Monday, January 25, 2016


तिरुक्कुरल.

संयम नियंत्रण








  1.    .அடக்கம்  அமரருள் உய்க்கும் அடங்காமை 


      ஆரிருள் உத்துவிடும்.


      संयम  या नियंत्रण    मनुष्य को यश देगा . 

     ( देवों में आत्मसात करेगा,)

       अनियंत्रण  अन्धकार में डाल देगा.

        காக்க பொருளா அடக்கத்தை ஆக்கம் 
           அதனினூஉங் கில்லை உயிர்க்கு.






  
संयम  या नियंत्रण  ही  दौलत या अनश्वर संपत्ति  है.

उससे बढ़कर कोई अनश्वर संपत्ति जग में नहीं है.

Saturday, January 23, 2016

      १.  सत्य को लक्ष्य बनालो ;

      २.  हल के नोक के  तेज के बराबर और  कोई चीज नहीं ;

      ३.  अच्छे अच्छे बच्चों की आशा में है यह देश;

      ४.  मन्मथ लीला को जीतनेवाले कौन ?

     ५.  आँखों पर विशवास मत कर ; तुझे देगा धोखा ;

     ६.  अच्छे नाम  पाना है,  में।

     ७. सच बोलकर भला कर ,संसार करेगा तारीफ.



Wednesday, January 20, 2016

आज का छला ,अभी से

आज का छला ,अभी से फूँक फूँककर चला।
छला जाने से सतर्कता आ जाती है।
प्यार करके ठगने पर , सनक हो जाता है।
सतर्कता आती नहीं। प्यार क्यों होता है दीवाना?
दिल  दिल में भिन्न भिननता, पर
घृणितों  के प्रति भी दीवाना।
  प्यार के हार में हत्या आत्महत्या
प्यार के न मिलने पर अम्ल फेंकना।
  यह घृणित व्यवहार क्यों?
यह कौन सी माया? कौन सी शैतानियत ?
आसुरी व्यवहार क्यों ?
युवकों! जागो! जितेंद्र बनो।जीतो संसार।
मोर जैसा नाच मत। मनुष्यता जानो। मनुष्य बनो।

Monday, January 18, 2016

वसुदैव कुटुंबकम

विदेशी वस्तुएँ लेना मना है।
पढने में सुनने में लिखने में
आनंद।
व्यवहार में देखें तो
जीविकोपार्जन की भाषा अंग्रेज़ी
पेट्रोल डीजल विदेशी।
पहनावा ओढावा विदेशी।
  कार मोटर मोब इल विदेशी
बडी बडी योजनाएँ विदेशी।
मुगल ईसाई धर्म विदेशी
हमारे वेदों के रचयिता अति दूरदर्शी
बताकर चले गये-
वसुदैव कुटुंबकम्।
सर्वे जनाः सुखिनो भवंतु।
आकाश एक।  सूरज एक।
चांद एक। सारे संसार है मेरादेश।

Sunday, January 17, 2016

दीवाना

दीवाना हूँ देश का। दिली दोस्तों।
जरा सोचो।
अर्द्ध नग्न  अभिनेत्रियों के सम्मान में
देश का कल्याण होगा क्या ?
अभिनेता जो दूसरों के संकेत का मोहक रूप देता है
उससे देश का भला होगा क्या?
अभिनय को ही बल दोगे तो
सत्य का कहाँ ठिकाना।
निराकार में साकार देखना भक्ति है।
साकार में ईशवर साक्षात्कार बाह्याडंबर ,
वायु निराकार बिना उसके जीना असंभव।
जल निर्मल बिना उसके सूख जाता जग।
मिट्टी उर्वरा  न हो तो न पनपता वनस्पतियाँ।
आकाश में काले नभ देता पानी।
आग उष्णता न हो  क्या बाकी  तत्व।
पंच तत्वों का बनता बिगडता जग।
प्रकृति  को जानो पहचानो।
कृत्रुम  छोडो।सहज सरल सत्य जीवन अपना लो।
स्वस्थ जीवन  स्वस्थ आचार स्वस्थ अनुशासन
सोचो जीवन बनेगा कितना आनंद।

Wednesday, January 13, 2016

भारतीय

हम  भारतीय  अग जग में व्यापित।
हम केवल अपनी सुरक्षा चाहते हैं
हमारे पूर्वज  अपने लिए नहीं
राज पद भी त्यागकर वन को बनाया
अपना निवास स्थान।
राजमहल की सुख -सुविधाएँ तज
सानंद कपडे तक निकाल फेंके महावीर ।
सोलह साल की उम्र में घर छोड
तिरुवण्णामलै मैं आजीवन कोपीन मात्र वस्त्र पहन
अचल रह विदेशों को भी अपनी ओर खींचे
रमण महर्षि।
अर्द्ध नग्न फक्री विश्व वंद्य नेता
राष्ट्र पिता महात्मा गाँधीजी।
धन को तुच्छ  माननेवाले   
विश्वप्रसिद्ध  स्वामी विवेकानंद
जंगल में सर्दी में नंगे बदन
यूनानी सिकंदर की संपत्ति को हाथ की मैली सा
ठुकरानेवाले दांडियायन।
त्याग,प्रेम,अनासक्त जीवन
माया से दूर  आदर्श भारत और कहीं नहीं।

Tuesday, January 12, 2016

समाज

सब को प्रणाम।
समाज को देखा।
विकारों को देखा।
  प्रेम  त्याग सेवा भाव से युक्त
तनमनधन अर्पित करनेवाले
निस्वार्थ लोगों के एक वर्ग का त्यागमय जीवन।
दूसरों को मार पीट लूट शोषित जीनेवालाएक वर्ग।
इन दो वर्गों में  पहला वर्ग त्याग को सुख मानता है।
दूसरा वर्ग भोग को ही सुख मानता है।
त्याग में आत्मीयता और आनंद है।
भोग के अंत में दुख ही बचता है।