Wednesday, June 30, 2021

प्रतिभा

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य बोध असम इकाई।

साप्ताहिक आयोजन।

29-6-2021 से  6-7-2021

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प्रतिभा दिव्य शक्ति, 

दैविक देन।।

 वह मानव में कैसे आती,

 पता नहीं।

प्रतिभा  परंपरागत  थी,

राजा का पुत्र राजा, 

 राजमहल  रानियों से भरा,

 राजा  के  वंशाणु बदल ,

 अंतरवंशाणु   परिणाम  राजा के पुत्रों में

 वीर,कायर, बुद्धि मान व बुद्धू ।

प्रतिभा ईश्वरीय देन।।

 पर माया,आकर्षण इसे छिपाने,

ऋषि मूल नदी मूल न देखना।

कर्ण का जन्म सूर्य से शक्ति 

संपन्न तेजस रूप। पिता के कारण।।

विदुर चतुर तिरस्कृत, माँ के कारण।।

अंतरराष्ट्रीय शादी अस्थिर देश भक्ति।।

 देशद्रोह, आज कल भी,

मंत्री, अभिनेता , अभिनेत्री,रखैल।

 परिणाम प्रतिभा में भिन्न।।

वैद्य , गुरु परंपरा नहीं,

 परिणाम बुद्धि लब्धी  ईश्वरीय देन।।

 अंधे के पुत्र अंधे नहीं,

 डाक्टर का पुत्र स्वस्थ  नहीं,

प्राध्यापक का पुत्र अन्य क्षेत्र।।

 प्रतिभा प्रयत्न से उन्हीं को मिलती है,

 जिनको सर्वेश्वर की कृपा मिलें।।

 शूद्र  रानी ने बनवाया मंदिर।

 अपेक्षित मंदिर में  

काली की महिमा।

पुजारी बने ब्राह्मण विश्वविख्यात।।

प्रतिभा महिमा कर्मफल जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।

Tuesday, June 29, 2021

खामोशी

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य संगम संस्थान मध्यप्रदेश इकाई।

29-6-2021.

विषय खामोशी।

 विधा। मौलिक विधा मौलिक रचना।

  खामोशी से रहना ब्रह्मानंद प्राप्त करने का साधन।।

 लुटेरा रत्नाकर की खामोशी,

 तुलसी दास की खामोशी,

तमिल कवि अरुणगिरी की खामोशी,

अमूल्य दिव्य ग्रंथ की देन।।

 बाघ का छिपना मंद गति 

खामोशी शिकार की कामयाबी।।

सिद्धार्थ की खामोशी , महावीर की खामोशी

 अमूल्य सद्मार्ग का संदेश।।

 मुहम्मद नबी की अंधेरी गुफ़ा में खामोशी,

ईश्वर का पैगाम।।

 ध्रूव, प्रह्लाद की तपस्या ईश्वर का साक्षात्कार।।

  खामोशी ब्रह्मानंद की देन।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै

तमिल नाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Monday, June 28, 2021

भारतीय किसान

 

नमस्ते वणक्कम।

 प्रेम एक भावना 

विधा मौलिक रचना मौलिक विधा।

 २६-६-२०२१.

    शुक्ल जी ने कहा,

    भाव  विशेष परिस्थिति में जाता है।

     प्रेम तो स्थाई भाव। प्र

    सीता की सुंदरता  प्रेम की भावना।।

    दमयंती के सामने  नल रूप देव।।

    दमयंती की अग्नि परीक्षा।।

   असली नल का पता लगाना।।

   हर सुन्दरी के पीछे प्रेम भाव।।

  वह तो प्रेम नहीं ,मोह।।

  रावण को सीता के प्रति प्रेम।।

 मोह नहीं,वह भी प्रेम की 

मर्यादा निमित्त।।

  प्रेम धन के प्रति,

 देश के प्रति,

 कला के प्रति।

 भगवान के प्रति।

 प्रेम भावना संकीर्ण,

 तीसरे को स्थान नहीं।।

  प्रेम में लीन व्यक्ति,

 कबीर की वाणी,

 लाली मेरे लाल की जित देखो तित लाल।

 लाली देखन मैं गरी मैं भी हो गरी लाल।।

 यही प्रेम भावना की चरम सीमा।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

नमस्ते वणक्कम।

 प्रेम एक भावना 

विधा मौलिक रचना मौलिक विधा।

 २६-६-२०२१.

    शुक्ल जी ने कहा,

    भाव  विशेष परिस्थिति में जाता है।

     प्रेम तो स्थाई भाव। प्र

    सीता की सुंदरता  प्रेम की भावना।।

    दमयंती के सामने  नल रूप देव।।

    दमयंती की अग्नि परीक्षा।।

   असली नल का पता लगाना।।

   हर सुन्दरी के पीछे प्रेम भाव।।

  वह तो प्रेम नहीं ,मोह।।

  रावण को सीता के प्रति प्रेम।।

 मोह नहीं,वह भी प्रेम की 

मर्यादा निमित्त।।

  प्रेम धन के प्रति,

 देश के प्रति,

 कला के प्रति।

 भगवान के प्रति।

 प्रेम भावना संकीर्ण,

 तीसरे को स्थान नहीं।।

  प्रेम में लीन व्यक्ति,

 कबीर की वाणी,

 लाली मेरे लाल की जित देखो तित लाल।

 लाली देखन मैं गरी मैं भी हो गरी लाल।।

 यही प्रेम भावना की चरम सीमा।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक




नमस्ते वणक्कम।

 प्रेम एक भावना 

विधा मौलिक रचना मौलिक विधा।

 २६-६-२०२१.

    शुक्ल जी ने कहा,

    भाव  विशेष परिस्थिति में जाता है।

     प्रेम तो स्थाई भाव। प्र

    सीता की सुंदरता  प्रेम की भावना।।

    दमयंती के सामने  नल रूप देव।।

    दमयंती की अग्नि परीक्षा।।

   असली नल का पता लगाना।।

   हर सुन्दरी के पीछे प्रेम भाव।।

  वह तो प्रेम नहीं ,मोह।।

  रावण को सीता के प्रति प्रेम।।

 मोह नहीं,वह भी प्रेम की 

मर्यादा निमित्त।।

  प्रेम धन के प्रति,

 देश के प्रति,

 कला के प्रति।

 भगवान के प्रति।

 प्रेम भावना संकीर्ण,

 तीसरे को स्थान नहीं।।

  प्रेम में लीन व्यक्ति,

 कबीर की वाणी,

 लाली मेरे लाल की जित देखो तित लाल।

 लाली देखन मैं गरी मैं भी हो गरी लाल।।

 यही प्रेम भावना की चरम सीमा।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

प्रेम एक भावना

 नमस्ते वणक्कम।

 प्रेम एक भावना 

विधा मौलिक रचना मौलिक विधा।

 २६-६-२०२१.

    शुक्ल जी ने कहा,

    भाव  विशेष परिस्थिति में जाता है।

     प्रेम तो स्थाई भाव। प्र

    सीता की सुंदरता  प्रेम की भावना।।

    दमयंती के सामने  नल रूप देव।।

    दमयंती की अग्नि परीक्षा।।

   असली नल का पता लगाना।।

   हर सुन्दरी के पीछे प्रेम भाव।।

  वह तो प्रेम नहीं ,मोह।।

  रावण को सीता के प्रति प्रेम।।

 मोह नहीं,वह भी प्रेम की 

मर्यादा निमित्त।।

  प्रेम धन के प्रति,

 देश के प्रति,

 कला के प्रति।

 भगवान के प्रति।

 प्रेम भावना संकीर्ण,

 तीसरे को स्थान नहीं।।

  प्रेम में लीन व्यक्ति,

 कबीर की वाणी,

 लाली मेरे लाल की जित देखो तित लाल।

 लाली देखन मैं गरी मैं भी हो गरी लाल।।

 यही प्रेम भावना की चरम सीमा।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

ख्वाब

 नमस्ते वणक्कम। हिंद देश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई।

29-6-2021.

विषय। हृदय स्पंदन। धड़कन।।

  

हृदय स्पंदन ईश्वरीय देन।

 रक्त संचार की गति तडप्पन की जड़।।

 इस धडकन का बढ़ना घटना,

 घटने की परिस्थिति याँ।

अचानक  लड़की की आँखें मारना

 स्पर्श कर जाना धड़कन।।

 किसी अपराधी साथी के साथ रहते

 पुलिस का आना एक धड़कन।।

 भूकंप,सुनामी प्राकृतिक क्रोध के

 हृदय नग्न तेज।

 प्रेम प्रथम मिलन , प्रस्ताव

स्पंदन अलग।।

 यह स्पंदन धड़कन नहीं तौ

 मानव बड़े सम्राट भले ही हो

 वह शव रख लाश


स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

हृदय स्पंदन

 नमस्ते वणक्कम। हिंद देश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई।

29-6-2021.

विषय। हृदय स्पंदन। धड़कन।।

  

हृदय स्पंदन ईश्वरीय देन।

 रक्त संचार की गति तडप्पन की जड़।।

 इस धडकन का बढ़ना घटना,

 घटने की परिस्थिति याँ।

अचानक  लड़की की आँखें मारना

 स्पर्श कर जाना धड़कन।।

 किसी अपराधी साथी के साथ रहते

 पुलिस का आना एक धड़कन।।

 भूकंप,सुनामी प्राकृतिक क्रोध के

 हृदय नग्न तेज।

 प्रेम प्रथम मिलन , प्रस्ताव

स्पंदन अलग।।

 यह स्पंदन धड़कन नहीं तौ

 मानव बड़े सम्राट भले ही हो

 वह शव रख लाश


स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

वतन

 नमस्ते वणक्कम।

नव साहित्य परिवार।

28-6-2021.

विषय--वतन।

विधा --मौलिक रचना मौलिक विधा।।

   मेरी मातृभूमि, भारत समृद्ध भूमि।।

   जीव नदियों की भूमि,

   दिव्य आध्यात्मिक भूमि।।

    मेरा प्रिय वतन ,

    तन, मन, धन से अति प्यारा।

    अहिंसा,शांति,सत्य ,वचन पालन 

    मेरे वतन का धर्म ।।

     विश्व बंधुत्व, वसुधैव कुटुंबकम् ,

     सर्वे जना सुखिनो भवन्तु  ---

     ये आदर्श नारे हैं हमारे।।

    मजहब के नाम निर्दयी संसार।।

    हत्यारों के आतंकवादी मजहब।।

     भारत है अति महान देश।।

     धर्म निरपेक्षता का महान वतन।।

      अतिथि देवो भव के आदर्श देश।।

      अति अमीर देश।

     नग्न,अर्द्ध नग्न , ज्ञान के खान ,

     साधु -संत-मुनियों का देश।।

      मान मर्यादा की रक्षा के लिए,

       जौहर व्रत का आदर्श,

        पतिव्रता की सुरक्षा।।

         आतंकवादियों  और विदेशी षड्यंत्र

          देशद्रोही पर इन सब के ऊपर,

         आध्यात्मिक ज्ञान दिव्य शक्ति का देश।।

         इकबाल  ने कहा--

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा हमारा।।

 कई सभ्यताएँ मिट गई, पर भारत की सभ्यता

  अति प्राचीन,अति अर्वाचीन।।

 मेरा प्रिय वतन ईश्वर द्वारा रक्षित वतन।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।

இனி ஒரு விதி செய்வோம்.

