Saturday, December 24, 2022

तमिल आसान

 देवनागरी द्वारा भारतीय भाषा सिखाना आचार्य विनोबा भावे का संदेश है।

 मैं तमिल सिखाता हूँ। 


नमस्ते। वणक्कम्।  


कहते हैं कि 

 मनुष्य स्वार्थी है।  

 मनितन सुयनलवादी  एन्रु चोलकिरार्कळ।


मैं ने किसी स्वार्थी मनुष्य को नहीं देखा।

 नान ऍन्त  सुयनलवादियैयुम पार्क्कविल्लै ।


संन्यासी नाम जप करता है।

  चन्नियासि नाम जपम् चेय्किरान ।

स्वार्थ के लिए या अपनी मुक्ति के लिए।

सुयनलत्तिर्का अल्लतु तन् मुक्तिक्का।।


वह  भक्ति का प्रचार अनजान में ही करता है।

अवन् अरियामलेये भक्ति प्रचारम् चेयकिरान।



उसके कारण कई  दानी भक्त ईश्वर नाम जपते हैं।

अवन् कारणमाक  अनेक दानम् चेय्युम भक्तर्कळ कडवुळिन नामत्तै जपिक्किन्रनर।

 

उसने घर तो त्याग दिया,

अवन् वीट्टै तुरंतु विट्टान ।

सोचा --निनैत्तेन।


पर वह आँखें मूँदकर बैठते रहने पर भी कई श्रद्धालु के मन में भक्ति स्त्रोत  बहकर दानी बनाता है।

आनाल् अवन् कण्णैमूडि अमर्न्तिरुंदालुम् अनेक चिरत्तैयुळ्ळवर्कळिन मनतिल्  भक्ति ऊट्रैप्पेरुक्की  दानी आक्कुकिरान।

साधू  अपना मोह त्यागकर जनता में भक्ति मोह उत्पन्न करता है।

साधु तन मोहत्तैत् तुरंदु मक्कलिडत्तिल  भक्ति मोहत्तै  उंडाक्कुकिरान।




    मानव स्वार्थी है। ----मनितन् सुयनलवादी।

    नहीं,  इल्लै।

वह काम करता है =अवन् वेलै चेयकिरान।


   अपने परिवार के लिए।=

 तन कुटुंबत्तिर्क्का।


बच्चों का पालना ।=कुऴंतैकळै वळर्त्तल।


 दूधवाले के लिए कमाता है।== पालकारनुक्काक चंपादिकक्किरान्।

 पाठशाला शुल्क के लिए। 

 पळ्ळि कट्टणत्तिर्क्काक।


 कपड़ों की दूकानदार के लिए।तुणिक्कडैक्कारनुक्काक ।


दर्जी के लिए। 

तैयल कारणुक्काक।


किराने की दुकान के लिए। पलचरक्कुक् कडैक्काक।


भले ही बहुत बड़ा कंजूस हो,

अवन् पेरिय कंचनाक /(करुमियाक) इरुंतालुम,


उपर्युक्त खर्च करना ही पड़ेगा। 

मेलुळ्ळ चेलवुकप्पळ् चेय्यत्तान वेंडुम।


 अतः स्वार्थी मनुष्य अनजान में ही  परार्थी बनता है।

अतनाल् सुयनलमनितन्  अरियामलेये  परोपकारी आकिरान्।

एस.अनंतकृष्णन ,चेन्नै।

Wednesday, December 21, 2022

भाषा की माँग

 भाषा जो भी हो माँग के अनुसार सीखनी ही पढ़ती है।

मेरे शहर पवनी में एक ही  हिंदी परिवार था। अब 100से ज्यादा परिवार।

 कई तमिल ग्रंथों के कवि जैन मुनि थे।

तिरुवल्लुवर का  तिरुक्कुरल , त्रिकटुकम्, चिरु पंच मूलम्-आचारक्कोवै आदि तमिल साहित्य में जैनों की देन है। 

 महाकाव्य शिलप्पधिकारम मणि मेखलै जीवक चिंतामणी  ये जैन बौद्ध ग्रंथ है। पंच तमिल काव्यों के नाम संस्कृत है।

