Thursday, March 25, 2021

प्रार्थना --

 இறைவணக்கம் . प्रार्थना। तमिल ज्ञान भी भगवान की देन और हिंदी ज्ञान भी।

மனித உருவில் मनुष्य रूप में भगवान। இறைவன் .
படைப்பவன் இறைவன் . सृजनहार भगवान।
மனித வடிவில் பெற்றோர்கள். मनुष्य रूप में माता -पिता। (अभिभावक )
அப்பெற்றோர்கள்
अभिभावक ज्ञानी होना அறிஞர்களாகவும்
அறிவிலிகளாகவும் , अज्ञानी होना,
தனவந்தர்களாகவும் धनी होना
தனக்காக
வாழ்பவர்களாகவும் स्वार्थ होना
பிறருக்காக
வாழ் பவர்களாகவும் परायों के लिए जीना,
பரம ஏழைகளாகவும் अति रंक होना
இருப்பது
இறைவன் எழுதியனுப்பும் भगवान सृष्टित
தலை எழுத்து. शिरो रेखा।
ज्योतिष की बात को झूठा स्थापित करने
राजा शुद्धोधन का प्रयत्न बेकार।।
பிறந்தவுடன் जन्म लेते ही
சித்தார்த்தர் सिद्धार्थ भविष्य में
संन्यासी बनेगा यह ज्योतिष की बात।
सिद्धार्थ बुद्ध बने।जसिया की ज्योति बने।
இப்படித்தான்
எதிர்காலத்தில்
துறவி ஆவார் என்பது ஜோதிடர் .
ஜோதிடத்தை பொய்யாக்க ராஜா சுத்தோதன்
எவ்வளவு முயன்றும் முடியவில்லை .
சித்தார்த்தர் புத்தர் ஆனார் .ஆசிய ஜோதியானார் .

வால்மீகி கொள்ளையன் , वाल्मीकि डाकू।
ஆனால் ஆதிகவி .पर आदी कवि।
துளசிதாஸ் तुलसीदास का जन्म नक्षत्र सही नहीं।माता-पिता द्वारा ठुकराया पुत्र । बढ़कर बड़े होकर विवाह के बाद पिता के शरीर से चिपक कर रहनेवाले कामांधक।
उनकी पत्नी का क्रोध उपदेश । वाल्मीकी रामायण को एक कोने पर रखकर रामचरितमानस की कीर्ति।।
वेश्याओं के घर में ही वास तमिल कवि अरुणगिरिनाथ।
असाध्य रोगी मन आत्महत्या के समय भगवान ने रक्षा की।
वर दिया नामी कवि "तिरुप्पुकऴ"ग्रंथ के लेखक।
पेड़ की शाखा के आगे बैठकर अंतिम भाग काटनेवाले कालीदास महाकवि।
तीन साल की उम्र में पार्वती देवी द्वारा ज्ञान के दूध पिलाने से कवि बने तिरु ज्ञान संबंधर दिव्य कवि।
अभिभावक प्रत्यक्ष रूप तो ज्ञान दिव्य रूप।।
रावण वेदों का ज्ञाता।शिव का अनन्य वर प्राप्त भक्त।
संगीतज्ञ।विधि की विडंबना कामांधक के बदनाम पाकर वध।सीता के मोह के कारण।।ये ही भगवान की
सूक्ष्म लीला। ज्ञान और तत्वज्ञान । धनीपर संतान हीन ।
ये मनुष्य शक्ति से परे अपूर्व शक्ति।
பிறந்த நக்ஷத்திரம்
சரியில்லை என்று
ஒதுக்கப்பட்டவர் .வளர்ந்து திருமணமாகி
மனைவியுடன் ஒட்டியே இருந்த காமாந்தகர்
அவர் மனைவியின் கோபம் அறிவுரை
வால்மீகி ராமாயணத்தை ஓரம் கட்டிய ராமச்சரிதமானஸ் .
வேசி வீடே கதி என்ற அருணகிரி
தீரா நோயுற்று தற்கொலை செய்யும்போது
தடுத்தாட்கொள்ளப்பட்டு திருப்புகழ் எழுதிய
தெய்வப்புலவர் .
நுனி மரத்தில் அமர்ந்து அடிமரம் வெட்டியவர்
காளியின் அருளால் மஹாகவி .
பிறந்த சிறு குழந்தை ஞானப்பாலூட்டி
ஞானம் பெற்றவர் திருஞான சம்பந்தர் .
பெற்றோர் மனிதவடிவம் ஞானம் தெய்வீகம்.
இராவணன் வேதவித்தகர் .சிவபெருமானின் அருள்பெற்றவர் .இசைமேதை .ஆனால்
அவர் விதி சீதைமேல் மோகம் கொண்டவர்.
அவரின் அவப்பெயர் பெண்பித்தர்.
இதுதான் இறைவனின் லீலை .
ஞானம் மெய்ஞானம் புகழ் இகழ்
செல்வம் செல்வமிருந்தும் செல்வன் இல்லாமை .
இவை மனிதனால் செய்யமுடியாத அருஞ்செயல் .
இறைவனின் திருவிளையாடல் .
பகவானைப் போற்றுவோம் .

பாக்கியவானாக ,இன்னல்நீங்கி
பாரினில் இன்பமுள்ளவர்களாக
வாழ்வோம் .

ஓம் கணேசாய நமஹ .ஓம் கார்த்திகேயாய நமஹ .
ஓம் நமஹ சிவாய ,ஓம் துர்காயை நமஹ .

Tuesday, March 23, 2021

यादें तन्हाई।

 नमस्ते।

यादें। 

सारथी दल।।

२४-३-२०२१.

 मैं हूँ अकेला।

 अकेला खाली दिमाग

  शैतान का कारखाना।।

   ग्रूप क्यों दल क्यों नहीं।

  अंग्रेज़ी शैतानियत,

   अति  सवार।।

    तन्हाई में 

विनोबा जी की यादें ,

 पद यात्रा, सर्वोदय यज्ञ।

 भारत में हर गाँव 

 हर शहर में, गली गली में

 हिंदी की गूँज।

 महात्मा गाँधीजी की स्थापना

 हिंदी प्रचार,अति तेज।

 धिक्कार है आजादी भारत।

१९७० से अंग्रेज़ी स्कूल,

लाभ ही लाभ।

 किताब बिक्री,बाह्याडंबर ज्यादा है

 तनहाई में यादें अधिक।।

 पैसे सौ गुना लाभ,बड़ा बंगला,

 संतान नहीं, संतान असाध्य रोगी।

 पूत सपूत का तो का धन संचय।।

पूत कपूत का तो का धनसंचय।।

 भ्रष्टाचार-रिश्वतखोर की कमाई।।

क्या लाभ? कोराना का डर।

मच्छर मक्खी खटमल।

 पैसे हैं,दो दिन बाहर आते तो

 मकड़ी का जाल धूलधूसरित घर। में।

काकरोच,छिपकली, चूहा

कितना खतरा मानव जीवन का।।

यादें , तन्हाई बहुत सोचता हूँ।

मानव दुखों के कारण

मानव ही।

दशरथको भी शाप ,कारण खुद।

 संतान नहीं,संतान,संतान शोक।।

 इंद्र को भी शाप ,

अहिल्या पत्थर बनी तो

 इंद्र हजारों योनी वाला,

 मानव अपनेकर्मों के कारण दुखी।

 ईश्वर के लिए भूमि रंगमंच।

 मानव विविध चरित्र वाला।।

भोगी,रोगी, त्यागी।

कफ़न वह भी श्मशान तक।।

 तन्हाई यादों का बारात निधन।।

यही है मानव जीवन।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नई।

शहीद दिवस

 नमस्ते नमस्ते ।

वणक्कम वणक्कम।

साहित्य संगम संस्थान

गुजरात इकाई।

२३-३-२०२१.