 வணக்கம்.கவிஞர்கள் கலைக்கூடம்.

இனி ஒரு விதி செய்வோம்.

இன்னல் இல்லா இன்பமாக வாழ

 இருண்ட வாழ்வில் ஒளி பெருக

உளவில் சிறந்த தமிழ் நாட்டை

மீண்டும் நெற்களஞ்சியம் மாக்க

இனி ஒரு விதி செய்வோம்.

 மணல் கொள்ளை ஏரி நிரப்பல்

தடைசெய்ய நீர் வளம் பெருக்க

 இனி ஒரு விதி செய்வோம்.

மாசற்ற  சுற்றுப் புற சூழல்  செழிக்க

இனி ஒரு விதி செய்வோம்.

பசுமைபாரதம் பார்த்து பரவசமாக

இனி ஒரு விதி செய்வோம் வந்த

Saturday, June 26, 2021

सँवरो आज

 नमस्ते। वणक्कम।

 साहित्य बोध हरियाणा इकाई।

27-6-2021.

विषय --संँवरे आज।

 विधा -मौलिक विधा , मौलिक रचना।

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कहा गया है

भूत चला गया।

भविष्य का पता नहीं।

 वर्तमान पर ध्यान दो।।

 भविष्य होगा उज्ज्वल।।

अर्थात सोचो,समझो,

 अब भी समय है संभालो।

 सुविचार कर अभी सँवरो,

 सर्वेश्वर प्रार्थना पाँच मिनट।

 कर्तव्य सही निभाओ।

 कल कल स्थगित करना,

 लक्ष्मी की बड़ी बहन बुलाना।

 जवानी में ताकत है,

 बुद्धि बल है,

 नहीं सँवारोगे,तो

पछताओगे।।

वाणी का डिक्टेटर,

 कबीर ने हजारों साल पहले 

"आज करै तो अब, कल करै तो आज,

 पल में प्रलय,पछताने से लाभ नहीं।।

 माया महा ठगनी ,बचने चाहिए जितेंद्रियता।।

  बूँद बूंद से सागर ,

पल पल में  उम्र।

 आछे दिन पाछे गये,अब हरी से क्या होत।।

 आज ताज़ा न सँवारो कल वह बासी।।

  आज का पाठ आज।

 आज का काम आज।

कल कल  स्थगित करना,

खल का सामना करना।।

गल जाएगा जीवन,

सोचो, विचारों,जागो,

आज ताज़ा बल है,

  सँवरो आज,

 तन, मन, धन  अपने आप स्वस्थ।।

 सबहिं नचावत राम गोसाईं।

 सँवरो आज, आजीवन सुखी रहो।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।

Wednesday, June 23, 2021

विश्वास

 नमस्ते वणक्कम।

परिवार दल।

  निज शैली। निज रचना। 

मौलिक विधा।


 विश्वास।

 23-6-2021.


विश्वास न तो जीना  कैसे?

 आशा निराशा में बदलें तो

  हतोत्साहित हो जाते मनुष्य।।

 नौकरी की आशा में शिक्षा।।

 पत्नी पर विश्वास दांपत्य जीवन।।

 पति पर विश्वास पत्नी का।।

  सैनिक पर विश्वास देश की सुरक्षा।।

 खेद आजकल कोराना,

 केवल एक मात्र विश्वास भगवान पर।।

 सबहिं नचावत राम गोसाईं।।

Saturday, June 19, 2021

पलपल

 नमस्ते वणक्कम।

पल पल का बरबाद ,

 प्रगति बंद जान।

बूंद बूंद में सागर बनता।

 पल पल उम्र।

 समुद्र तो भाप बनता।

समय बीतते बीतते,

 बुढ़ापा लाता।

 तब पछताने से लाभ नहीं,

पल पल में प्रलय संभावना।।

पल पल का सार्थक जीवन

परमात्मा का प्रीति उपार्जन।

परमात्मा का प्रीति उपार्जन

आजीवन परमानंद  लक्षण।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस. अनंतकृष्णन

बुढ़ापा परिचर्चा।

 19 6 2021 के लिए 18मिनट।

नमस्ते वणक्कम।।

समतावादी कलमकार साहित्य शोध संस्थान भारत।

बिखरता परिवार सिमटता प्यार।

 विधा

निज शैली निज रचना।

मौलिक रचना मौलिक विधा।

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बिखरता परिवार क्यों?

रामायण काल से शुरू।

 गहराई से सोचिए,

 कैकेई ,मंथरा का षड़यंत्र

 राम और सीता का वनवास।।

 परिवार बिखरा। दशरथ का तड़प।

 सीता का भूमि में से मिलना।

 परिवार का बिखेर ना।

ईसा मसीह के पिता नहीं।

 परिवार बिखरा ।

 लव‌ कुश को पता नहीं,

 उनके पिता कौन?

 कबीर के पिता कौन?

 कर्ण अपमानित क्यों?

विदुर का अवहेलना क्यों?

   प्रह्लाद का तड़प, ध्रुव की तपस्या।

 शकुंतला की वेदना।

मुगलों की तलाक नीति।

 पाश्चात्य देशों में

  बच्चे के रहते माँ के नये पति।

 पिता की  नयी पत्नी।

  बिखरता परिवार।।

 सिमटता प्यार।

  एक जमाना था,

 अपने गाँव न छोड़,शहर छोड़ना

समुद्र लांघना बड़ा पाप।।

  स्नातक कोई नहीं।

 आजकल  स्नातक स्नातकोत्तर अधिक।।

गाँव छोड़कर नौकरी के लिए

 शहर जाना /विदेश जाना प्रशंसनीय।

 बचपन से ही 

अमेरिका में 

बसने का सपना।


 स्वदेशे पूजयते राजा , 

विद्वान सर्वत्र पूज्यते।

 शिक्षितों में अंतर्राष्ट्रीय 

अंतर्जातीय विवाह।।

 हम दो, हमारे दो नारा।

बूढ़ों को अपने गाँव 

तजने की इच्छा नहीं

 जवानों को अपने गाँव में

 रहने की इच्छा नहीं

बस बिखरता परिवार,

सिमटता प्यार।।

स्वरचित स्वचिंतक

एस-अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु।।

Thursday, June 17, 2021

विवाह एक पवित्र रिश्ता

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य बोध जम्मू कश्मीर इकाई।

विषय 

विवाह एक पवित्र रिश्ता

विधा निज रचना निज शैली।

मौलिक रचना मौलिक विधा।

सही है न।

१८-६-२०२१

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विवाह एक पवित्र रिश्ता,

 अतः राजाओं ने राजकुमारी  अपहरण के लिए लड़ाई की।

 हजारों वीर सैनिक  रण में

 काम आए। वीरों की पत्नियाँ विधवा बनी। पुत्र अनाथ।

राजा ने तो 

विजयोल्लास मनाया।

 विवाह एक पवित्र रिश्ता।

नपुंसक विचित्र वीर्य को

जबर्दस्त  अपहरित  तीन राजकुमारियाँ ,हाँ,

 विवाह एक पवित्र रिश्ता है।

प्रेम विवाह,गंधर्व विवाह,

 अंतर्राष्ट्रीय अंतर्जातीय विवाह।

  यूनानी भारतीय विवाह,

 इटाली भारतीय विवाह।

 विवाह एक पवित्र रिश्ता।

 तमिलनाडु की चुनावी ऐलान

 अंतर्जातीय विवाह के लिए

 साठ हजार, मंगल सूत्र इनाम।

विवाह एक पवित्र रिश्ता।।

आजकल अदालत में

तलाक मुकद्दमाएँ बढ रही है।

 चित्र पट में प्रेम विवाह की प्रेरणा।

  विवाह एक पवित्र बंधन,

 उनके लिए जो भाग्यवान हो।।

  दहेज प्रथा है, विवाह कैसे पवित्र रिश्ता।।

अमीर राजा हो तो

तीन शादियाँ

अलावा रखैल।

 हाँ, सचमुच विवाह एक पवित्र रिश्ता,कुंती देवी के लिए नहीं,

 सीता के लिए नहीं,

 द्रौपदी के लिए नहीं।

 नलायनी के लिए।।

शकुंतला दुष्यंत  जैसे

 कितने भूल जाते।

 कितने कबीर की मां जैसे

 तालाब के किनारे फेंक जाते।

 खूनों की मिलावट।

 बाल विवाह 

हाँ, भगवान की कृपा प्राप्त

 मध्यवर्ग के लिए,

 विवाह एक पवित्र रिश्ता।।

न इंदिरा  खान गांधी के लिए।

अभिनेता अभिनेत्री के विवाह में कितना तलाक।

 सबहिं नचावत राम गोसाईं।।

 यकीनन मानिए,

 अर्वा चीन काल में

 गरीब और   मध्यम वर्ग में

 विवाह पवित्र रिश्ता, 

उसमें भी विवशता।।

भाग्य वानों  के लिए ही

विधा एक पवित्र रिश्ता।।

आजकल शाहजहां बढ़ गये हैं।

दैनिक खबरों से पता चलता हैं।

कविता लिखना मिथ्या है,

विधा एक पवित्र रिश्ता है।

 है,जब संयम  और त्याग मय हो।

दशरथ चक्रवर्ती के विवाह बंधन। भीष्म प्रतिज्ञा।।

चित्र पट कथाएँ,

नहीं बताते

सिद्धार्थ कथा 

नहीं बताते

विवाह एक पवित्र बंधन।

लक्ष्मण उर्मिला ।

मैथिली शरण गुप्त जानते

विरह  प्रलाप।

 राम कहानी सुनाना ही शादी।।

 स्वरचित स्वचिंतक

 एस .अनंतकृष्णन ,चेन्नै।।

प्रकृति के उपहार

 नमस्ते वणक्कम।

नव साहित्य परिवार

१७-६-२०२१.