शिल्प अधिकार शिलप्पधिकारम।

जीव की चिंता जीवक चिंतामणी।

कुंडल +केश कुंडल केशी।

विद्यापति। मणि मेखला मणिमेखलै।

 अब भाषा तमिल हो या हिंदी हो या अंग्रेज़ी  समय की माँग है।

अंग्रेज़ी आते तो हमारा पहनावा बदल गया। गर्मी देश में शू साक्स  टै। बुद्धिजीवी ने संस्कृत को तजकर अंग्रेजी  सीखी। कल्रर्क बनने।वकील बनने। अंग्रेज़ों की चालाकी उनके जाने के बाद भी अंग्रेज़ी हमारी जीविकोपार्जन और गौरव की भाषा बन गयी।

 हमारे स्वतंत्रता संग्राम  के नेता अंग्रेज़ी के पारंगत थे। सत्तर साल उन्हीं का शासन था। हिंदी के लिए अधिक खर्च। पर जीविकोपार्जन बग़ैर अंग्रेज़ी के असंभव।

 तमिलनाडु में 52% तमिल भाषी नहीं।

तमिलनाडु के नेता तेलुगू भाषी हैं।

वै.गोपालसामी, विजयकांत करुणानिधि परिवार, प्राध्यापक अनबलकन आदि।

हाल ही में एक वीडियो आया कि  स्वर्गीय अण्णातुरै की माँ तेलुगू भाषी हैं।

तमिलनाडु  के जैन में कई तमिल के प्रकांड पंडित है।

यहां के तेलुगू कन्नड मराठी लोग तमिल ही पढ़ते हैं।


 भाषा तमिल सीखना या हिंदी आज तक अपनी अपनी मर्जी।

अनिवार्य नहीं।

पर अंग्रेजी अनिवार्य है। 

इस पर विचार करना है सोचना है।

आचार्य विनोबा भावे के भूदान यज्ञ में

वे हिंदी ही बोलते थे। उनके कारण आ सेतु हिमाचल हिंदी गूँजी थी।

उन्होंने ही बताया भारतीय सभी भाषाओं की लिपि देवनागरी करने पर भारतीय भाषा सीखना आसान है।

इसीलिए मैं ने नागरी लिपी में तमिल सिखा रहा हूँ।  यह तो कोई अनिवार्य नहीं है। इच्छुक लोगों के लिए।

देवनागरी लिपि को रोचक बनाना मेरा उद्देश्य है। तमिल का प्रचार नहीं है।

Friday, December 16, 2022

ईश्वरीयचिंतन

 नमस्ते। வணக்கம்.

शुभ कामनाएँ। நல் விருப்பங்கள்.
भगवान की प्रार्थना, கடவுளிடம் வேண்டுகோள்.
वंदना. வணக்கம்.
आराधना. ஆராதனை
ध्यान--- தியானம்
तपस्या--- -------தவம்
प्रेम--------- அன்பு
श्रद्धा-भक्ति----சிரத்தை- பக்தி
ऋषिि -मुनि-साधु-संतों का मार्ग। ரிஷி-முனி- சாது-துறவிகள்வழி
लौकिक बाह्याडंबर में ----இவ்வுலக வெளிஆடம்பரங்கள்
मानव मन अति चंचल। -மனிதமனம் சஞ்சலம்
स्वार्थ, मोह,लोभ,मद,ईर्ष्या के मूल। சுயநலம்,மோகம்,பேராசை,ஆணவம்பொறாமை ஆணிவேர்.
सहज जीवन से अति दूर। இயல்பான வாழ்க்கையிலிருந்து அதிக விலகல்
आध्यात्मिक जीवन में ஆன்மீக வாழ்வில்
चलायमान मन स्थिर। அலையும் மனம் நிலையாகும்
सद्गुणों का विकास,--நற்குணங்களின் வளர்ச்சி
नश्वर दुनिया का पहचान। அழியும் உலகை அறிதல்
परिणाम अनासक्त जीवन। விளைவு பற்றற்ற வாழ்க்கை
परमानंद,ब्रह्मज्ञान, பரமானந்தம்,இறை ஞானம்
ब्रह्मानंद। பிரம்மானந்தம்.
जगत मिथ्या,ब्रह्मं सत्यं सूक्ष्मता। உலகம் பொய்,பிரம்மம் சத்தியம் நுட்பமானது
सबहिं नचावत राम गोसाई। அனைவரையும் ஆட்டிவைக்கும்ஆண்டன்
अपने को पहचानना, உன்னையே அறிந்துகோள்
अपनी क्षमता को पहचानना, தன் திறமையை அறிந்து கொள்
अपने में नया संस्कार लाना। தனக்குள் புதிய சீர்திருத்தம்
नयी सोच,नया विचार। புதிய சிந்தனைபுதிய எண்ணங்கள்
जग-कल्याण मार्ग। உலக நல மார்கங்கள்
जिओ जीने दो। வாழு வாழவிடு