विषय  शहीद दिवस।

विधा --अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति।

+++++++++++

  शहीद न तो 

  भोगी सुखी कैसे?

  एक नेता की प्रेरणा।

करोड़ों शहीद आजादी की          लड़ाई में तन,मन,धन त्यागे।।

 आज़ादी आसानी से न मिली।

 सिर्फ नरम दल के 

सत्याग्रही से  नहीं,

गर्म दल के तीव्र कदम।।

 नरम दल खून बहाते रहे।

 गर्म दल आतंकवादी,

 अंग्रेज़ों को अपने अधिकार जमाने में अड़चनें करते रहे।।

  कइयों ने जानें ली, जानें दीं।।

 सुख देव, भगतसिंह, वीर सावरकर, वीरपांडिय कट्टपोम्मन, झांसी रानी, वैलुनाच्चियार, अल्लूरी सीताराम राजू, 

 व.उ.चिदंबरनार, सुब्रह्मण्यशिवा,

 लाल,पाल,बाल

लाला लजपतिराय, विपिन चंद्रपाल,बाल गंगाधर तिलक

सुभाषचन्द्र बोस,

 कितने शहीद, कितना कष्ट सहे।।

 कितने अंग्रेजों के चापलूसी,

 उपाधियाँ पाकर संस्कृत व संस्कृति भूलकर  वकील बने।

 विलायत में वकील,

 थप्पड़ का नतीजा,

 अंग्रेज़ के विरुद्ध संग्राम।।

 उनके पहले ही आजादी की चिनगारी भटकने लगी।।

  गर्म दल के शहीद हिलाने लगे, तार ,रेल,थाना  धधकने लगे।

 नरम दल 

 लाठी का मार सहते रहे।

 मार पर  मार, जेल यात्रा,

 अंदमान की कालकोठरी।

 नतीजा आजादी।।

 पर आजादी के बाद 

 बँटवारा फिर भी धर्मनिरपेक्ष।

 दो हजार मंदिर मस्जिद के अंदर।

 फिर एक आजादी चाहिए।

  उन शहीदों की आत्माएँ

 शांति पाने भारतीय भाषाओं में जीविकोपार्जन चाहिए।

सत्तर साल के बाद 

स्वच्छभारत का नारा।

राष्ट्रीय शिक्षा।

राष्ट्रीय लेशन कार्ड।

 उन शहीदों के कारण।

 श्रद्धांजलि याँ उन शहीदों को

 शहीद दिवस के पुण्य तिथि पर।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

Monday, March 22, 2021

लाल

 मंगलवार।२३-३-२९२१!

साहित्य संगम संस्थान इकाई हरियाणा।

 रंग  -लाल।

 विधा --अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति।

 विधा निर्णय पाठक -समालोचक।

*************"

 लाल रंग शहीदों की निशानी।

 धरती के लाल वीर सैनिक।

 खून का रंग लाल।

 आँखें लाल होना क्रोध के कारण।

 गाल लाल होना 

लज्जा के कारण।।

 सूर्योदय लालिमा 

अति सुन्दर।।

सूर्यास्त लालिमा दर्शनीय।।

लाल पाल बाल

 लाला लजपतिराय,देश का लाल।।

 लाली मेरे लाल की जित देखो तित लाल।।

लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

आँसू

 नमस्ते वणक्कम।

कलम बोलती हैं,

आँसू  शिशु की भूख के।

 भिखारी के आँसू ,

दया करुणा पाने  

शोक भरा।।

 विरह मिलन में 

आनंदाश्रु।।

महादेवी वर्मा का संस्मरण,

चीनी भाई।

 नाबालिग चोर प्रशिक्षण में

  आम जनता पकड़ने पर

   कैसे आँसू  बहाना।।

 पुलिस के पकड़ने पर।

मारने पर अपने

 बचाने के आँसू।।

 अध्यापक के मार से बचने 

 आँसू,

  पाठशाला प्रगति पत्र हाथ में

 तब पिता से 

हस्ताक्षर लेने आँसू।

  विशेष आँसू ठगने 

मगरमच्छ आँसू।।

  आँसू बिदाई समारोह में।

  मृत्यु के अलविदा आँसू।।

 आँसू के प्रकार अनेक।।

  बुखार में आँसू।

 आँसू न तो  

न दुख का बहाव।

न माँग की पूरी।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।।








 


 


पैसे से असंभव

 नमस्ते वणक्कम।

कलम बोलती है।

पैसे हैं पर मेरी जवानी न रोक सका।

पद हैं, अधिकार है,अंग रक्षक है,

पर न किसी नेता को अमर न रख सका।।

मुझे न चाह है धन का।

  अतः  धन का न कोई प्रयोजन।

मच्छर से बचने मच्छर जाल।।

पर भावी पीढ़ी की सुख सुविधा  के लिए

न वन संरक्षण।।

गंगा के किनारे मिनरल वाटर की बिक्री,

धिक्कार है शासकों को, प्रशासकों को।

 हवा खरीदनी होगी।

अब पानी खरीद रहे हैं।

भावी पीढ़ी बूंद बूंद के लिए तरसेगी जान।।

पूर्वजों के पाप का फल

पोते पोतियों पर।

प्रशासक, शासक का 

कुकर्म भावी पीढ़ी पर।

कृषी प्रधान देश,

हो रहा है मरुभूमि।।

 सावधान! सावधान! सावधान।।

जागो जागो जागो।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

++++++++++++++

भगवान की कृपा चाहिए।

उनका अनुग्रह चाहिए।

वही काफी है।

कई नामियों  का नाम नहीं,

कई राजा-महाराजाओं के नाम नहीं,

 ससम्मान लिया जाता  है 

दिगंबर  साधु  संत,ऋषि मुनियों के नाम।

लंगोट धारी  रमण महर्षि  का नाम।

करोड़पति  या रंग,शासक प्रशासक ।

सनातन धर्मी हो ,मुगल हो ,ईसाई हो

शांति प्रद,संतोष प्रदान,आनंद प्रद 

सर्वेश्वर नाम,वेद,कुरान,बाइबिल  जान।।

कर्म फल।

 नमस्ते। वणक्कम।

जग में जन्म लेना,

 जगन्नाथ की कृपा।

 कर्म फल , पाप-पुण्य फल।

 रईस  के यहाँ जन्म।।

 रंक के यहाँ जन्म।।

स्वस्थ देह, स्वस्थ मन,स्वस्थ धन।

जन्म से  ही पता लग जाता है।।

 कई अमीर घरों में,कमाई में मन।

नतीजा संतानोत्पत्ति  में मोह नहीं।।

फल एक-दो संतान,पैसे का पहाड़।।

गरीबों की बस्ती में ही,

संतानोत्पत्ति ही संपत्ति।।

 सुदामा गरीब, संतान अनेक।

 इसी में प्राकृतिक विश्रांति।।

जन्म से असाध्य रोगी,

अंधे,बहरे,गूँगे।

अंगहीनता, नपुंसकता।।

कर्म पाप पुण्य फल ,

ईश्वर हमारे निरीक्षक।।

पुरस्कार दंड यातनाएँ।।

अमीर भी न बच सकता।।

अधिकारी, न्यायाधीश भी

 नहीं बच सकता।।

लौकिक यातनाएँ जगविदित कहानियाँ।।

जन्मकुंडलियों में ही लिखा है,

बदलना पुरस्कार या दंड से बचना ज असंभव जान।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन







 


जीवन अनमोल।

Sunday, March 21, 2021

ईश्वरीय चिंतन

 இன்றைய இறைச் சிந்தனை.

தமிழும் நானே ஹிந்தியும் நானே

तमिल भी मैं हिंदी भी मैं।

आज के ईश्वरीय चिंतन।

यह मनोदशा दूरी होनी चाहिए कि भगवान परदेशी है। सर्वेश्वर स्वदेशी है।

उसी को महान आदी शंकराचार्य ने

अद्वैत कहा।

द्वैतवन दशा में भगवान पराया हो जाता है।

भगवान को हमारे जी में 

जड पकड़कर बस जाना चाहिए।

भगवान हनुमान जी ने अपनी छाती फाड़कर दिखाया कि ईश्वर उसके दिल में बस गये।

परिणाम वे अहं ब्रह्मास्मी बन गये।  हनुमान चालीसा राम के अनुग्रह का मूल मंत्र बन गया। ऐसी दशा मिलनी चाहिए। ऐसी दशा कैसे प्राप्त करेंगे? तब संत तिरुवल्लुवर आ जाते हैं।

मन प्रदूषित रहना चाहिए।

वहीं धर्म है।

तटस्तथा। अनासक्त भाव।

कबीर की भक्ति उनसे बड़ी है। 

नैनों की करि कोठरी पुतली पलँग बिछाय ।


पलकों की चिक डारि कै पिय को लिया रिझाए।।

आँखों में कैदकर बाहर जाने न देना।और आकर्षक माया भरी देख नहीं सकते।। ऐसा ध्यान।

नित्यानंद,

 परमानंद ,

ब्रह्मानंद।

सत्य ज्ञान।

तन ज्ञान भूल।।

मन अचंचल की दशा।।

त्री काल ज्ञान भाव की दशा।।

स्पष्ट निष्कलंक दशा।।

अष्ट सिद्धि, नव निधि 

पाने की दशा।।

ज्ञानियों के गीत:

श्री रामलिंग अडिकळार:

 दर्शन कर लिये, 

कृपा कटाक्ष

 ज्योति को दर्शन कर लिया।।

तिरुअरुटपा

तेरी कृपाकांक्षी के कारण

मैंने तुझे दर्शन कर लिया।।

तेरे दर्शन के बाद समझ लिया, तुम मेरे दिल में ही वास करते हो।। महसूस करके आश्चर्य चकित रह गया।।

तिरुनाउक्करसर:

 दर्शन कर लिए,तेरे स्वर्ण चरणों को दर्शन कर लिये।

पेयाऴवार :

श्री देखा,

स्वर्ण देह देखा।

 हाथों में शंख चक्र देखे।

अति निकट से देखा।।


 आज प्राप्त ईश्वरीय शक्ति ज्ञान।।




 



 பகவான் 

பரதேசி என்ற எண்ணம் அகல வேண்டும்.

சர்வேஸ்வரன் சுதேசி.

அதைத்தான் மஹா பெரியவா ஆதி சங்கரர்

அத்வைதம் என்றார்.

த்வைத்வ நிலையில் 

இறைவன் வேறாகிறான்.

அவன் நம் உள்ளத்தில் வேராக வேண்டும்.

ஆஞ்சனேயர்

நெஞ்சைப் பிளந்து

தன் உள்ளத்தில் சுதேசியாக இறைவன் இருப்பதைக் காட்டினார்.

அந்த இறைநிலை வரவேண்டும்.

அந்நிலை எப்படி வரும்?

 வள்ளுவர் வந்து விடுகிறார்.

 மனம் மாசில்லா மல் இருக்கவேண்டும். அதுதான் அறம்.

நடுநிலை.

பற்றற்ற நிலை.

கபீரின் பக்தி அதைவிட உயர்ந்தது.

கண்மூடிய பக்தி.

கருவிழியை கட்டிலாக்கி,

ஈஸ்வரனைப்

படுக்கவைத்து

கண்

இரப்பைக் கதவை மூடி

தியானம்.

வேறு

கவர்ச்சிகள்

காட்சிகள்

காணமுடியாத

தியானம்.

இறைவன் அருள்.

நித்யானந்தம்.

பரமானந்தம்.

பிரம்மா

ஆனந்தம்.

மெய்ஞானம்.

மெய் மறந்த நிலை.

மன சஞ்சலமற்ற நிலை.

இதுதான்

முக்காலமும் உணரும் அறிவு நிலை.

தெளிந்த களங்கமற்ற நிலை.

  அஷ்ட சித்திகள் நவநிதிகள் பெறும் நிலை.

ஞானிகள் பாடல்கள்:


“கண்டேன் அருட்பெருஞ் சோதியைக் கண்களில் கண்டுகளி கொண்டேன்” – அருட்பெருஞ்சோதி அடைவு திருவருட்பா திருவருட் பிரகாச வள்ளலார்


“இறைவநின தருளாலே எனைக்கண்டு கொண்டேன்

எனக்குள்உனைக் கண்டேன்பின் இருவரும்ஒன் றாக

உறைவது

கண்டு அதிசயித்

தேன்” – திருவருட்பா 3051 


“கண்டே னவர் திருப்பாதங் கண்டறி யாதன கண்டேன்” – திருநாவுக்கரசர் பெருமான்


“திருக்

கண்டேன் பொன்மேனி கண்டேன் திகழும் 

அருக்கன் அணிநிறமும் கண்டேன் – செருக்கினர்

பொன்னாழி கண்டேன் புரிசங்கம் கைக்

கண்டேன் 

என்னாழி வண்ணன்

பால் இன்று.


இன்று நான் பெற்ற இறை இன்பம்.