विषय: प्रकृति के उपहार।

 विधा :

निज रचना निज शैली।

मौलिक रचना मौलिक विधा

 यही माँग सही माँग।

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 प्रकृति की श्रृंगार 

भावना बग़ैर,

  चाहे वनस्पति जगत हो,

 या पशु-पक्षी जगत हो

  सृष्टियाँ हैं असंभव।।

 नर- नारी सहज आकर्षण

  माया महा ठगनी।

न तो सृष्टियाँ है ही नहीं।

रंग-बिरंगी तिलियाँ,

 रंग-बिरंगे फूल न तो

 मकरंद मिलनानंद नहीं।।

विविध प्रकार के चावल दाल,

 विभिन्न औषधियों के पेड़ पौधे

एंटी बूटियाँ मानव तन को 

 स्वास्थ्य प्रद,मन को आनंदप्रद।।

 विभिन्न पक्षियों के मधुर स्वर।

 मधु मक्खियों का शहद।।

 खट्टे मिट्ठे विविध फल।

 नदी जल, झील जल, जलप्रपात। गर्म फँवारे।

 लहरों वाले खारे पानी का सागर।

 समुद्र का पानी भाप बनना।

 छे ऋतुओं के चक्कर।।

काले बादल, वर्षा।

 बर्फ की वर्षा।

 कदम कदम पर आनंद।।

प्रकृति का उपहार।।

 मेहनत करने सूर्योदय,

 विश्राम के लिए चंद्रोदय।।

 विभिन्न प्रतिभावाले मनुष्य।।

 गुरु, वैज्ञानिक,वैद्य, अभियंता

 अभिनेता, अभिनैत्री,खल नायक विदूषक ईश्वर की अद्भुत देन।

  बाज का ऊंचा उड़ान।

 गौरैया निम्न उड़ान।

 बंता का अति सुन्दर नीड़।

 जुगुनू की चमक , रंग-बिरंगी मछलियाँ।

  कदम कदम पर प्रक‌ति का उपहार।

ईश्वरीय सृष्टियों की 

अद्भुत माया।

सबहिं नचावत राम गोसाईं।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

प्रकृति के उपहार

 नमस्ते वणक्कम।

नव साहित्य परिवार।

विषय

 प्रकृति के उपहार।

विधा

निज रचना निज शैली।

मौलिक रचना मौलिक विधा।

++++++++++

 प्रकृति के उपहार वर्णनातीत।

 साँस लेने हवा,

प्यास बुझाने पानी।

स्वस्थ तन के लिए 

 फूल, फल, तरकारियां।

 मनोरंजन के लिए

 जलप्रपात,झील,नदी,जंगल।

 ग्रीष्म वास ,कितना शांति प्रद।

  रंग-बिरंगी तिलियाँ,मछलियाँ,

रंग-बिरंगे फूल,

 भ्रमर का मंडराना,

मधु मक्खियों के परिश्रम,

 उनसे मिलते शहद।।

 रंग-बिरंगे पशु-पक्षी,

 सूर्योदय,चंद्रोदय,

 बिजली की चमक,

काले बादल का गर्जन,

समुद्र की लहरें ठंडी हवा।

 कदम कदम पर प्रकृति के उपहार।

सबहिं नचावत राम गोसाईं।

 स्वरचित स्वचिंतक

 एस. अनंतकृष्णन ,चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Wednesday, June 16, 2021

विनम्रता

 नमस्ते वणक्कम।

 विनम्रता ताकत है,

 सदा के लिए नहीं।

 बाढ में पेड़ जड़ मूल नष्ट।।

 घास तो बचता है।

 पर गायें घास चरती हैं।

घास जैसा मानव अपने शोषण सह नहीं सकता।।

पर विनम्रता वशीकरण का मंत्र।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

निज दोहा

 अनंत दोहा: 


चारों ओर के भ्रष्टाचारियों से फूलते- फलते मंत्री मंडल जनता चाहती  उन्हींको,  जिनसे अपना स्वार्थ सिद्ध हो।


  चुनाव  देखने  जनता  गई, कोई न निकला स्वच्छ।

 एक ही बात  देखी - समझी    काले धन ही अच्छे।


     चालीस प्रतिशत  न चाहते, चुनाव -प्रणाली,

      बाकी जो मत देने जाते,   मानते धन प्रणाली।।


मानते धन प्रणाली,  न सोचते भला बुरा।

नेता जो कहते  मानते वही,  न सोचते भला बुरा।


अच्छे बुरे की चिंता करें , बुरों को न दें मत।

 बुरों को देते मत तो  देश का नाम होगा बद।।

दृष्टि सृष्टि

 साहित्य संगम संस्थान हरियाणा  इकाई।

नमस्ते वणक्कम।

१७-६-२०२१.

 जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि।

निज रचना निज शैली।

मौलिक रचना मौलिक विधा

******************

ऋषि-मुनियों की अपूर्व शक्ति,

नज़र पड़ते ही सृष्टि।।

शीर्षक का अर्थ अति गूढ़।

 युधिष्ठिर की दृष्टि में

 सृष्टियों में सब लगे अच्छे।।

सुयोधन की दृष्टि में

 सब सृष्टियाँ बुरी लगीं।

शक्कर रोगी की  दृष्टि में

 शक्कर की सृष्टि अति खतरनाक।।

 जो मरने तैयार, उसके लिए

 समुद्र की गहराई घुटने तक।

गोताखोर की दृष्टि में

 सीपी लेने डुबकियाँ लगाना

 सीपी में मोती की सृष्टि , उसकी दृष्टि में अनुपम ।।

 स़ंपेरे की  दृष्टि में

 सांप की सृष्टि एक खिलौना।

अन्यों की दृष्टि में खतरनाक सृष्टि।

  बाघ की दृष्टि में हिरन की सृष्टि आहार के लिए।

 हिरण को बाघ की स।ष्टि खतरनाक।।

 स्वरचित स्वचिंतक 

एस. अनंतकृष्णन ,चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

நாடும் நட்பு



கலைக்கூட அமைப்பாளர்கள் கலைக்கூடம் உறுப்பின நண்பர்கள் அனைவருக்கும் வணக்கம்.***

*********"""


 நலம் நாடும் நட்பு.

 நாடென்பது நாடா வளத்தன.

 நட்பு எதிர்மாறாக

 நாடும் வளத்தன.

 உடுக்கை இழந்தவன்

 கை போல் இடுக்கண் களைவது நட்பு.

நாடும் உறவு.

 துர்யோதன் 

 நாடிய கர்ணன் நட்பு.

 தலைவர் 

கள் நாடும் 

தேர்தல் 

நேர நட்பு.

  நாடும் நட்பு 

  நாடிய நட்பு

   கிருஷ்ணன்   

சுதாமா நட்பு.

 கூடா நட்பும் உண்டு.

 நட்பு என்பது

 தன்னலம் இன்றி

 இன்னலில்

 உடன் இருப்பதே.

அதிர்ஷ்டம் உடையவர்களுக்கு

ஆண்டவன் அருளால் கிடைப்பது

 அரிய நட்பு.


சுய சிந்தனை யாளர் சுய படைப்பு

பழனி சே.அனந்தகிருஷ்ணன்.


 கணினி  சேர்ப்பது பிரிப்பது இணைப்பது கடினம்.

பயிற்சி இல்லை.

எழுதிய கவிதை நகல் எடுக்க வரவில்லை.

 மூன்று சொல் அடித்து நாலாவது சொல் கீழே.

மேலேற்ற தெரியவில்லை.

 தமிழும் படித்த தில்லை.

  நாடிய தமிழ் கை கொடுக்கவில்லை.

 தேசீய ஹிந்தி ஆசானாக்கியது.

தமிழ் ஆர்வத்தால்

 பிதற்றல் .

 நாடும் தமிழ் ஞானம்.

 நாடும் தமிழ் அறிஞர்கள் பற்று.

முயல்கிறேன் .

 என் கவிதை என் நடை

 என் எண்ணம் என் ஆர்வம்

 நாடும் நட்பு நாடும் தமிழ்.

 அவ்வளவே.




बिन बुलाए मेहमान

 नमस्ते वणक्कम।

बिन बुलाए मेहमान,

 अपने आप चावल में पैदा होते।

दाल में पैदा होते।

 मकड़ी दीवार पर।

काकरोच, उन्हें पकड़ने छिपकली छिपकली।

 खटमल मच्छर

 चूहें‌ कितने मेहमान।।

कभी कभी बिच्छू,

में ढक,साँप यह तो लंबी सूची।


 चैन से रहने,सोने नहीं देते।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन।

नयन।

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य संगम संस्थान राजस्थान इकाई।

विषय नयन।

  विधा

निज रचना निज शैली।

मौलिक रचना मौलिक शैली।

*******

कबीर का दोहा,

 नयनों की करी कोठरी।

 पलकों का पलंग, परिणाम

 ईश्वर आँखों में कैद।

 प्रेयसी/प्रेमिका आँखों में कैद।।

 ध्यान करने के पहले

 खुले नयनों से मूर्ति देखना।

 फिर नयन मूंदकर ध्यान।।

 नयन बताता देता,

 सत्य  है असत्य।

 अपराधी सीधे नयन 

बोल नहीं सकता।

  आँख ही पहचान मानव का।

 तिरछी नयन का अलग भाव।

 नयन मनोवैज्ञानिक,

 नयनों से  ही अपराधी का

पता लगाते हैं।

 आँखें लाल होना

 अत्यंत क्रोध/बदले की भावना।

 प्रेम मिलन आंखें चार होना।

 नयन भावों की अभिव्यक्ति।

करुणा पूर्ण नयन,

 आँसू भरा दुख भरा नयन।

 नयन न तो मानव जीवन शून्य।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

Tuesday, June 15, 2021

बादल में छिपा चाँद। மேகத்தில் மறைந்த நிலா.

ஹிந்தியும் நானே.

தமிழும் நானே.

हिंदी भी में, तमिल भी मैं।।

 नमस्ते वणक्कम।

 साहित्यकारों को समर्पण।

வணக்கம் . நமஸ்தே.

இலக்கியம் படைப்போருக்கு

சமர்ப்பணம்.


१५-६-२०२१.

 मैं अपना  वैराग्य तज  நான் எனது வைராக்கியம் விடுத்து

அந்த வைராக்கியம் பிரசவ,நாய்,மயான

வைராக்கியம் போல்

மேகத்தில் மறைந்த நிலவு போல்

என் எண்ணங்கள் வெளிப்பாடு

 மறைந்தே இருந்தன.

 இப்பொழுது தன் விருப்பம் என்ற

காற்று வீசி மேகத்தைக் கலைத்தது.

ஒவ்வொரு வரின் வாழ்க்கையிலும்

மேகம் மறைக்கும் நிலவு போல்

திறமை மறைந்தே இருக்கிறது.

அனுகூல காற்று வீசினால்

திறமை ஒளி பெறுகிறது,

பாடகி பிச்சை கண்காரி

திறமை வெளிப்பட்டது போல்.