सर्वे जना सुखिनो भवंतु।அனைவரும் சுகமாக இருக்க வேண்டும்
आत्मविश्वास, தன் நம்பிக்கை
आत्म त्याग. ஆத்ம தியாகம்
आत्मसंतोष। ஆன்ம நிறைவு
मानवता का विकास। மனிதநேய வளர்ச்சி
பக்தியின் பலன்கள்-भक्ति का फल।
आज का ईश्वरीय चिंतन।இண்றைய இறை சிந்தனைகள்

சே.அனந்தகிருஷ்ணன்अनंतकृष्णन

Monday, December 12, 2022

मन

 மனமது செம்மையானால் மந்திரம் செபிக்க வேண்டா

மனமது செம்மையானால் வாயுவை உயர்த்த வேண்டா

மனமது செம்மையானால் வாசியை நிறுத்த வேண்டா

மனமது செம்மையானால் மந்திரம் செம்மையாகும். 

 मन चंगा हो तो कठौती में गंगा।

न मंत्र की जरूरत,

न प्राणायाम की जरूरत।

मन चंगा है तो

 खुद भगवान मन में बस जाएँगे।


इस संदर्भ में  कबीर की याद आती है।

माला तो कर में फिरै ,जीभ फिरै मुँह माहि।

मन दस दिशै फिरै ,

यह तो सुमिरन नाहिं।।


Saturday, December 10, 2022

तमिल सीखिए

 तमिऴ पढ़िए தமிழ் படியுங்கள்

 படம்

பாடம்

பிடி

பீடை

பு ட்டு

பூட்டு

பெட்டி வடிவமைப்பு

பேட்டி

பைசல்

பொட்டை

போட்டி

பௌத்த மதம்.

அப்பா.

पटम्। चित्र


पाटम् पाठ


पिडि। पकड


पीडै दुख 


पुट्टु --एक खाद्य पदार्थ 


पूटटु।  ताला


पॆट‌टि --संदूक


पेट्टि  ---साक्षातकार 


पैसल --न्याय 


पॊट्टि--संदूक


पोट्टि स्पर्धा 


पौत्तम् -बौद्ध‌


अप्पा --पिता


Wednesday, December 7, 2022

आज के विचार

 ஆன்மீகம் என்பது आध्यात्मिकता माने


 ஆண்மை. पौरुष।

ஆளுமை. व्यक्तित्व।

அடக்கம்.  सौरभ।

பணிவு   विनम्रता।


ஐம்புலன் அடக்கம். जितेन्द्रियता।

அலௌகீக  अलौकिक 

சிந்தனைகள். चिंतन।

அமைதி.    शांति।

தெய்வபலம். दैविक बल।

பார்வையே பலம் दृष्टि बल

 ஆயுதம்.         शस्त्र।

ஆணவமற்றநிலை. अहं रहित दशा।

ஆசையற்றநிலை.  अनिच्छित दशा।

பற்றற்ற நிலை.   अनासक्त दशा।

அஹம் ப்ரஹ்மாஸ்மி अहं ब्रह्मास्मी।

நானே கடவுள்  मैं ही भगवान की

என்ற நிலை. दशा।

 அபிராமி பட்டர்  अभिराम भट्टर की दशा।

நிலை.


பக்த தியாகராசர் நிலை. भक्त त्यागराज की दशा।

பிரகலாதன் நிலை. प्रह्लाद की दशा।

பகவான்  भगवान खुद 

பணியாள் ஆகும் நிலை. सेवक बनने की दशा।

இந்நிலை    ऐसी दशा 

இந்நில உலகில்  इस भूलोक में 

ஏற்படுமா? होगा क्या?

ஏற்படும் என்பதற்கு  होगा के 

சான்றே प्रमाण ही 


சங்கரர்  शंकर

இராமானுஜர்  रामानुज 

மத்வர் मध्वर

மஹாவீரர் 

महावीर 

புத்தர்  बूद्धि 

ஏசு ईसा

 நபிகள்  मुहम्मद नहीं।

ரமணர்  रमण

யோகி சுரத்குமார்.योगि सुरत कुमार 

சீரடி சாயி. शीरडि साईं।

குருநானக் गुरुनानक 

ஆனால்   लेकिन

 उनके शिष्य அவர் சீடர்கள் 

அந்நிலையில்லை  उनकी दशा में नहीं।


நிலைகள் மாறிவிட்டன. दशाएँ बदल गयीं।


निस्वार्थता नहीं சுயநலமற்ற து இல்லை.