Tuesday, March 16, 2021

जीवन के रंग

 नमस्ते वणक्कम। साहित्य संगम संस्थान उड़िया इकाई।

16-3-2021

जीवन के रंग।

विधा --अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति अपनी शैली।

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दुनिया दुरंगी है तो 

 जीवन के रंग भी अनेक।।

 भगवान के अवतार अनेक।

दसावतार में विष्णु के रंग।

कुरुक्षेत्र के रंग अनेक।।

इंद्र का विप्रावतार।।

 कृष्ण का विराट।

 भीष्म की प्रतिज्ञा।

  आधुनिक 

खान-गाँधी का 

अवतार।।

 दल-बदल के नेता।।

 गुण तो अनेक।।

 जिंदाबाद एक दिन,

मुर्दाबाद एक दिन।

नेता तो वही,

जीवन के रंग अनेक।

 भगवान के रंग भी अनेक।

इंद्र को शाप नहीं,

अहिल्या को शाप।।

ईश्वरत्व में ही रंग अनेक तो

 सामान्य मनुष्य

 किस खेत की मूली ।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नई हिंदी प्रेमी प्रचारक 

 

  










 

 



 





Monday, March 15, 2021

प्रकृति இயற்கை

 வேண்டுதல் வேண்டாமை இலானடி சேர்ந்தாருக்கு யாண்டும் இடும்பை இல.

 इच्छा अनिच्छा रहित  तटस्थ हैं भगवान। पक्ष विपक्ष के भेदभाव के बिना सबकी भलाई करनेवाले हैं भगवान।। सर्व हित करनेवाले हैं सर्वेश्वर।।

पंच तत्व, पंचभूत 

सब के कल्याण के लिए हैं।

प्रकृति और प्रकृति ही भगवान है।

मंदिर भगवान बनाता है,बनवाया है।

मनुष्य के जाति धर्म मजहब के भेदभाव घृणास्पद है। विरोध भाव उत्पन्न करनेले हैं। इनमें समरस सन्मार्ग समत्व के गुण नहीं है।

एम जी आर, जयललिता,मोदी, सोनिया के मंदिर दलीय कट्टरता है।

ऐसे ही मंदिर, मस्जि़द,देवालय,

मनुष्य मनुष्य में फूट डालते हैं।

मनुष्य एकता के विरोध है।

 पंचतत्व, पंचभूत  वायु,जल,आग,

भूमि,आकाश ही भगवान है।

 हवा तो  केवल हिंदुओं  के लिए नहीं, मुगलों के लिए नहीं, ईसाई के लिए नहीं बिना भेदभाव के सबकी जीवनदात्री है।वायु तोऊँच-नीच, अच्छे-बुरे,अमीर -गरीब सब के लिए समान है।पेड़ पौधे,घास फूस , पशु-पक्षी सभी जीवराशियों के लिए अन्य चार तत्वों के लिए हवा अनिवार्य तत्व है।जाति-धर्म-मजहब, संप्रदाय सब के लिए जीवनदात्री है।

बिना हवा के कोई जी न सकता।।

 बिना देवालय के जी सकते हैं।

शौचालय ,जलधारा के बिना मानव जी नहीं सकता। प्रकाश,पानी,आकाश,भूमि रहित घर असंभव।

 प्रकृति ही भगवान है।।

प्रकृति को प्रदूषण रहित रखेंगे।।

प्रकृति की प्रार्थना करेंगे।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

तमिऴ दस।


 நடுநிலை.

பாரபட்சம் பார்க்காமல்

அனை

வருக்கும் நன்மை .

பஞ்சதத்துவங்கள் பஞ்சபூதங்கள்.

இயற்கை .

இயற்கை யே இறைவன்.

ஆலயங்கள் மனிதன் அமைப்பவை.

மத இன வேறுபாடுகள்.

மனிதனுக்கு மனிதனை எதிரி ஆக்குபவை.

 எம்ஜிஆர் ஜயலிதா சோனியா குஷ்பு ஆலயங்கள் கட்சி வெறி .

மனித சமரச சன்மார்க்க மற்றவை.

இப்படி த்தான் ஆலயங்கள் தேவாலயங்கள் மசூதிகள் மனித ஒற்றுமை க்கு எதிரானவை.

காற்று நீர் நெருப்பு பூமி ஆகாயம்

இறைவன்கள்.

ஜாதி மத இன சம்பிரதாய மின்றி சம வாழ்வு தருபவை.

வாயு பகவான் ஹிந்து மூஸ்லிம் கிறிஸ்துவன் உயர்ந்தவன் தாழ்ந்தவன் 

நல்லவன் தீயவன்

பார்ப்பதில்லை.

மரம் செடி பறவை மிருகம் மனிதன் அனைத்து ஜீவராசிகள் காற்று இல்லாமல் வாழமுடியாது.

இயற்கை காலைக்கடன் 

கடவுள் இல்லா இல்லங்களில் வாழலாம்.

சாக்கடை கக்கூஸ் ஒளி காற்று தண்ணீர் இல்லா வீட்டில் வாழமுடியாது.

இயற்கை யைப் போற்றுவோம்.

இயற்கை யை மாசின்றி பாதுகாப்போம்.


சே.அனந்தகிருஷ்ணன். சென்னை ஹிந்தி மொழி ஆசிரியர்.

தமிழ் தாசர்.

चित्र लेखन दो नारियाँ बैल

 नमस्ते वणक्कम।

शब्दाक्षर साहित्यिक संस्था

सोमवार कार्यशाला।१५-३-२०२१.

चित्र लेखन।

 बैल बनी दो नारियाँ,

 किसान बना हलधर।

 जो उगाता 

अन्यों के पेट भरने।।

 खुद खाता 

रूखा सूखा।।

 मालिक के घर में

 अनाजों का ढेर।।

  महलों में मालिक।

  बेगार खेती मज़दूर।

 आजादी के बाद हालत 

 सुधरने के बदले,

 और भी हुई दशा बुरी।।

औद्योगिकीकरण शहरीकरण के नाम

  खेती की भूमि बनी आवास, कारखाना, कालेज।।

 नदी के रेत खाली,

 झीलें , तालाब,नहर नाले सूखते,

है तो गंदे विषैले कारखाने बदबू पानी मिश्रित।।

 कृषी प्रधान समृद्ध भूमि,

पेय विदेशी, पूँजी विदेशी, महँगाई अधिक।।

किसान बेचारा,

 दलालों  और दूकानदार 

 अति सुखी।।

 गाँव में काम करने जवान नहीं,सब के सब शहर में बने मज़दूर।।

  सद्यःफल पाने शैतानों का नजर,

  दलाल संपन्न , 

 भावी पीढ़ी  दाने दाने के लिए तरसेगी।।

 कार,बंगला, 

चाँदी की चिड़िया,

 भूख  मिटाने काम न आएँगे।।

 जय जवान! जय किसान!! का नारा  न बुलंद गूँजेगा तो 

 भूमि सूखा,

 पेट में चूहा दौड़ेगा।।

 स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन, चेन्नै


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 तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

நாட்டு மருந்து

 *நாட்டு மருந்து கடைகளில் விற்கப்படும் எந்த மூலிகை பொடி எதற்கு பயன்படும்..?

*பாதுகாக்க பட வேண்டிய பயனுள்ள குறிப்புகள்..!*

*அருகம்புல் பொடி*

அதிக உடல் எடை, கொழுப்பை குறைக்கும், சிறந்த ரத்தசுத்தி

*நெல்லிக்காய் பொடி*

பற்கள் எலும்புகள் பலப்படும். வைட்டமின் “சி” உள்ளது

*கடுக்காய் பொடி*

குடல் புண் ஆற்றும், சிறந்த மலமிளக்கியாகும்.