பூமியில் புதைந்த சீதா தேவி

ஜனகரின் ஏர் முனைக் 

காற்றால் 

வெளிபட்டது.

 லஹர் குளக்கரையில்

வீசப்பட்ட கபீர்,

நல்லவர்கள் உபன்யாசக்

காற்றால்  ஒளிமயமானது.

ஆழ்கடல் சிப்பியில் ஒழிந்த

முத்து முத்து எடுப்போரின்

துணிச்சல் காற்றால் 

ஒளி முத்தென வையகம் 

அறிந்தது.

ஒவ்வொரு வரின் திறமையும் 

மேகத்தில் மறைந்த நிலவு போல்

அனுகூலமான காற்றில் 

 ஒளி காட்டி புகழ் பெறுகிறது.

ஆடுமேய்ப்பவன் கையில் சிக்கிய

கோஹினூர் வைரம் 

அரசன் பார்வைக் காற்றால்

வையகப் புகழ் பெற்றது.

சித்தார்த்தின் ஞான ஒளி

கடும் தவம் என்ற காற்றால்

உலகில் பிரகாசித்தது.

ஒளிர வேண்டும் அனுகூல காற்று.

அனைவரையும் ஆட்டிவைப்பவன்

 அந்த இறை அருள் காற்றே.

சே.அனந்தகிருஷ்ணன்

சுய சிந்தனை யாளர் சுய படைப்பு.

**************""**"******

वैराग्य जैसा भी हो 

 भले ही प्रसव हो,

 श्वान हो, श्मशान हो,

  चाँद छिपे बादल सा,

  मेरी अभिव्यक्ति छिप रही।

 अब न जाने स्वैच्छिक 

हवा बही, बादल हटे।।

 हर एक की जिंदगी में  बादल 

 छिपे  चाँद -सा कौशल।

 अनुकूल वातावरण में चमकता है जैसे

 गायिका भिखारिन का भाग्य चमका।

  भूमि में  छिपी सीता माता की चमक,

 जनक के हल हवा से चमकी।

 लहर तालाब में फेंका शिशु

 छिपा ज्ञान का चाँद

 सत्संग की हवा से चमका।

 सीपी में छिपा  मोती चाँद

गोताखोर की साहसी डुबकियों से  बाहर चमका।

 हर क्षमता 

बादल में छिपे

 चाँद -सा,

 अनुकूल  हवा में  चमकता जान।।

गडरिए के हाथ में मिला कोहिनूर,

 राजा की दृष्टि की हवा से

  खुलकर अगजग में चमका।।

 सिद्धार्थ में छिपे  ज्ञान का चाँद

 कठोर तपस्या  हवा से चमकी।

 चमकने चाहिए अनुकूल हवा।

सबहिं नचावत राम गोसाईं।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

चांद में छिपे बादल

 नमस्ते वणक्कम।

तमिलनाडु साहित्य संगम संस्थान इकाई।

१५-६-२०२१.

 मैं अपना  वैराग्य तज

 वैराग्य जैसा भी हो

 भले ही प्रसव हो,

 श्वान हो,प्रसव हो,

  चाँद छिपे बादल सा,

  मेरी अभिव्यक्ति छिप रही।

 अब न जाने स्वैच्छिक 

हवा बही, बादल हटे।।

 हर एक की जिंदगी में  बादल 

 छिपे  चाँद -सा कौशल।

 अनुकूल वातावरण में चमकता है जैसे

 गायिका भिखारिन का भाग्य चमका।

  भूमि में  छिपी सीता माता की चमक,

 जनक के हल हवा से चमकी।

 लहर तालाब में फेंका शिशु

 छिपा ज्ञान का चाँद

 सत्संग की हवा से चमका।

 सीपी में छिपा  मोती चाँद

गोताखोर की साहसी डुबकियों से  बाहर चमका।

 हर क्षमता 

बादल में छिपे

 चाँद -सा,

 अनुकूल  हवा में  चमकता जान।।

गडरिए के हाथ में मिला कोहिनूर,

 राजा की दृष्टि की हवा से

  खुलकर अगजग में चमका।।

 सिद्धार्थ में छिपे  ज्ञान का चाँद

 कठोर तपस्या  हवा से चमकी।

 चमकने चाहिए अनुकूल हवा।

सबहिं नचावत राम गोसाईं।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Monday, June 14, 2021

आस्तीन का साँप

 नमस्ते। वणक्कम।

साहि बोध, हरियाणा।

 प्रबंधक संचालक समन्वयक सदस्य पाठक प्रतिभागी आदि सबको प्रणाम।

 विषय आस्तीन का साँप

 विधा

निज शैली निज रचना।

मौलिक रचना तो मौलिक विधा ही मौलिकता लक्षण।

******"""""""**********".

आस्तीन का साँप का 

भंडा जल्दी फोड़ जाता है।

 एक तो ठगता है न तो

जब मूल नष्ट कर देता है।

 अफ़ज़ल ख़ान ने शिवाजी का

गले लगाया,

 वह तो आस्तीन का साँप।

शिवाजी चतुर, आलिंगन तो किया,

 पर उसके पहले,बघ नखे से

उसे ही चीर डाला।।

आस्तीन की साँप के खुलते ही

 हो जाता सर्वनाश।।

 चुनाव के समय आस्तीन के

 असंख्य साँप निकलते हैं,

 मधुर भाषी, दया सागर, परोपकारी, भ्रष्टाचार का कट्टर विरोधी।

 चुनाव के खत्म होते ही,

ये साँप कहीं बिल में ,

 अगले पाँच साल तक 

नौ दो ग्यारह बन जाते।।

 आधुनिक काल में,

 नाते,रिश्ते, दोस्तों-यारों मे भी

 आस्तीन के साँप असंख्य।

 वे ऐसे लगते,

ईमानदारी अवतारी।

 सतर्क रहना हमारी बारी।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Sunday, June 13, 2021

यादों की समुंदर में।

 शीर्षक पसंद है।

नमस्ते। वणक्कम।

निज रचना,निज शैली।

मौलिक रचना मौलिक विधा।

+++++++++++

 यादों की समुंदर में

यादगार आ ग

 मुहब्बत हमारी अमर हो गई।

 मन पसंद सुंदरी,

 भले ही दूसरी की पत्नी हो,

उसके पति को मारकर,

  उसे अपनी बेगम बनाकर

ताज महल बनवाने से

 मेरी मुहब्बत अमर हो गयी।

 पड़ोसी देश की राजकुमारी,

  अति सुन्दर, मैं तो राजा

 मेरी सेना के हजारों सिपाहियों की पत्नियों को 

 विधवा बनाकर,

उनके बच्चों को अनाथ बनाकर  

 मेरी मुहब्बत पद्मावती काव्य बन  अमर हो गई।

 मंत्री मेरे तीन पत्नियाँ,

 असंख्य रखैल मेरी मुहब्बत व

 रखैल की कहानियां अमर हो गई।

 शकुंतला की अंगूठी खोने से

 शाप के कारण भुलक्कड़ बन

  शाप विमोचन याद आना

 मेरी मुहब्बत अमर हो गई।।

 भले ही प्रेम एक पक्ष का हो,

बलात्कार अपनाने से

  धन पद अधिकार के बल

 मुहब्बत  अमर हो गई।।

 लैला मजनू दुखांत कथा अमर हो गई।

 बच्चे आदर्श प्रेम रंक है तो

 रंग हीन हो जाता।।

  किसी कवि ने लिखा,

काश! मैं भी शाहंशाह होता तो

 ताजमहल बनवाता।

 यह अमर महल गरीबों के

 आदर्श प्रेम की हँसी उडा रहाहै।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Friday, June 11, 2021

बाल मजदूरी

 नमस्ते। वणक्कम।

 बाल मजदूरी।

 धंधा सीख लो,

 निश्चिंत रहो।

  स्नातक बनकर

  ड्रेवर का काम करने से

  बचपन से पेशा ।

 आत्म निर्भर रहना,

  ग़लत नहीं,

 पर बालकों से

 निर्दयी व्यवहार 

सहा नहीं जाता।

 स्नातक बनकर पकौड़ा 

 बेचने से कोई न कोई पेशा

 बूट पालिश बालक करता तो

 उसका  अपमान असहनीय।।

    समानता का अधिकार है तो 

  अमीर गरीबी अलग अलग 

  पाठशाला क्यों ?

 फुटपाथ का होटल,

 फ़ैव स्टार होटल क्यों।

 बड़े बड़े शहरों में 

स्लम एरिया क्यों?

ग़रीबों की बस्ती क्यों?

  गोद में बच्चे भिखारिन ।

 उसको भीख देना पाप।

 शिशु चोरी का मार्ग।

   बाल मजदूरी 

सरकार कानून हैं ,तो

 ग़रीबों को बच्चा क्यों।

 चुनाव जीतने सौ करोड।

 गणेश विसर्जन सौ करोड़।

 व्यर्थ है बाल मजदूरी पर

 कविता का मगरमच्छ आँसू।

 तीस हजार गणेश मूर्ति,

 विसर्जन के नाम ईश्वर का अपमान।

 हर साल करोड़ों रुपए।।

 बाल मजदूरी कम करना तो

  दिल से कदम उठाना है।

 तीन सौ करोड़ की मूर्तियाँ।

 करोड़ों के मंदिर।

 बाल मजदूरी की कविता व्यर्थ।

 बाल मजदूरी 

 बाल काटने सौ रुपए।

 हजामत अस्सी रुपए।

   भारत संपन्न देश।

 हर साल विसर्जन के

 करोड़ों रुपए।

 फुटपाथ के लोग चाहिए

 चुनाव की बदमाशी के लिए।

  सांसद बनने करोड़ों रुपए।

 विधायक बनने करोड़ों रुपए।

 क्या वह पचास लाख 

बाल मजदूरी दूर करने देगा तो

 524X500000

विनायक विसर्जन

 30000 रुपये एक मूर्ति!


1000मूर्तियाँ।

30000X1000

बाल मजदूरी दूर करने न देंगे।

मंच पर जोरदार भाषण। बेकार।

 कविता लिखना बेकार।

 अपना अपना भाग्य।

  कफ़न के रूप में

   सफेद बरफ़ 

 नंगे बालक पर

 प्रकृति की देन।।

 यही वास्तविकता जान।

अपना अपना भाग्य।

 स्वरचित स्वचिंतक 

एस अनंतकृष्णन चेन्नै

Thursday, June 10, 2021

वृक्ष மரம்

 नमस्ते वणक्कम।नमस्ते वणक्कम।

वृक्ष।

विधा मौलिक रचना मौलिक विधा निज रचना निज शैली।

9-6-2021.