मानवता नहीं மனிதம் இல்லை.

धन प्रधान.     பணமே பிரதானம்.

बाह्याडंबर प्रधान। வெளி ஆடம்பர பிரதானம்.

भेद प्रधान.   வேற்றுமைகளே பிரதானம்.

परिणाम. பலன் 

भेद।    வேற்றுமை.

भेद में भेद। வேற்றுமையில் வேற்றுமை.

एकता नहीं। ஒற்றுமை இல்லை.

धर्म नहीं।  அறம் இல்லை.

बेचैनी ही बेचैनी।  அமைதியின்மையே 

 जरा सोचिए. சற்றே யோசியுங்கள்.

 इतने संत. இத்தனை சாதுக்கள் 

मार्गदर्शक. வழிகாட்டிகள்

शांतिरक्षक. அமைதிக்காவலர்கள்

अहिंसा रक्षक அஹிம்சைக் காவலர்கள் 

धर्मरक्षक. அறங்காவலர்கள் 

प्यार पालक  அன்பை வளர்த்தவர்கள் 

न हो तो।   இல்லை என்றால் 

 अग जग की हालत  क्या होगी। அகில உலக நிலை 

 என்ன ஆகியிருக்கும்?

 அமானுஷ்ய தண்டனைகள்  अमानुष्य सजा

 அமானுஷ்ய अमानुष्य 

பரிசுகள்  पुरस्कार 

अमीरी। பணக்கார நிலை 

गरीबी  ஏழ்மை 

இளமை  जवानी 

முதுமை  बुढापा 

நோய்।     रोग 

மரணம் मृत्यु 

அகால மரணம். अकाल मृत्यु

   முன்னேற்றம்.उत्थान

          வீழ்ச்சி पतन।


 இவை  அனைத்தும் இல்லை என்றால்.... ये  सब नहीं तो  .............


 கற்பனை செய்யுங்கள். कल्पना कीजिए ।


भगवान सामने आएगा।,கடவுள் எதிரில் வருவார்.

காட்சி தருவார். दर्शन देंगे।


जगत मिथ्या ब्रह्म सत्यं का पता लगेगा।

உலகம் பொய்.பிரம்மம் மெய்.தெரிந்துவிடும்.



இன்று இறைவன் அளித்த சிறப்பு சிந்தனைகள்.


சே.அனந்தகிருஷ்ணன்.

एस.अनंतकृष्णन।

स्वचिंतक अनुवादक तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

ईश्वरदास।









Tuesday, December 6, 2022

आज के विचार

 आज  से.कुछ .लिखूँगा।

लिखना मानसिक प्रेरणा होती है। ईश्वरीय देन है।

 भगवान पर विचार करने पर  ,

संसार के कार्यकलापों की सूक्ष्मता 

हमें अचरज में डाल देगी। 

खटमल, मच्छर, मक्खियाँ दीमक लाल चींटियाँआदि 

सृष्टियाँ  जीने देना मानव के लिए खतरनाक होती हैँ।

माँसाहार को रोकने पर शाकाहारी चैन से जी नहीं सकता।।

गली के कुत्तों को मारना चाहिए कि नहीँ। 

मारना हिंसा है ।न  मारना  मानव के लिए बेचैनी है।

बंदरों की भीड़ रहने देने पर  मानव चल फिर नहीँ सकता।

हिंसक जानवरोँ को.मारना.धर्म है.या अधर्म ।

   ईश्वरीय व्यवस्था अद्भुत.होती है।

 नदियों के किनारा सभ्यता का पालना.है।

जंगल की व्यवस्था खूँख्वार जानवरोँ के लिए।

 जंगल छोडकर जानवर बाहर नहीँ आता।

मानव अति बुद्धिमान ।  सबको. नियंत्रण में.रखना.चाहता है। 

स्वार्थी है ।  अपने से दुर्बलों को .बेगार बनाकर जीना चाहता है।

 ईश्वरीय व्यवस्था में  बुद्धि बल,धन बल, शारीरिक बल.अलग अलग व्यक्तियों में है।

एक दूसरे पर आश्रित रहना ही ईश्वरीय व्यवस्था है।

चाणक्य का बुद्धिबल मौर्य साम्राज्य की स्थापना नहीं कर सका। उनका अर्थ शास्त्र का महत्व शारीरिक बलवान नहीँ. जान सकता।