*வில்வம் பொடி*

அதிகமான கொழுப்பை குறைக்கும். இரத்த கொதிப்பிற்கு சிறந்தது

*அமுக்கரா பொடி*

தாது புஷ்டி, ஆண்மை குறைபாடுக்கு சிறந்தது.

*சிறுகுறிஞான் பொடி*

சர்க்கரை நோய்க்கு மிகச் சிறந்த மூலிகையாகும்.

*நவால் பொடி*

சர்க்கரை நோய், தலைசுற்றுக்கு சிறந்தது.

*வல்லாரை பொடி*

நினைவாற்றலுக்கும், நரம்பு தளர்ச்சிக்கும் சிறந்தது.

*தூதுவளை பொடி*

நாட்பட்ட சளி, ஆஸ்துமா, வரட்டு இருமலுக்கு சிறந்தது.

*துளசி பொடி*

மூக்கடைப்பு, சுவாச கோளாருக்கு சிறந்தது.

*ஆவரம்பூ பொடி*

இதயம் பலப்படும், உடல் பொன்னிறமாகும்.

*கண்டங்கத்திரி பொடி*

மார்பு சளி, இரைப்பு நோய்க்கு சிறந்தது.

*ரோஜாபூ பொடி*

இரத்த கொதிப்புக்கு சிறந்தது, உடல் குளிர்ச்சியாகும்.

*ஓரிதழ் தாமரை பொடி*

ஆண்மை குறைபாடு,

மலட்டுத்தன்மை நீங்கும்.வெள்ளை படுதல் நீங்கும், இது மூலிகை வயாகரா.

*ஜாதிக்காய் பொடி*

நரம்பு தளர்ச்சி நீங்கும், ஆண்மை சக்தி பெருகும்.

*திப்பிலி பொடி*

உடல் வலி, அலுப்பு, சளி, இருமலுக்கு சிறந்தது.

*வெந்தய பொடி*

வாய் புண், வயிற்றுபுண் ஆறும். சர்க்கரை நோய்க்கு சிறந்தது.

*நிலவாகை பொடி*

மிகச் சிறந்த மலமிளக்கி, குடல்புண் நீக்கும்.

*நாயுருவி பொடி*

உள், வெளி, நவமூலத்திற்க்கும் சிறந்தது.

*கறிவேப்பிலை பொடி*

கூந்தல் கருமையாகும். கண்பார்வைக்கும் சிறந்தது.ரத்தம் முழுவதும் சுத்தமாகும்.இரிம்புச் சத்து உண்டு.

*வேப்பிலை பொடி*

குடல்வால் புழு, அரிப்பு, சர்க்கரை நோய்க்கு சிறந்தது.

*திரிபலா பொடி*

வயிற்று புண் ஆற்றும், அல்சரை கட்டுப்படுத்தும்.

*அதிமதுரம் பொடி*

தொண்டை கமறல், வரட்டு இருமல் நீங்கும், குரல் இனிமையாகும்.

*துத்தி இலை பொடி*

உடல் உஷ்ணம், உள், வெளி மூல நோய்க்கு சிறந்த்து.

*செம்பருத்திபூ பொடி*

அனைத்து இருதய நோய்க்கும் சிறந்தது.

*கரிசலாங்கண்ணி பொடி*

காமாலை, ஈரல் நோய், கூந்தல் வளர்ச்சிக்கு சிறந்தது.

*சிறியா நங்கை பொடி*

அனைத்து விஷக்கடிக்கும், சர்க்கரை நோய்க்கும் சிறந்தது.

*கீழாநெல்லி பொடி,*

மஞ்சள் காமாலை, சோகை நோய்க்கு சிறந்தது.

*முடக்கத்தான் பொடி*

மூட்டு வலி, முழங்கால்வலி, வாததுக்கு நல்லது

*கோரைகிழங்கு பொடி*

தாதுபுஷ்டி, உடல் பொலிவு, சரும பாதுகாப்பிற்கு சிறந்தது.

*குப்பைமேனி பொடி*

சொறிசிரங்கு, தோல் வியாதிக்கு சிறந்தது.

*பொன்னாங்கண்ணி பொடி*

உடல் சூடு, கண்நோய்க்கும் சிறந்தது.

*முருஙகைவிதை பொடி*

ஆண்மை சக்தி கூடும்.

*லவங்கபட்டை பொடி*

கொழுப்புசத்தை குறைக்கும். மூட்டுவலிக்கு சிறந்தது.

*வாதநாராயணன் பொடி*

பக்கவாதம், கை, கால் மூட்டு வலி நீங்கும்.

*பாகற்காய் பவுட்ர்*

குடல்வால் புழுக்கள் அழிக்கும். சர்க்கரை நோய் கட்டுக்குள் இருக்கும்.

*வாழைத்தண்டு பொடி*

சிறுநீரக கோளாறு, கல் அடைப்புக்கு மிகச் சிறந்தது.

*மணத்தக்காளி பொடி*

குடல் புண், வாய்புண், தொண்டைபுண் நீங்கும்.

*சித்தரத்தை பொடி*

சளி, இருமல், வாயு கோளாறுகளுக்கு நல்லது.

*பொடுதலை பொடி*

பேன் உதிரும், முடி உதிரிவதை தடுக்கும்.

*சுக்கு பொடி*

ஜீரண கோளாறுகளுக்கு சிறந்தது.

*ஆடாதொடை பொடி*

சுவாச கோளாறு, ஆஸ்துமாவிற்கு சிறந்தது.

*கருஞ்சீரகப்பொடி*

சக்கரை, குடல் புண் நீங்கும், நஞ்சு வெளிப்படும்.

*வெட்டி வேர் பொடி*

நீரில் கலந்து குடித்துவர சூடு குறையும், முகம் பொலிவு பெறும்.

*வெள்ளருக்கு பொடி*

இரத்த சுத்தி, வெள்ளைப்படுதல், அடிவயிறு வலி நீங்கும்.

*நன்னாரி பொடி*

உடல் குளிர்ச்சி தரும், சிறுநீர் பெறுக்கி, நா வறட்சிக்கு சிறந்தது.

*நெருஞ்சில் பொடி*

சிறுநீரக கோளாறு, காந்தல் ஆகியவற்றை நீக்கும்.

*பிரசவ சாமான் பொடி*

பிரசவத்தினால் ஏற்படும் அதிகப்படியான இழப்பை சரி செய்யும், உடல் வலிமை பெறும். தாய்பாலுக்கு சிறந்தது.

*கஸ்தூரி மஞ்சள் பொடி*

தினசரி பூசி வர முகம் பொலிவு பெறும்.

*பூலாங்கிழங்கு பொடி*

குளித்து வர நாள் முழுவதும் நறுமணம் கமழும்.

*வசம்பு பொடி*

பால் வாடை நீங்கும், வாந்தி, குமட்டல் நீங்கும்.

*சோற்று கற்றாழை பொடி*

உடல் குளிர்ச்சி, முகப்பொலிவிற்கு பயன்படும்.

*மருதாணி பொடி*

கை , கால்களில் பூசி வர பித்தம், கபம் குணமாகும்.

