग में आदि है भगवान.

ईश्वर के पवित्र पाद  की  वंदना  न करें तो
सीखी हुयी शिक्षा से क्या लाभ ?

सुखी जग में वही रहेगा स्थिर  जो  करते
दिन दिन ईश्वर वन्दना.

 ईश्वर में हैं न प्यार न नफरत ,जान  करें
दैनिक वंदना  तो कभी न होगा दुःख।

अज्ञान अंधकार के  सुकर्म दुष्कर्म फल  न करेगा कुछ
जो ईश्वर के यश जान करते वंदना



शिक्षा संस्थाएँ और चुनाव

Friday, July 31, 2015

कृषी प्रधान देश हमारा

कृषिप्रधान देश में किसानों कीआत्म हत्यायें

दिल दहल उठता है
दाल प्याज का आयात
दलालों काहाथ  गरम
भूमि अपहरण उद्योगीकरण
भूलोक वासी भोजन प्रधान
भविष्य भारत का होगाक्या

Tuesday, July 28, 2015

-मन चंगा तो कटौती  में  गंगा 
कबीर -
माला तो  कर में फिरै ,जीभ फिरै मुख माही। 
मनुवा तो दस दिशी फिरै यह तो स्मरण नाहीं 

 तमिल देवारम --देव के हार हिन्दी अर्थ  
तिरुमंतिरम  --श्री मंत्र  
मदुरैप्पत्तु  आदि ग्रंथों में 
यही मतलब के ईश्वर के यशोगान  है। 
देखिये :
   बेकार बातें करके व्यर्थ ही वक्त मत खोइए। 
   मन और बोली दोनों एक ही बात करनी चाहिए। 
  आप अपने मन को पवित्र रखिये ;तभी 
परम पवित्र ब्रह्मानंद ईश्वर के दर्शन   मिलेंगे. 
(तिरुमूलर --तिरुमंतिरम )
शुद्ध ज्ञानियों के ह्रदय -कमल में ईश्वर है. 
(देवाराम --तिरुज्ञानसम्बन्धर )
शिव -बोध  से शिव का पहचानना मुश्किल है। 
मन ऐसा पवित्र होना है ,
जिससे शिव की कृपा उमड़कर आनी है. 
(परंज्योति मुनिवर 
  पवित्र मन ही ईश्वर की कृपाकटाक्ष दिलाएगा। 




Sunday, July 26, 2015

मन

मनुष्य मन एकांग्र  होने पर
साधना  के पथ पर अग्रसर होता है
मन एक काम में तल्लीन होता है तो
सफलता में शक की संभावना नहीं होता ।
कैसे तल्लीनता आएगी?
माया महा ठगनी
कबीर ने कहा
इससे कैसे बच सकत हैं?
एक मात्र मार्ग भक्ति मार्ग
ध्यान मार्ग
भले ही मज़हब या धर्म या संपदाय जो भी हो
मन को वश या काबू पाने या रखने
एक अमानुष्य शक्ति पर विश्वास रखना ही
ध्यान करने की प्रेरणा है
वो भी जब मनुष्य अपने लक्ष्य पर
रुकावटों या असफलता का सामना करता है
तब तक वह ईश्वरीय शक्ति पर ध्यान न देगा।