वनस्पति जगत 

वन देवता,

ईश्वर की अनुपम सृष्टि।

 नाटे वृक्ष, लंबे वृक्ष,

 भारतीय वृक्ष 

 स्वास्थ्य प्रद।

 भोजन प्रद।।

भारतीय भूमि 

समृद्धि संपन्न।।

चंदन वृक्ष सर्वगुण संपन्न ।

आम,कटहल,केला।

इमली, नींबू ।

कीट नाशक नीम।

 अमेरिका गया नालायक

 पेड़ की झाड़ियाँ।

 हमारे देश की भूमि में

 वटवृक्ष ,बोध वृक्ष समान।।

 वृक्ष लगाने से

 धन लाभ।।

 स्वास्थ्य लाभ

 वृक्ष लगाने से

जंगल  बढ़ाने से

 प्राकृतिक संतुलन।।

  मिट्टी घिसने की सुरक्षा।

 भूमि जल पानी की सुरक्षा।

 प्रदूषण से बचने की व्यवस्था।

 युवकों! आपके हाथ में

 देश का भविष्य।

 पेड़ लगाइए, बेकारी दूर कीजिए।।

तरकारी उगाना लाभ प्रद।

 स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।

वृक्ष। மரம்

विधा मौलिक रचना मौलिक विधा निज रचना निज शैली।

9-6-2021.

वनस्पति जगत தாவர உலகம். 

वन देवता, வன் தேவதை.

ईश्वर की अनुपम सृष्टि।

கடவுளின் ஒப்பில்லா படைப்பு.

 नाटे वृक्ष, लंबे वृक्ष,

குட்டையான மரம்.

நெட்டையான மரம்

 भारतीय वृक्ष  பாரத மரங்கள்

 स्वास्थ्य प्रद। ஆரோக்கியம் தருபவை

 भोजन प्रद।। உணவு தருபவை.

भारतीय भूमि  பாரத பூமி

समृद्धि संपन्न।। செழிப்பான பூமி

चंदन वृक्ष  சந்தனமரம்

सर्वगुण संपन्न ।  அனைத்து கணங்களும்

கொண்டவை.

आम,कटहल,केला। மா,பலா,வாழை

इमली, नींबू । புளி, எலுமிச்சை ஆரோக்கியம் தருபவை.

कीट नाशक नीम। கிருமிநாசினி வேம்பு.

 अमेरिका गया नालायक அமேரிக்காவில்

உபயோகமற்ற மரங்கள்.

 पेड़ की झाड़ियाँ। மரப்புதர்கள்

 हमारे देश की भूमि में நமது நாட்டு பூமியில்

 वटवृक्ष ,बोध वृक्ष ज्ञान प्रद। 

ஆலமரம் அரசமரம் 

ஞானம் தருபவை.

 वृक्ष लगाने से மரம் நடுவதால்

 धन लाभ।।  பணம் பயன்.

 स्वास्थ्य लाभ ஆரோக்கிய லாபம்.

 वृक्ष लगाने से மரம் நடுவாதல்

जंगल  बढ़ाने से காடு வளர்ப்பதால்

 प्राकृतिक संतुलन।। இயற்கை சமநிலை.

  मिट्टी घिसने की सुरक्षा। 

மண் அரிப்பு பாதுகாப்பு

 भूमि तल जल पानी की सुरक्षा।

நிலத்தடி நீர் பாதுகாப்பு.

 प्रदूषण से बचने की व्यवस्था।

மாசுவில் இருந்து தப்பிக்க ஏற்பாடு.

 युवकों! आपके हाथ मेंं

இளைஞர்களே! உங்கள் கரங்களால்

 देश का भविष्य  நாட்டின் எதிர்காலத்திற்காக

 पेड़ लगाइए,  மரம் நடுங்கள்.

बेकारी दूर कीजिए।। வேலை இல்லா திண்டாட்டம் போக்குங்கள்.

तरकारी उगाना लाभ प्रद।

காய்கறி வளர்ப்பது பயன் தருவது.

சுயபடைப்பு சுய சிந்தனை யாளர்

பழனி சே.அனந்தகிருஷ்ணன்.சென்னை 

 स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।

அன்பு வெறுப்பு.प्यार नफ़रत

 नमस्ते वणक्कम। நமஸ்தே வணக்கம்.

  मेरी माँगी  என் வேண்டுகோளை ஏற்றீர்.

  माँग मानी।

तदनर्थ धन्यवाद। 

அதனால் நன்றி.

 जन्नत भी जहां, 

சுவர்க்கமும்  உலகம்

जहन्नुम भी जहा.

நரகமும் உலகம்.

 छोटा सा சிறிய

अभी बना आम இப்பொழுதான் வந்த

மாவடு 

கசப்பு.

कडुआ।।

कच्चा आम खट्टा। 

மாங்காய் புளிப்பு.

पका आम मीठा।

 மாங்கனி இனிப்பு.

 नन्हा मेहमान 

சிறிய விருந்தாளி(குழந்தை)

 अति प्यारा।

அதிகம் அன்பானது.

அதிகம் அன்பானவர் 

जवानी में कम।

 இளைஞன் குறைந்த அன்பு.

 बुढ़ापे में तिरस्कृत।।

முதுமை வெறுப்பு

 फल और मनुष्य में

பழத்திற்கும்

மனிதனுக்கும்

बड़ा फर्क

பெரிய வேறுபாடு.

पका आम अति प्यारा 

பழுத்த பழம் மிக அன்பானது.

पका बालवाला/

बाल वाली 

நரைத்தமுடியுடையவன்/முடியுடவையவள்


अति घृणित।।

மிகவும் வெறுக்கத் கூடியவர்கள்.

 बूढ़ी गाय  கிழட்டுப் பசு

कसाई का जीवन।

கசாப்புக்காரன் ஜீவனம்.

 बूढ़ा मनुष्य तो

नालायक।

கிழட்டு மனிதனோ

தகுதியற்ற வன்

जन्नत और जहन्नुम।

சுவர்க்க மும் நரகமும்

 அதிர்ஷ்ட மும் முயற்சி மும் இங்கு தான்.

तकदीर और तदबीर यही।

सबहिं नचावत राम गोसाईं।।

அனைவரையும் ஆட்டிவைப்பவன்

ஆண் டவர்.

स्वरचित स्वचिंतक  

சுய படைப்பு சுய சிந்தனை யாளர்

एस . अनंतकृष्णन।चेन्नै।

 பழனிசே. அனந்த கிருஷ்ணன்,சென்னை.

தமிழ் வயலும் வாழ்வும்

 வணக்கம். 

  எனது சொந்த படைப்பு.

    முதல் படைப்பு.

கவிஞர்கள்

 கலைக்கூடத் தில் 

இணைந்த நாள்.


கவிஞானா ? நானா?

ஏன்? கூடாது.

முயற்சி திருவினையாக்கும்.

முயல்கிறேன்.


    10-6-2021.


வயலும் வாழ்வும்

 வையகத்தில் 

   நாகரீக வளர்ச்சியின் 

முதல் மைல் கல்.

 ஓடி ஓடி 

வேட்டை யாடி

 அநாகரீக

 ஆதங்கமான 

 வாழ்கைக்கு 

 முற்றுப்புள்ளி.

  தங்கச்சுரங்கம்

  தரணியின்

 வெளிப்பகட்டு.

 எதைத் தொட்டாலும் 

 தங்கம் 

வரம் பெற்று

  வயல் தந்த உணவு 

 தொட்டு  அன்பு மகளைத் தொட்டு அனைத்தும் தங்கம்.

 பசியோடு

 வாடிய 

கதை 

 வயலும் வாழ்வும்

 பின்னிப் பிணைந்த

கதை.

 பசி வந்திடப்

 பத்தும் பறந்து விடும்.

 பசி போக்க

 மம்மர் அறுக்கும் மருந்து.

வயலும் வாழ்வும்.

 வள்ளுவர் 

 கூறிய வயலும் வாழ்வு

 எந்தத் தொழில் செய்தாலும்

 உழவே தலை.

 வயலும் வாழ்வும் 

 நான் கண்ட 

இளமைப் பசுமை.

  இன்று காண்பது

  கட்டிட வரிசை.

 எதிர் கால 

சந்ததிகள் 

 பாலைவன நாட்டில்

பசியால் துடிப்பார்களே.

 வயலும் வாழ்வும் நிறைந்த

 சிற்றூர் வாழ்க்கை

 பட்டிணமாக்கல்

 பட்டிண விரிவாக்கம்

  பாலை வனமாக்குமோ

 என்றோர் அச்சம்.

 ஏரிகளில்

 அடுக்கு மாடி

 குடியிருப்பு கள்.

 அடுக்குமா?

 வயலும் வாழ்வு

 மீண்டும் 

உயிர் பெற

 எதிர் காலத்தில்

 நெற்களஞ்சியம்

 தஞ்சை தழைத்திட

 வயலும் வாழ்வும்

 புரட்சி அவசியம்.

  வைரம் 

வையகப் பசி 

போக்காது.

வயலும் வாழ்வும்

 ஆரோக்கிய மளிக்கும்.

 பசி பக்திக்கு இடையூறு.

 புத்தரின் அனுபவம்.


ஆக்கியோன்


 பழனி சே. அனந்த கிருஷ்ணன்.

ஹிந்தி ஆசிரியர் சென்னை.

सुख दुख

 नमस्ते वणक्कम।

परिवार दल।

Family group.

आपके शीर्षक अंग्रेज़ी।

 अनुवाद कर लिखने में

 आप के मन में सुख या दुख ।

या क्रोध।

 यही सुख दुख का मूल।

 ईश्वर वंदना में कितने भेद।

 मायके की पद्धति,

 ससुराल की पद्धति

  सहन शक्ति न तो दुख।

 कभी कभी तलाक तक।

सुख दुख के मूल में

 लोभ का अपना स्थान।

 ईर्ष्या , अहंकार ।

 पाश्चात्य देशों से

 भारत में अधिक।

 भगवान शिव एक।

आश्रम अनेक।

 अपने अपने दल।

 मानव भेद,

मानव मानव में नफ़रत।

स्वार्थ मानव ईश्वर के नाम

 मानव मानव में फूट डालता।

न सोचता कि हवा 

हिंदु, मुस्लिम, ईसाई,सिक्ख ,बौद्ध 

 भेद नहीं देखती।।

साँस बंद,सबका निधन।

 मज़हब भी मानव दुख का मूल।

स्वरचित स्वचिंतक 

एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।

तमिल नाडु।

काली ,गणपति 

विसर्जन ईश्वर का अपमान।

 हिंदु करता ईश्वर का टुकड़ा टुकड़ा ।

 अतः हिंदु बहुसंख्यक दुखी

 पर अल्पसंख्यक  सुखी।।

 मंदिर के सामने

"भगवान" नहीं का शिला लेख।

वहीं मस्जिद या गिरिजा घर के 

 सामने रखने की हिम्मत नहीं।

  ईश्वर की निंदा अपमान ही

   सुख दुख का मूल।

Wednesday, June 9, 2021

को विभक्ति तमिल अर्थ ऐ

 को = ऐ।

 राम को बुलाओ।

 राम नैक्‌कूप्पिडु।

 भाई को बुलाओ।

सहोदरनैक् कूप्पिडु।

बहन को बुलाओ।

 सहोदरियैक् कूप्पिडु।

 नौकर को बुलाओ।

 वेलैक्कारनैक् कूप्पिडु।

 कुत्ते को बुलाओ।

नायैक् कूप्पिडु।

Tuesday, June 8, 2021

आंतरिक सुंदरता

 नमस्ते वणक्कम।

हिंद देश परिवार जम्मू कश्मीर इकाई।

आंतरिक सुंदरता।

८-६-२९२१.