*கருவேலம்பட்டை பொடி*

பல்கறை, பல்சொத்தை, பூச்சிபல், பல்வலி குணமாகும்.

ஒரு ஸ்பூன் போட்டு தண்ணீரில் கலக்கி காலை,இரவு சாப்பாட்டுக்கு பின் சாப்பிடவும்.

இஞ்சி எதனுடன் எப்படி சாப்பிட்டால் என்ன பலன் கிடைக்கும்..?

1. இஞ்சி சாறை பாலில் கலந்து சாப்பிட வயிறு நோய்கள் தீரும். உடம்பு இளைக்கும்.

2. இஞ்சி துவையல், பச்சடி வைத்து சாப்பிட மலச்சிக்கல், களைப்பு, மார்பு வலி தீரும்.

3. இஞ்சியை சுட்டு உடம்பில் தோய்த்து சாப்பிட பித்த, கப நோய்கள் தீரும்.

4. இஞ்சி சாறில், வெல்லம் கலந்து சாப்பிட வாதக் கோளாறு நீங்கி பலம் ஏற்படும்.

5. இஞ்சியை புதினாவோடு சேர்த்து துவையலாக்கி சாப்பிட பித்தம், அஜீர ணம், வாய் நாற்றம் தீரும். சுறு சுறுப்பு ஏற்படும்.

6. இஞ்சியை, துவையலாக்கி சாப்பிட வயிற்று உப்புசம் இரைச்சல் தீரும்.

7. காலையில் இஞ்சி சாறில், உப்பு கலந்து மூன்று நாட்கள் சாப்பிட பித்த தலைச்சுற்று, மலச்சிக்கல் தீரும். உடம்பு இளமை பெறும்.

நன்றி வணக்கம்.

नयन निहारें तुम्हें

 नयन निहारें तुम्हें।

नव साहित्य परिवार।

विधा --अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति।

 मन उस रहा था,

 जिंदगी सूख गई।।

 मन हो गई  उदासी।

 संताप मन से समुद्र तट पर,

 नयन निहारें, लहर तुम्हें।।

ज्वार भाटा, एक केकड़ा किनारे पर, न जाने किसी पक्षी ने उसे चोंच से पकड़ा,

 दूसरी ओर मछुआरे वापस।।

नयन निहारें लहरों को

 आसपास के दृश्यों को।।

बड़ी बड़ी मछलियाँ,

तड़प रही थीं नयन

 निहारें उन्हें भी।

 इत्र तंत्र सर्वत्र हिंसा।

हर जीव दुखी,

हर क्षण प्राण को खतरा।।

मेरी उदासी हुई।

लहरें ! नयन निहारे तुम्हें।

 मन की तरंगें उठती रहीं।

नज़र भी घूमने लगी।

 लहरें ! नयन तुम्हें देखते रहे।

 मन में कई 

भावों की लहरें

उठती रही।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन।

Saturday, March 13, 2021

संगीत

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई।

दिनांक १३-३-२०२१.

विषय संगीत।

विधा --अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति।

 संगीत भारत में दिव्यानुभूति।।

 हर एक भगवान के हाथ

 एक एक बाजा।

 शिव  के हाथ डमरू।

 विष्णु के हाथ शंख।

कृष्ण के हाथ बाँसुरी।

 शिवगणों के बाजा विविध।।

 ढोल तो सूचना और युद्ध वाद्य।

 सरस्वती के हाथ वीणा।।

नंदीश्वर मृदंग।

शहनाई नादस्वरम् मंगल वाद्य।

 सोने के लिए लोरी।

 इलाज के लिए 

 हर रोग का 

 हर राग अति प्रिय।।

दूध दुहने राग,

पौधे उगाने राग,

शिला तोड़ने राग।

 हिरण,साँप संगीत में नियंत्रित।

शोक गीत।

प्यार गीत ।

दार्शनिक गीत।

प्रार्थना गीत।

स्वागत गीत।

 राष्ट्रगीत।

 राष्ट्रगान।

 विविध राग,

 विविध संगीत ध्वनि याँ।

 तोते कोयल में संगीत।

विविध पक्षियों के कलरव।

जगाने  मुर्गा।


 संगीत में असीम वर्णनातीत   शक्ति ।

 स्वरचित स्वचिंतक

 एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

 

 




 



 

  



 



 


 

 

 



 

 

 

 

  




 


Thursday, March 11, 2021

इन लयन शिक्षा।

 नमस्ते वणक्कम।

साहित्य संगम संस्थान हरियाणा इकाई।

१२-३-२९२१.

शीर्षक:  आन लाइन शिक्षा, हमारी परीक्षा।।

विधा गद्य लेख।

  कोराना मेरा हिंदी अनुवाद

 क्रीट विषाणु परिणाम

 सब बंद। 

यातायात, स्कूल, कालेज।

नाते रिश्ते इष्ट मित्र  बंधुओं से मिलना-जुलना बंद।

ऐसी हालत में  अंतर्जाल मिलन, दृश्य-श्रव्य सम्मेलन,ज़ूम सम्मेलन

अखिल लोक को अति निकट ला रहा है। हमें एकांत से समूह का आनंद ला रहा है।

  अब आन लयन शिक्षा  अर्थात  अंतर्जाल का मायाजाल शल्य चिकित्सा भी  सिखाने लगा है।  यही प्रणाली

 स्थाई हो तो शिक्षा अधिक व्यय कम।  इसे और भी लाभान्वित करने के लिए  मुफ्त में ही नेट कनेक्शन लेना चाहिए।

 छात्र छात्राओं को यातायात का कष्ट, बस की भीड़ में दुर्व्यवहार , यातायात खर्च आदि कम हो जाएगा।।

वीडियो कांफ्रेंसिंग में तो अंतर्क्रिया भी संभव है।

 सरकार को और भी उपयोगी बनाना चाहिए। इन्टरनेट मुफ्त में छात्राओं के घर को देना चाहिए। यह खर्च  स्कूल कालेजों के खर्च से कम ही होगा। वास्तव में कोराना ने भला किया है। Work from homeअधिक लाभ प्रद है केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से ही नहीं, आर्थिक दृष्टि से भी फायदे मंद है।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

भक्ति

 नमस्ते वणक्कम।

प्रणेता साहित्य संस्थान, दिल्ली।

11-3-2021.