 अतः भगवान की लीला अपूर्व अति सूक्ष्म होती.है।

मानव में मानवता या दानवता ईश्वरीय. देन.है।

मानव को दैविक शक्ति के सामने. झुकना ही पडेगा।

सबहिं नचावत राम गोसाईं यह वाक्य तलसीदास ही दे सकते हैं।

 जाको.राखै साइयाँ मारी न.सक्कै.कोय।

बाल.न.बांका करि सकै.जाने जग वैरी होय।

यह वाणी के डिक्टेटर कबीर ही दे सकते हैं।

 ऊँ ओम 

एस.अनंत कृष्णन  ,स्वरचित स्वचिंतक ।

अनुवादक।

















Monday, December 5, 2022

आत्म संतोष

  


जग में जीना है तो      உலகில் வாழ வேண்டும் என்றால் 

 जगन्नाथ की करुणा चाहिए। ஜகன் நாதனின் கருணை வேண்டும்.

 मिलनसार बुद्धिचाहिए।   கலந்து வாழும் அறிவு வேண்டும்.

 तटस्थता चाहिए। நடுநிலைமை வேண்டும்.

 अपने आप दाम मिलना चाहिए। இயற்கை யாக பணம் வேண்டும்.

नाम मिलना चाहिए। புகழ் வேண்டும்.

काम मिलना चाहिए। வேலை கிடைக்க வேண்டும்.

अनुकरणीय अनुसरणीय  பின்பற்றக் கூடிய பொறுமையுள்ள 

सहनशीलता विनम्रता चाहिए। பணிவு வேண்டும்.

अंचंचल मन चाहिए। சஞ்சலமற்றமனம் வேண்டும்.

अपने आप को पहचानना चाहिए। தன்னைத்தானே அறிந்து கொள்ள வேண்டும்.

आसक्ति में अनासक्त विचार चाहिए। பற்றுள்ளதில் பற்றற்ற எண்ணம் வேண்டும்.

एकांत में आनंद आत्मसंतोष चाहिए। தனிமையில் ஆனந்தம் ஆன்ம நிறைவு வேண்டும்.

सहज में प्राप्त सुख दुख में  

आत्मानंद चाहिए। இயற்கை யாக கிடைக்கும் சுக துன்பத்தில் ஆத்மானந்தம் வேண்டும்.

खींचातानी सही नहीं,  இழுபறி சரியல்ல 

आत्मनिर्भरता चाहिए। தன்னைத் தானே சார்ந்திருக்க வேண்டும்.

 मानव पशु, महान होने मानवता चाहिए। மனிதன் மிருகம், உயர்ந்தவனாக மனிதத்தன்மை வேண்டும்.

मानव जन्म दुर्लभ है तो மனிதப்பிறவி அறிந்து என்றால்

दुर्लभ कार्य करना चाहिए। அரிதான செயல் செய்யவேண்டும்.

भगवान पर विश्वास चाहिए। பகவானின் மீது நம்பிக்கை வேண்டும்.

भगवान की कृपादृष्टि चाहिए। பகவானின் அருள் பார்வை வேண்டும்.

तनमनधन में स्वस्थता चाहिए तो உடல் மனம் தரம் ஆரோக்கியம் வேண்டும் என்றால் 

अपने कर्म में स्वस्थता चाहिए। தன் வினையில் ஆரோக்கியம் வேண்டும்.

मानव जीवन कैसे बना? மனிதப் பிறவி எப்படி ஆனது?

सुखी-दुखी जीवन, சுகமான துன்பமான வாழ்க்கை 

स्वस्थ अस्वस्थ जीवन ஆரோக்கியமான ஆரோக்கியமற்ற வாழ்க்கை.

 मानव समझ में परे हैं। மனித அறிவிற்கு அப்பாற்பட்ட து.

तभी  ईश्वर के चिंतन , அப்பொழுது தான் கடவுளின் சிந்தனை.

अमानुष्य शक्ति के विचार, மனி ஆற்றலுக்கு அப்பாற்பட்ட ஆற்றலின் எண்ணம்

पाप पुण्य का  भय, பால் புண்ணிய அச்சம்.

परिणाम सबहिं नचावत राम गोसाईं। விளைவு 

அனைவரையும் ஆட்டிப் படைப்பான் ஆண்டவனே.

சே.அனந்தகிருஷ்ணன்.

एस.अनंतकृष्णन।







 



आज्ञाकारी पुत्र चाहिए।   கீழ் படித்துள்ள மகன் வேண்டும்.

सादा जीवन उच्च विचार चाहिए। எளிய வாழ்க்கை உயர்ந்த எண்ணம் வேண்டும்.