मौलिक रचना मौलिक विधा।

 निज रचना निज शैली।

   ***"""""""""""''''''******

 कटहल देखिए,

 बाहर असुंदर,

 अंदर स्वादिष्ट फल।

 अभिनेता सत्तर साल का,

 बनाव श्रृंगार में जवान।

  रंडियाँ भी मेक अप।

  बाहर और अंदर सुंदर 

 सेब,आम और केला।।

 अनन्नास कांटेदार,

 अंदर फल।।

 बाह्य रूप नकली।

 अंदर असली।।

 भगवान भी पत्थर का,

बनाव श्रृंगार पुजारी के हाथ।।

 ईश्वर तो बाह्य वेश भूषा न देखता।

 अंतर्मन की पवित्रता देखता।।

  स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

 

Monday, June 7, 2021

जीवन

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य संगम संस्थान राजस्थान।

7-6-2021

विषय --जीवन

 विधा  मौलिक रचना मौलिक विधा।


जन्म -मरण के बीच की जिंदगी है जीवन।

 धनी भी आनंद ,

  गरीब भी आनंद।

   अघोरी भी आनंद।

   भिखारी भी आनंद।।

    सभी के जीवन 

    अपने     अपने 

     दायरे में आनंद।।

     कभी कभी मैं देखता हूँ,

     रईस  की तुलना में,

     रंक का जीवन 

अति  आनंद।।

  मच्छरों के बीच मधुर नींद।

  पियक्कड़ का जीवन,

 मक्खियाँ भिन भिनाती।

 मध्य नींद है उसका।।

 रोज़ खून का निदान।

शक्कर बढ़ता-घटता।।

 तनाव ही तनाव 

अमीरी जीवन।

 धन की रक्षा,पद की तरक्की।।

  भगवान जितना देता,

   उतना ही आनंद।।

 जीवन जीने प्रयत्न।

  मृत्यु आ जाती अपने आप।

  जीवनानंद 

जीवन अंत बराबर।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Sunday, June 6, 2021

मुहब्बत हमारी अमर हो गई।

 शीर्षक पसंद है।

नमस्ते। वणक्कम।

निज रचना,निज शैली।

मौलिक रचना मौलिक विधा।

+++++++++++

 मुहब्बत हमारी अमर हो गई।

 मन पसंद सुंदरी,

 भले ही दूसरी की पत्नी हो,

उसके पति को मारकर,

  उसे अपनी बेगम बनाकर

ताज महल बनवाने से

 मेरी मुहब्बत अमर हो गयी।

 पड़ोसी देश की राजकुमारी,

  अति सुन्दर, मैं तो राजा

 मेरी सेना के हजारों सिपाहियों की पत्नियों को 

 विधवा बनाकर,

उनके बच्चों को अनाथ बनाकर  

 मेरी मुहब्बत पद्मावती काव्य बन  अमर हो गई।

 मंत्री मेरे तीन पत्नियाँ,

 असंख्य रखैल मेरी मुहब्बत व

 रखैल की कहानियां अमर हो गई।

 शकुंतला की अंगूठी खोने से

 शाप के कारण भुलक्कड़ बन

  शाप विमोचन याद आना

 मेरी मुहब्बत अमर हो गई।।

 भले ही प्रेम एक पक्ष का हो,

बलात्कार अपनाने से

  धन पद अधिकार के बल

 मुहब्बत  अमर हो गई।।

 लैला मजनू दुखांत कथा अमर हो गई।

 बच्चे आदर्श प्रेम रंक है तो

 रंग हीन हो जाता।।

  किसी कवि ने लिखा,

काश! मैं भी शाहंशाह होता तो

 ताजमहल बनवाता।

 यह अमर महल गरीबों के

 आदर्श प्रेम की हँसी उडा रहाहै।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

जल है तो कल है

 समतावादी कलमकार शोध संस्थान,भारत

नमस्ते वणक्कम।

7-6-2021.

मौलिक रचना मौलिक विधा।

निज रचना निज शैली।

++++++++++

जल है तो कल है।।

  जलन  सूरज का न तो

  भाप नहीं, वर्षा नहीं।

  वनस्पति नहीं,

जीना मुश्किल।

  जलहीन मानव ,

  वनस्पति,पशु पक्षी,

  सूख जाते हैं,

प्राण पखेरु उड़ाते हैं।

 कल न चलेगा,

 जल विद्युत असंभव।

 कारखाना भी बस,

 चलेगा नहीं।

 रूखी सूखी भूमि है बंजर।।

 जल है तो कल है।।

 शरीर गर्म है तो जिंदा,

 ठंडा है तो शव।

जल है तो कल है।

स्वरचित स्वचिंतक

 एस. अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Friday, June 4, 2021

पर्यावरण

 नमस्ते वणक्कम।

हिंद देश परिवार दिल्ली।

विषय: पर्यावरण दिवस।

 तिथि : ४-६-२०२१.

---------------------------

   मानव के शारीरिक अंगों में,

    एक अंग अपाहिज हो तो

    दुख होगा ही।

    आँखें अंधा होने पर 

    बड़ा मुश्किल होगा।

    वैसे ही पंचतत्वों ,

   नीर, अग्नी, वायु,भूमि,आकाश में

संतुलन बिगड़ेगा तो

 भूमि में प्रदूषण बढ़ेगा ही।

 कारखाने,राकेट, कार,बैंक

 आदि के कारण  वायु

प्रदूषण बढ़ेगा  ही।।

 रेतों की चोरी,

 बदबू पानी को 

नदी में  बहाना,

 झील में छोड़ना,

 बड़ी बड़ी इमारतें,

 जहाँ एक घर था,

 वहाँ सैकड़ों घर,

 भूमितल पानी को खींचना।

 कारखाने,चमड़े के कारखाने

 आदि का गंदे पानी,

आदि पंचतत्वों का संतुलन बिगाड़ देता जान।।

 इन प्राकृतिक प्रदूषण से

 अति खतरनाक 

विचारों में

 प्रदूषण।।

 अध्यापक आज गुरु का नाम खोकर पेशेवर बन गये।।

भक्ति क्षेत्र में मंदिर वाणिज्य क्षेत्र बन गया।।

 सरकारी दफ्तर रिश्वत केंद्र बन गये।

 सौ करोड़ रुपये में बनते सांसद विधायक।।

   मतदाता वोट के लिए

    पैसे लेते।

 विचार प्रदूषण में

 गर्भपात ब्रह्म हत्या पाप।

 परिणाम स्वरूप,

 कृत्रिम गर्भाधान केंद्र,

 शुक्ल बैंक,

 निस्संतान दंपति।

 भावी भारत मरुभूमि।

 बंजर भूमि।

 माता पिता का पाप 

बच्चों के लिए।

 वैसे ही शासक, अधिकारी

 रेत चोरी,नगरविस्तार,

खेतों में कारखाना,

 भावी पीढ़ी दुख भोगेगा जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

वचन की दरिद्रता

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य बोध ।

 विषय  वचन की दरिद्रता।

 विधा

मौलिक रचना मौलिक विधा

___________

१-६-२०२१

--------------+++-

 भगवान ने जीने

मुफ्त में पंचतत्व

पानी,हवा, अग्नि,भूमि आकाश की

 सृष्टियाँ की हैं।

प्राणी जगत को और वनस्पति 

जगत केलिए  एक समान ।।

 इनमें भेदभाव नहीं,

 सब के लिए बराबर।।

 मानव को ज्ञान दिया।

 ज्ञानाभिव्यक्ति करने

 भिन्न भाषाएँ ,भिन्न‌ लिपी।

 ऐसा क्यों पता नहीं।

   इंकित भाषा से बोली।

 शब्द । 

अजब की बात है,

 मातृभाषा बोलने,

जहाँ रहते हैं,वहाँ की भाषा बोलने  

एक शिक्षक की जरूरत नहीं, 

अपने आप ही आ जाता है।

 दक्षिण भारत से उत्तर भारत में 

रहनेवाले हिंदी सरलता से ही बोलते।

वैसे ही तमिल नाडु आते 

कर्मचारी तमिल बोलते।

अमेरिका में मेरा पोता 

 मातृभाषा और अंग्रेज़ी ध

ड़ाधड़ बोलता जान।।

  तब मधुर बोली बोलने में कंजूसी क्यों?

 भगवान सुखी रखें।

 आशीष में है आनंद।

 भगवान सर्वनाश करें

 शाप का उल्टा परिणाम।

 विश्वामित्र का तपोबल घट जाता।

एक माँ बोलती ---

 मेरे प्यारे बेटे। 

तुम खूब पढ़ो,फूलों फलों।

 परिश्रम करो, 

भगवान पर विश्वास रखो।

सर्वसंपन्नवान बनो।


 दूसरी माँ बोलती 

 ऐसे

अपशकुन शब्द :

 हरे नालायक गधा।

 नपढोगे तो भीख लेना पड़ेगा।

 दरिद्र बनोगे।

 तथास्तु भगवान ऊपर।

 ऐसा ही हो 

कहने पर बस ।

बेटे के मन में तनाव।

 भगवान ने मुफ्त में

 शब्दभंडार दिया है।

 कंजूसी क्यों।

 बुद्ध महावीर  ऋषि-मुनियों ने

 अपने उदार मधुर बोली से

 समाज को सुधारा है।

कठोर निर्दयी डाकू ,

क्रूर अत्याचारी शासक

उदार  दानी बने हैं।

 बोली में दरिद्रता नहीं,

 बोली में उदारता,

मधुर आशीष वचन

 आसपास के वातावरण में ही नहीं,

अड़ोस पड़ोस को भी

सुखी और दोस्ती बढ़ाने में समर्थ।।

  कठोर वचन से 

आत्मसंतोष खो देते।

 मधुर वचन में 

आत्मसंतोष

आत्मानंद।

 शुभ शब्दों में उदारता,

अशुभ शब्दों में कंजूसी।

 वहीं जीवनानंद जान।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

रिश्तों का क्षरण

 नमस्ते वणक्कम।

रिश्तों का क्षरण।

 कहानी।

  आज  मेरे चाचा और मेरे पिता से झगड़ा शुरू हो गया।।

 घर के पीछे बड़ा इमली का पेड़। 

सत्तर साल पुराना।

  पर्व पर अधिक फल लगते।

  मेरे चाचा,बुआ,  ,काका,और सदस्य । सबको फल बाँटने पर एक साल तक रसोई का काम आता।

मेरे दादा की मृत्यु के बाद घर के बँटवारे का महायुद्ध चलता था, परिणाम स्वरूप घर बँट ग्रे पाँच टुकड़ों में। अब इमली के फल बाँटने में महाभारत।