 भक्त और भक्ति।

विधा गद्य ।

 भारत आध्यात्मिक भूमि है।

भक्ति केंद्रित देश।

जीविकोपार्जन मंदिर केंद्रित।

परिणाम भक्ति भी एक उल्लास यात्रा जैसा बदल गया।।  घंटों यात्रा कर बिजली दर्शन करते हैं। न भगवान के नाम  का नारा,न भजन ।

मैं रेल में काशी यात्रा चेन्नई से निकला।सभी भक्त।पर किसीने हर हर महादेव का नारा न लगाया। मैं उन सब के संवाद पर ध्यान मग्न बैठा था।

बनारसी ठग का शब्द सुना है।

इनके संवाद में भक्ति से ज़्यादा ठहरने की जगह,

बढ़िया तमिलनाडु खाना न मिलेगा, अपने   पूर्वजों की आत्म शांति की क्रियाएँ,

काशी के आसपास के दर्शनीय स्थल,वापस आने की तारीख।

 बाह्याचार बाह्याडंबर ही ज्यादा। भक्ति कम।।

मुझे कबीर के पद याद आयी।

मन तुम नाहक दुंद मचाये। करी असनान छुवो नहीं काहू , पाती फूल चढ़ाये।

मूर्ति से दुनिया फल माँगे, अपने हाथ बनाये।यह जग पूजैदेव–देहरा, तीरथ –वर्त–अन्हाये।

चलत –फिरत में पाँव थकित भे , यह दुख कहाँ समाये। झूठी काया झूठी माया , झूठे झूठे झुठल खाये।

बाँझिन गाय दूध नहीं देहै , माखन कहँ से पाए। साँचे के सँग साँच बसत है, झूठे मारि हटाये।

कहैं कबीर जहँ साँच बसतु है, सहजै दरसन पाये।


(मन तू व्यर्थ उलझन में है द्वंद मचा रहा है। फूल पत्ती चढ़ाकर भी कोई आकाश को हाथों से नहीं छु सकता। दुनिया अपने हाथ की बनाई हुई मूर्ति से फल मांगती है और देवी देवताओं की चौखट पूजती है। तीर्थयात्रा पर जाती है , व्रत रखती है और स्नान करती है। इसी चक्कर में चलते चलते पाँव थक जाते है यानी असली ईश्वर का ध्यान करने के बजाय हम कर्मकांडों पे अपना समय गवाते है और उसे भूल जाते है। आखिर यह दुख कहाँ समाएगा। ये काया भी झूठी है और संसार की माया भी झूठी है। हम व्यर्थ ही जूठन खाते फिरते है। बाँझ गाय जब दूध ही नहीं देगी तो मक्खन कहाँ से मिलेगा? सच्चे के साथ सच्चा ही बसता है, झूठे को भगा दो। कबीर कहते है की जहां सत्य का वास है वहां ईश्वर के दर्शन सहज हो जाते हैं।--पाखंडी)

मन चंगा तो कठौती में गंगा।।

 दिखावे की भक्ति  से कोई लाभ नहीं. )

  मन चंगा तो कठौती में गंगा।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

शिव स्तुति

 ॐ नमः शिवाय ओम।

  साहित्य संगम संस्थान हरियाणा इकाई।


 शिकस्त से बचने,

 शिखर पर पहुंचने

सिद्धि प्राप्त करने

 बोलो,हर हर महादेव।।

 महत्वाकांक्षा पूरी होने

 ममता बढ़ने  मनोकामना 

पूरी होने बोलो हर हर महादेव।।

सरल सहज देवता,

 भक्तवत्सल भगवान की

 जय बोलो,हर हर महादेव।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

Wednesday, March 10, 2021

शिव भक्ति।

 नमस्ते वणक्कम।

नव साहित्य परिवार।

शिव महिमा।।

११-३-२०२१

 शिव भगवान भक्त वत्सल ।।

भक्ति तो मन की प्रीति।।

भले ही शिव के प्रति भक्तिभाव हो,

मन कामान्ध हो तो

रावण की गति जान।

आसाराम, प्रेमानंद,कई

आश्रम वासी अपमानित।।

पवित्र भक्ति,

अनासक्त जीवन रहित

बाह्याडंबर भक्ति  से 

कोई न प्रयोजन जान।

 एकाग्रता, अचंचल मन,

अनासक्त जीवन रहित भक्ति।। तभी सदा के लिए 

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

भक्ति

 ॐ नमः शिवाय।

शिव की आराधना,

कलमकार कुंभ को नमस्कार वणक्कम।।

 अखिलांडेश्वर ,अखिलांडेश्वरी।

आनंद तांडव,रुद्रतांडव।।

भक्तवत्सल,

शरणागत वत्सल।।

लोकनायक,लोकनायकी।

त्रिपुरसुंदर त्रिपुरसुंदरी।।

 शिवकामी ,कामदहन मूर्ति ।

अलग अलग क्षेत्र,

अलग -अलग  क्षेत्र लीलाएँ,

परमेश्वर परमेश्वरी,

 पर्वतेश्वर पर्वतवर्द्धिनी,

 काशीनाथ विशालाक्षी।

 कांची कामाक्षी एकंभेश्वर।

मदुरै मीनाक्षी,चोक्कनाथ ।

तिल्लै नटराज,शिवकामी।

आ सेतु हिमाचल रक्षक,

 काशी, कैलाश रामेश्वर।

आध्यात्मिक एकता 

भारत का बल।।

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

 ॐ नमः शिवाय

Sunday, March 7, 2021

नारी जीवन

 साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई।

दिनांक ६-३-२०२१.

विषय  :नारी जीवन

विधा: अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति। पाठक का निर्णय।साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई।

दिनांक ६-३-२०२१.

विषय  :नारी जीवन

विधा: अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति। पाठक का निर्णय।

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 नारी जीवन  

 पाश्चात्य हो या भारतीय।

  अधिकार है,कानून हैं

 फिर ईश्वरीय 

कोमलतम सृष्टि।।

  पुरुषों की बाज दृष्टि।

    संयमी, जितेन्द्रियता 

   आजकल के चित्र पट,

    समाचार , 

ईश्वरीय आतंक अभाव।

  आज स्नातकोत्तर नौकरी  

  फिर भी  घर का काम।।

  संतान पालन,पति सेवा।

 मोहनदास करमचंद गांधी ने कहा -आधी रात स्वर्ण सज्जित स्त्री अकेली 

जब तक सुरक्षित नहीं घूमती,

तब तक  आजादी नहीं मिली।

 आज भी कई निर्भया।

 आतंकित अधिकारी का डर।

 डाक्ट्रेट मार्गदर्शक प्राध्यापक।

  सबके सब बुरे नहीं,

 दिव्य सृष्टि में रावण,कंस,

 आसुरी शक्तियाँ ,

 सिक्के के दो पक्ष,

 बिजली की रोशनी,

 असावधानी धक्का।।

यही है मानव जीवन।।

 नारी प्रकृति  त्रेतायुग द्वापरयुग कलियुग में

जरा सी असावधानी लव-जिहाद।

 आत्मनियंत्रित  फिर भी

 शादी  पति पत्नी कर्म फल।।

 भगवान का वरदान से

 नारी जीवन नरक तुल्य या स्वर्ग तुल्य जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