 वह पेड़ चाचा के भाग में था।

 पिताजी काटने न देते।

चाचा घर के विस्तार के लिए कटवाना चाहते थे।

 पिताजी ने कहा दिया,

 पेड काटोगे तो मैं तेरा भाई नहीं,तुम  मेरे भाई नहीं हो।

 एक दूसरे का मुख नहीं देखेंगे।

 यह घटना होकर तीस साल हो गये। मेरा बेटा अमेरिका चला गया और चाचा का बेटा भी। हम तो तीस साल से एक दूसरे से न मिले।

  विदेश में तो मेरे  बेटे और चाचा के बेटे में गाड़ी मित्रता हो गई।

   यह रिश्तों के क्षरण  या परिधि या गोला     पता नहीं।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

प्रदूषण

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य बोध ।

 विषय  वचन की दरिद्रता।

 विधा

मौलिक रचना मौलिक विधा

___________

१-६-२०२१

--------------+++-

 भगवान ने जीने

मुफ्त में पंचतत्व

पानी,हवा, अग्नि,भूमि आकाश की

 सृष्टियाँ की हैं।

प्राणी जगत को और वनस्पति 

जगत केलिए  एक समान ।।

 इनमें भेदभाव नहीं,

 सब के लिए बराबर।।

 मानव को ज्ञान दिया।

 ज्ञानाभिव्यक्ति करने

 भिन्न भाषाएँ ,भिन्न‌ लिपी।

 ऐसा क्यों पता नहीं।

   इंकित भाषा से बोली।

 शब्द । 

अजब की बात है,

 मातृभाषा बोलने,

जहाँ रहते हैं,वहाँ की भाषा बोलने  

एक शिक्षक की जरूरत नहीं, 

अपने आप ही आ जाता है।

 दक्षिण भारत से उत्तर भारत में 

रहनेवाले हिंदी सरलता से ही बोलते।

वैसे ही तमिल नाडु आते 

कर्मचारी तमिल बोलते।

अमेरिका में मेरा पोता 

 मातृभाषा और अंग्रेज़ी ध

ड़ाधड़ बोलता जान।।

  तब मधुर बोली बोलने में कंजूसी क्यों?

 भगवान सुखी रखें।

 आशीष में है आनंद।

 भगवान सर्वनाश करें

 शाप का उल्टा परिणाम।

 विश्वामित्र का तपोबल घट जाता।

एक माँ बोलती ---

 मेरे प्यारे बेटे। 

तुम खूब पढ़ो,फूलों फलों।

 परिश्रम करो, 

भगवान पर विश्वास रखो।

सर्वसंपन्नवान बनो।


 दूसरी माँ बोलती 

 ऐसे

अपशकुन शब्द :

 हरे नालायक गधा।

 नपढोगे तो भीख लेना पड़ेगा।

 दरिद्र बनोगे।

 तथास्तु भगवान ऊपर।

 ऐसा ही हो 

कहने पर बस ।

बेटे के मन में तनाव।

 भगवान ने मुफ्त में

 शब्दभंडार दिया है।

 कंजूसी क्यों।

 बुद्ध महावीर  ऋषि-मुनियों ने

 अपने उदार मधुर बोली से

 समाज को सुधारा है।

कठोर निर्दयी डाकू ,

क्रूर अत्याचारी शासक

उदार  दानी बने हैं।

 बोली में दरिद्रता नहीं,

 बोली में उदारता,

मधुर आशीष वचन

 आसपास के वातावरण में ही नहीं,

अड़ोस पड़ोस को भी

सुखी और दोस्ती बढ़ाने में समर्थ।।

  कठोर वचन से 

आत्मसंतोष खो देते।

 मधुर वचन में 

आत्मसंतोष

आत्मानंद।

 शुभ शब्दों में उदारता,

अशुभ शब्दों में कंजूसी।

 वहीं जीवनानंद जान।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

पर्यावरण दिवस।

 नमस्ते वणक्कम।

हिंद देश परिवार दिल्ली।

विषय: पर्यावरण दिवस।

 तिथि : ४-६-२०२१.

---------------------------

   मानव के शारीरिक अंगों में,

    एक अंग अपाहिज हो तो

    दुख होगा ही।

    आँखें अंधा होने पर 

    बड़ा मुश्किल होगा।

    वैसे ही पंचतत्वों ,

   नीर, अग्नी, वायु,भूमि,आकाश में

संतुलन बिगड़ेगा तो

 भूमि में प्रदूषण बढ़ेगा ही।

 कारखाने,राकेट, कार,बैंक

 आदि के कारण  वायु

प्रदूषण बढ़ेगा  ही।।

 रेतों की चोरी,

 बदबू पानी को 

नदी में  बहाना,

 झील में छोड़ना,

 बड़ी बड़ी इमारतें,

 जहाँ एक घर था,

 वहाँ सैकड़ों घर,

 भूमितल पानी को खींचना।

 कारखाने,चमड़े के कारखाने

 आदि का गंदे पानी,

आदि पंचतत्वों का संतुलन बिगाड़ देता जान।।

 इन प्राकृतिक प्रदूषण से

 अति खतरनाक 

विचारों में

 प्रदूषण।।

 अध्यापक आज गुरु का नाम खोकर पेशेवर बन गये।।

भक्ति क्षेत्र में मंदिर वाणिज्य क्षेत्र बन गया।।

 सरकारी दफ्तर रिश्वत केंद्र बन गये।

 सौ करोड़ रुपये में बनते सांसद विधायक।।

   मतदाता वोट के लिए

    पैसे लेते।

 विचार प्रदूषण में

 गर्भपात ब्रह्म हत्या पाप।

 परिणाम स्वरूप,

 कृत्रिम गर्भाधान केंद्र,

 शुक्ल बैंक,

 निस्संतान दंपति।

 भावी भारत मरुभूमि।

 बंजर भूमि।

 माता पिता का पाप 

बच्चों के लिए।

 वैसे ही शासक, अधिकारी

 रेत चोरी,नगरविस्तार,

खेतों में कारखाना,

 भावी पीढ़ी दुख भोगेगा जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।



 


तकरार

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य बोध ।

दांपत्य तकरार।

 मौलिक रचना मौलिक विधा।

४-६-२०२१.

 दांपत्य जीवन में

 रूप न तो आनंद नहीं।

 रूप और वियोग

 भारतीय संस्कृति में प्रधान।

 बेटी की बिदा,

 मायके में 

 वियोग विराहवस्था फिर मिलन।

 उसमें अपूर्व आनन्द।

 प्रसव काल में पत्नी मायके में

 पति दाढ़ी बढ़ाकर सात महीने

 बेटी या बेटी की प्रतीक्षा में,

 सातवें महीने के मिलन 

तकरार में अतुलित आनंद।

 मिथ्या तकरार 

 दक्षिण ध्रुव उत्तर ध्रुव।

  फिर चिपकना चुंबक समान।

  पर तलाक का तकरार,

 कामांध में पराया संबंध,

 जितेंद्र या संयम खोना,

 दांपत्य तकरार दुखप्रद।।

 सहना,अहंरहित रूठ 

यकीनन मानिए स्वर्ग सुख।

  थोड़ी देर स्पर्श का अवरोध  रूठ गाली मिलन 

अति संतोष जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Thursday, June 3, 2021

पर्यावरण और भविष्य।

 नमस्ते वणक्कम।

सभी साहित्य संगम संस्थान की इकाइयों को समर्पण







नव साहित्य परिवार।

 पर्यावरण और हमारा भविष्य।

मौलिक रचना मौलिक विधा

  हम बुद्धिजीवी मनुष्य,

  सद्यःफल के लिए

  कारखानीकरण,

 नगरीकरण,नगरविस्तार,

 इमारतें, सुखी जीवन।

हम भूल गये भारत  हरा भरा 

खेती प्रधान देश है।

 पाश्चात्य देशों में 

भारतीय 

जलवायु नहीं है।

 यहाँ की  संजीवनी बूटियाँ,

 और कहीं नहीं।

 भारतीय त्याग और परिश्रमी।

विदेशी आक्रमण 

 लूट,विदेशी शासन।

 हमारे आडंबर रहित 

 अर्द्ध नग्न कृषी जीवन,

 संयम, विनम्र स्वभाव,

 कौपीन धारी जीवन

  संस्कृत वेद मंत्र।

 व्रत,अनशन स्वस्थ जीवन

 स्वस्थ विचार हमारे देश की भाषाओं के नीतिग्रंथ सबको

 मिटा दिया अंग्रेजों ने।

  इन सब के कारण 

 रेंजों की चोरी,

नदी तालाब झील का नदारद।

 भारत को रेगिस्तान में 

बदल दिया।

 सब से आतंकित प्रदूषण

 बहिरंग चुंबन, आलिंगन,

 पाश्चात्य सर्दी में सही,

 भारत में सही नहीं।

 शुक्ल बंधन भारतीय ऋषि मुनियों की सीख।।

  अंग्रेज़ी सीख उल्टा।

 पतिव्रता धर्म का गुणगान।

 आजकल पति बदलना,

पत्नी बदलना,

 तलाक बढ़ रहा है।

 ब्रह्मचर्य व्रत नहीं।

 चित्र पट का प्रभाव,

 एक कुतिया के पीछे

 छे सात कुत्ते ।

शिक्षित कालेज में

 प्यार न तो छात्र-छात्रा नहीं,

  का नया प्रदूषण।।

 प्यार की शादी करें तो

सरकारी प्रोत्साहन।

 तमिलनाडु में अंतर्जातीय शादी के लिए ६००००/-रू. 

 विचार प्रदूषण।।

 गणेश ,काली आदि जुलूस

 देव देवी का बहिरंग अपमान।

 पैरों तले कुचलना।

भक्ति के नाम ठगना।

 मंदिरों में मंदिर केअंदर

 दूकानें नकली चीजों का

 बहिरंग व्यापार धोखा।

पर्यावरण वायु,जल,भेमि आदि तीनों के प्रदूषण से

 अति खतरनाक

 विचारों का प्रदूषण,

 अंग्रेज़ी की प्राथमिकता।

 भारतीय संस्कृति और

भाषा और साहित्य का अवहेलना।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

दांपत्य तकरार

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य बोध ।

दांपत्य तकरार।

 मौलिक रचना मौलिक विधा।

४-६-२०२१.