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 नारी जीवन  

 पाश्चात्य हो या भारतीय।

  अधिकार है,कानून हैं

 फिर ईश्वरीय 

कोमलतम सृष्टि।।

  पुरुषों की बाज दृष्टि।

    संयमी, जितेन्द्रियता 

   आजकल के चित्र पट,

    समाचार , 

ईश्वरीय आतंक अभाव।

  आज स्नातकोत्तर नौकरी  

  फिर भी  घर का काम।।

  संतान पालन,पति सेवा।

 मोहनदास करमचंद गांधी ने कहा -आधी रात स्वर्ण सज्जित स्त्री अकेली 

जब तक सुरक्षित नहीं घूमती,

तब तक  आजादी नहीं मिली।

 आज भी कई निर्भया।

 आतंकित अधिकारी का डर।

 डाक्ट्रेट मार्गदर्शक प्राध्यापक।

  सबके सब बुरे नहीं,

 दिव्य सृष्टि में रावण,कंस,

 आसुरी शक्तियाँ ,

 सिक्के के दो पक्ष,

 बिजली की रोशनी,

 असावधानी धक्का।।

यही है मानव जीवन।।

 नारी प्रकृति  त्रेतायुग द्वापरयुग कलियुग में

जरा सी असावधानी लव-जिहाद।


 आत्मनियंत्रित  फिर भी

 शादी  पति पत्नी कर्म फल।।

 भगवान का वरदान से

 नारी जीवन नरक तुल्य या स्वर्ग तुल्य जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक


Saturday, March 6, 2021

आँगन

 हिंदी साहित्य संगम संस्थान ,तेलंगाना इकाई

नमस्ते। वणक्कम।
६-३-२०२१ विषय ---
आँगन विधा अपनी शैली अपनी भाषा अपनी भावाभिव्यक्ति
जब मैँ बच्चा था , अपने गाँव में
आँगन बीच घिरा हुआ घर
चारों ओर कमरे रसोई घर।
बीच के आँगन में देखता
रिमझिम रिमझिम वर्षा।
धूप ,हवा,खड़े होकर ऊपर देखता तो
आकाश ,नीचे भूमि पंच भूतों का प्रवेश।
स्वास्थ्य का केंद्र आँगन।
रोशनी हवादार घर वजह आँगन।
आज तो आँगन में भी कमरा।
शहरों में आँगन रहित घर। मच्छरों का आवास।
आँगन में पंचतत्वों का बाधा रहित प्रधान अंश।
स्वरचित स्वचिंतक एस. अनंतकृष्णन ,चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक।

नारी जीवन

 साहित्य संगम संस्थान तमिलनाडु इकाई।

दिनांक ६-३-२०२१.

विषय  :नारी जीवन

विधा: अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति। पाठक का निर्णय।

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 नारी जीवन  

 पाश्चात्य हो या भारतीय।

  अधिकार है,कानून हैं

 फिर ईश्वरीय 

कोमलतम सृष्टि।।

  पुरुषों की बाज दृष्टि।

    संयमी, जितेन्द्रियता 

   आजकल के चित्र पट,

    समाचार , 

ईश्वरीय आतंक अभाव।

  आज स्नातकोत्तर नौकरी  

  फिर भी  घर का काम।।

  संतान पालन,पति सेवा।

 मोहनदास करमचंद गांधी ने कहा -आधी रात स्वर्ण सज्जित स्त्री अकेली 

जब तक सुरक्षित नहीं घूमती,

तब तक  आजादी नहीं मिली।

 आज भी कई निर्भया।

 आतंकित अधिकारी का डर।

 डाक्ट्रेट मार्गदर्शक प्राध्यापक।

  सबके सब बुरे नहीं,

 दिव्य सृष्टि में रावण,कंस,

 आसुरी शक्तियाँ ,

 सिक्के के दो पक्ष,

 बिजली की रोशनी,

 असावधानी धक्का।।

यही है मानव जीवन।।

 नारी प्रकृति  त्रेतायुग द्वापरयुग कलियुग में

जरा सी असावधानी लव-जिहाद।

 आत्मनियंत्रित  फिर भी

 शादी  पति पत्नी कर्म फल।।

 भगवान का वरदान से

 नारी जीवन नरक तुल्य या स्वर्ग तुल्य जान।।

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

Friday, March 5, 2021

बचपन

 साहित्य संगम संस्थान पंजाब इकाई।

 नमस्ते वणक्कम।

 बचपन 

  अपनी शैली अपनी भावाभिव्यक्ति।


 बचपन अति सुखी,

मां बाप का प्यार।

 सुखी पक्ष।

 कर्ण राजकुमार का बचपन,

 कबीर का बचपन,

 अनाथालय का बचपन।

  बाल भिखारी,बाल मजदूर।

 बचपन सबका आनंदमय नहीं।

सरकारी स्कूल, निजी स्कूल

 हम उम्र के बच्चे,

 हीनता ग्रंथि ।

 सबहिं नचावत राम गोसाईं

स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै।

बेरुखी

 साहित्य संगम संस्थान तेलंगाना इकाई।

५-३-2021
विषय बेरुखी।
विधा -कविता।
बेरुखी बातें करना ही पड़ता है ,
जब अन्याय चलता है ,
प्रेम में ठग ,पूजा में ठग ,
मंदिर की संपत्ति हड़प ,
बेरुखी क़ानून व्यवहार।
महंगाई बढ़ती देख ,
होता है मन बेरुखी।
भ्रष्टाचारी रिश्वत खोरी ,
अवैध बलात्कार ये सब देख सुन ,
बेरुखी न हो तो
मानव मानव नहीं राक्षस मान।
स्वरचित स्वचिंतक एस। अनंतकृष्णन , चेन्नई
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बीज़ मैं शब्दों का बोता है.

 Anandakrishnan Sethuraman

Admin
तमिलनाडु साहित्य संगम संस्थान
नमस्ते वणक्कम।
५-३-२०२१
विषय:
बीज मैं शब्दों का बोता हूँ
विधा --अपनी शैली अपनी भाषा अपनी भावाभिव्यक्ति।
************
शब्द ही शीर्षक ,
वहीं बीज विचार के लिए।
कविता का प्रभाव,
महिमा वीणापाणी की देन।।
कथानक का शीर्षक
केवल शब्द,
कफ़न,गबन, हार की जीत
ममता,माता हृदय,
आँसू,कामायनी,सुख दुख,
मुख पुस्तिका के शब्द शीर्षक
प्रेम, क्रोध,भाग्य,देश, पर्यावरण , स्वर्ग,स्वर्ण
ये शब्द विविध लेखक,
विविध कवि, विविध वर्णन,
विविध विचार शब्दों का मायाजाल, सुखांत,दुखांत।
नव रस , विविध छंद, विविध अलंकार परिणाम
काव्य वृक्ष,कहानी,संस्मरण
शब्दों के बीज।
मैंने भी शब्दों का बीज
बोया है ।
मुखपुस्तिका के दोस्त,दल के
वाह !वाह! से आत्मसुख, आत्मानंद , मानसिक उल्लास।।
शब्द शक्ति में दोस्ती,
शब्दों में जागरण,
शब्दों में प्रेरणा।
शब्दों में क्रांति
शब्द शक्ति अति प्रबल।।
जिओ जीने दो।
जय जवान जय किसान।
भारत छोड़ो।
स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार।
वसुधैव कुटुंबकम्।
बजरंगबली।
शब्द बीज अति परिवर्तन
मानसिक, विचारात्मक,जोशीला।
जय भारत, वंदेमातरम।
भजन का प्रभाव।
शब्द बीजों से
राजनैतिक क्रांति,
दान धर्म आध्यात्मिक सद्गुण।
शब्द बीज की क्रांतियाँ वर्णनातीत।
स्वरचित स्वचिंतक एस अनंतकृष्णन चेन्नै।
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