 दांपत्य जीवन में

 रूप न तो आनंद नहीं।

 रूप और वियोग

 भारतीय संस्कृति में प्रधान।

 बेटी की बिदा,

 मायके में 

 वियोग विराहवस्था फिर मिलन।

 उसमें अपूर्व आनन्द।

 प्रसव काल में पत्नी मायके में

 पति दाढ़ी बढ़ाकर सात महीने

 बेटी या बेटी की प्रतीक्षा में,

 सातवें महीने के मिलन 

तकरार में अतुलित आनंद।

 मिथ्या तकरार 

 दक्षिण ध्रुव उत्तर ध्रुव।

  फिर चिपकना चुंबक समान।

  पर तलाक का तकरार,

 कामांध में पराया संबंध,

 जितेंद्र या संयम खोना,

 दांपत्य तकरार दुखप्रद।।

 सहना,अहंरहित रूठ 

यकीनन मानिए स्वर्ग सुख।

  थोड़ी देर स्पर्श का अवरोध  रूठ गाली मिलन 

अति संतोष जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

धर्म परिवर्तन

 नमस्ते वणक्कम।

   पसंद अपनी अपनी।

४-६-२०२१.

 मौलिक रचना मौलिक विधा।

   भक्ति  क्षेत्र।

  भगवान पर विवाद।

 रमा आठ साल की बच्ची थी।

 एक दिन दादी और माँ के बीच बड़ी लड़ाई शुरू हो गई।

 लड़ाई का कारण तो  भगवान के मंदिर जाने में।

 माँ ने कहा आज घर के पास के शिव मंदिर जाना है।

 दादी का कहना है दूर के लक्ष्मी मंदिर जाना है।

 आज शुक्रवार है।

 माँ का तर्क है शिव मंदिर में 

 दुर्गा है। हमें शक्ति चाहिए।

 दादी का कहना है कि  शुक्रवार है। धन है तो बल। इतने में चाचा ने कहा--

 धन बल दोनों सरस्वती की कृपा से मिलेंगे। सरस्वती मंदिर में नहीं,घर घर में है।

 दोनों को कहीं जाने की जरूरत नहीं।

क्रोधित होकर रमा की माँ

 कैकेई बन गई। बिस्तर पर आँसू बहाते रही। घर में खाना नहीं बना। रमा को अधिक भूख लगी। वह उदासी चेहरे लेकर घर के बाहर सीढ़ी पर  बैठ गई। इतने में इब्राहिम वहाँ आया। उसका घर रमा के घर के सामने थी। 

इब्राहीम ने पूछा कि उदास क्यों बैठी हो?

 रमा ने अपनी राम कहानी सुनाई और कहा घर में खाना नहीं बनाई।

मुझे भूख लगती है।

 इब्राहीम रमा को अपने घर ले गया। खाना खिलाया और कहा-सब का मालिक एक है।

 वह अल्ला है। लक्ष्मी को यह पसंद आयी।बचपन में ही धर्मपरिवर्तन करने की चाह जम गई।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Wednesday, June 2, 2021

சமுதாயம்.

 ஆமை போல்  ஐந்தடக்கல் ஆற்றின் எழுமையும் ஏமாப்புடைத்து.

 இன்று

திரைப்படங்கள்

 சின்னத்திரை நாடகங்கள் 

இப்படி த்தான் 

 இளைஞர்கள் இளைஞிகளை மட்டுமல்ல திருமண ம் ஆனவர் களையும் சீரழிக்கின்றன.

பொருக்கியால் தான் சட்டம் காக்கப் படுகிறது.

படிக்காதவன் கொலைகாரன் 

காதலி வரும்வரை.

பின்னர் மந்திரி

காவல்துறை

நீதி கல்லூரி அட்மிஷன்

அனைத்தும் அந்த பொறுக்கி.

 நான் போலீஸ் பொறுக்கி.

அப்படி ஒருவன் இல்லை என்றால் காவல்துறை மற்ற துறைகளில் லஞ்ச ஊழல் ஒழிக்க முடியாது.

அந்த பொறுக்கி கண்ணில் கவர்னர் மகள் பணக்கார பெண் பட வேண்டும்.

சமுதாய சீரழிவு.

பொறுக்கி இல்லை என்றால் நியாயம் கிடைக்காது.

 விளையாட்டு கூட.

 சிந்திக்க வேண்டும் சமுதாயம்.

कलम की ताकत।

 नमस्ते वणक्कम।

समतावादी कलमकार 

साहित्य मंच, भारत।

१-६-२०२१.

 विषय

कलम की ताकत।

विधा 


 मौलिक रचना 

मौलिक विधा।

   मानव श्रवण और रटन द्वारा  

 सीखता था।

 गुरु सुनाता था।

 फिर ताड़ के पत्तों में।

 लाखों की ज्ञान संपत्ति

  नदारद।

 कलम के आविष्कार

कागज़ के आविष्कार

छापेख़ाने का आविष्कार

सभी नदारद ग्रंथों को 

 स्थाई बनाया।

 अब संगणक ,

 मोबाइल हाथ में।

 कलम की ताकत

 वास्तव में बड़ी है।

पर आज ग्रंथों की बिक्री 

कम हो गयी।

 श्रवण  कम हो रहा है।

  श्रवण संपत्ति सबसे बड़ी।

 सत्संग ज्ञान प्रदान।

 सत्संग न तो कबीर नहीं।

आजकल किताब पढ़ने की आदत कम हो गई।

 सब मोबाइल, किंडिल।

मंदिरों में प्रवचन कम।।

  मोबाइल गेम,

 फेसबुक   ज्यादा।

 स्मरण शक्ति कम।

 फिर भी कलम की ताकत से

 मनुष्य के विचार बदलते हैं।

 कलम की ताकत न तो

 गुलाम भारत की स्वतंत्रता

 जागरण नहीं।

  ज्ञान का विस्फोट नहीं।

 सभ्यता नहीं।

 संस्कृति नहीं।

 देव भक्ति नहीं।

 एकता नहीं।

मानवता नहीं,

धर्म प्रचार नहीं।

 पर  मजहबी कट्टरता

 मानव एकता को

 मानवता को

नष्ट कर रही है।

 वसुधैव कुटुंबकम्।

सर्वे जना सूखिनो भवन्तु।

जय जगत 

अतिथि देवो भव।

 समरस सद्मार्ग

यही कलम की ताकत।

 भारत का मार्गदर्शन।

  जिओ और जीने दो।

अहिंसा परमो धर्म

 ये कलम की ताकतें

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

Tuesday, June 1, 2021

माँ

 नमस्ते वणक्कम।

 नव साहित्य परिवार ।

विषय -- माँ परमात्मा है ,जन्नत है

 विधा 

मौलिक रचना मौलिक विधा।

तीन दिन की प्रतियोगिता।

 १-६-२०२१.


माँ जननी है,

 हमारे रूप ,

 उसके गर्भ गृह के

 कारखाने में

 सूक्ष्मदर्शी बिंदुओं को

 अरूप से रूप मिला है।

दस महीने स्वचालित यंत्र,

 अंधेरे में  पलकर,

 हम नादान शिशु बनकर 

 भूमी पर आते हैं।

 आने के बाद,

 स्तनपान,भोजन,

 पालन पोषण

 समय पर पोषण।

 मल -मूत्र सफाई।

 मातृभूमि मातृभाषा

 दृश्य श्र्व्य सामग्रियाँ।

हमें सिखाती माँ 

परमात्मा।

 सोने लोरी गाती।

 आजकल की माँ अलग।

 मोबाइल अंग्रेज़ी लुल्लबि।

 कौपीन डयफर बाँध 

 छोड़ देती।

 वह कौपीन का बदबू

 सह लेती।

हर क्षण माँ की देखरेख में।

हर माँग माँ ही पूरी करती।

पिता का ध्यान कमाई पर,

माँ ही बच्चों के साथ सदा।

पिता विदेश में,

 माँ स्वदेश में

 बच्चे की देखरेख।

 बच्चे का अच्छा या बुरा

 माँ के पालन पोषण पर निर्भर।

 कुंती जैसे कुमाता भी है।

क्या करें वह कर्मफल।

पाश्चात्य देश की माँ 

पता नहीं  ,पति बदल लेती।

फिर भी  बच्चे की देखरेख करती।

कबीर की माँ फेंककर चली गई।

 हर बात में अपवाद।

समाज में अखबारों में

 खबर आई, अवैध पति की बाधा

 अपने बच्चे को मार डाला।

 सबहिं नचावत राम गोसाईं।

 पूजनीय माँ

 खुद भूख सह लेती।

 तमिल में कहेंगे,

माँ खाने बैठेगी तो

 बच्चा रोएगा।

तुरंत खाना छोड़

 बच्चे को शांत करती।

 माँ ही जन्नत है।

खेद की बात है

 बूढ़ी माँ को अनाथालय में छोड़ना।

 माँ का  देख देख न करेंगे तो

   संतानों को नरक वेदना जान।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

क्षमा

 नमस्ते वणक्कम।

संगम संस्थान मध्यप्रदेश इकाई।

१-६-२०२१

विषय। क्षमा।

विधा 

 मौलिक रचना

 मौलिक विधा।

अपनी शैली।

  छिमा बडन को चाहिए, छोटन का उत्पात। रहीम्।

तमिल के संत कवि 

तिरुवल्लुवर --

 कोई बुराई करें तो उसकी भलाई ऐसी करनी है 

जिससे उसको शर्मिंदा होना पड़े।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै

सुकून

 नमस्ते वणक्कम।

कलमकार कुंभ मंच।

1-6-2021

विषय। सुकून।

आराम ; इतमीनान 2. शांति ; अमन 3. ठहराव ; विराम ।

विधा मौलिक रचना मौलिक विधा। अपनी शैली।

  सबहिं नचावत राम गोसाईं।

 शांति सुकून  अमन

 भगवान की देन।

 प्रह्लाद  भगवान का भक्त।

 शांति नहीं पिता ही 

वध करने तैयार।

 ध्रुव की तपस्या 

पिता की गोद पर बैठने ।।

  भले ही कृष्ण साथ रहें,पर

   पांडव को  जीत

   कर भी नहीं।।

    मन अंचल,

   केवल ईश्वर में लग्न

 दधिची महर्षि शांत।

  राम और सीता  को भी 

  शांति नहीं।

  हर मानव जन्म में 

  सुख-दुख की लहरें।

  शांति मार्गदर्शक बुद्ध भी

   अशांत ही थे।

   सुकून तो भगवान की दैन।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।