Sunday, September 30, 2012

तमिल-हिंदी सीखिए =रिश्तेदार


तमिल-हिंदी सीखिए =रिश्तेदार 

माता ,अम्मा=माँ 
ताय =माँ ,
अप्पा=पिता,बाप।
अणणन ==बड़ा भाई 
  1. तम्बी =छोटा भाई।
  2. अक्काल=बड़ी बहन ,दीदी 
  3. तंगै =छोटी बहन 
  4. अततै =मामी 
  5. मामा=मामा 
  6. तात्ता=नाना,दादा 
  7. पाटटी =नानी,दादी 

तमिल-हिंद वणणंगल ==तमिल हिंदी रंग। 2. वार नाटकल =सप्ताह के दिन


  1.       तमिल-हिंद  वणणंगल ==तमिल हिंदी रंग।   2.  वार  नाटकल =सप्ताह के दिन 

      ज्ञायिरू =इतवार /रविवार 
तिंगल ========सोमवार 
सेव्वाय=मंगलवार 
बुतन =बुधवार 

वियालन=गुरूवार/बृहस्पतिवार 
वेल्ली=शुक्रवार 
शनि===शनिवार।
वेल्लै =सफ़ेद ,श्वेत ,गोरा
करुप्पु= काला ,श्याम

मंजल==पीला।

सिकप्पू= लाल

नीलम = नीला

पच्चै =हरा

कावी=केसरिया

रोस =गुलाबी




Friday, September 28, 2012

तमिल हिंदी सीखिए--2



तमिल -हिंदी सीखिए।
  1.  उंग लुक्कु   एन्न  वेंडूम   ?=आपको  क्या चाहिए?

एनक्कु  नूरु रूपाय वेंडुम .=  मुझको  सौ  रूपये चाहिए?

2. नींगल    एंगे  पोक   विरुम्बुकिरीर्कल?
आप कहाँ  जाना चाहते हैं?


3. नान   दिल्ली पोक  विरुम्बुकिरेन .

मैं  दिल्ली जाना चाहता हूँ .

4. अंगु   एन्न एन्न  पार्क्क  वेंडुम ?
वहाँ  क्या -क्या देखना चाहिए?

5. अंगु  पारालुमन्रम ,कुतुब मीनार, सेंगोटई  मेलुम  पला पार्क्कत्तक्क  इडंगल  उल्लन।

वहाँ  संसद भवन ,कुतुबमिनार ,लाल किला और कई देखने लायक स्थान है।
6.ताजमहल  कहाँ  है?
ताजमहल  एंगे  इरुक्किरतु ?

7.ताजमहल  आग्राविल  इरुक्किरतु .
ताजमहल आग्रा  में  है।







देवनागरी द्वारा तमिल-हिंदी सीखिए।learn tamil-hindi

देवनागरी द्वारा  तमिल-हिंदी  सीखिए।



तमिल=हिंदी 

वणक्कम= नमस्ते।

1.  नींगल उल्ले वारुंगल =आप अन्दर आइए .
नींग वांग --आप आइये .(बोल)
(बोलचाल रूप तमिल में जरा भिन्न होगा।)
समझने केलिए ( बोल )
2.
नींगल  उटकारुंगल ==आप बैठिये।
नींग  उट कारुंग।(बोल>

3.
नींगल कुलिर बानम अरुंदु किरीर्कला अल्लतु  सूडान  बानम? ( soodaana)  baanam.

आप ठंडा  पियेंगे या गरम।

4.
एनक्कु  काफी पोतुम।
मुझे काफी काफी है।
5.
नींगल इंगु एत्तनै  नाल  तंगुवीर्कल ? =तंगुवींग (बोल)
आप  कितने दिन ठहरेंगे?

Monday, September 17, 2012

ॐ गणेशाय नमः। ॐ गणेशाय नमः



हिन्दू धर्म  एक पहेली है।

हिन्दू धर्म मूर्ति पूजा के पक्ष में है या विपक्ष में?

मूर्ति पूजा के पक्ष में है तो 
सुन्दर गणपति की  मूर्ति को 
क्यों समुद्र में फेंकते हैं?
कितने चित्ताकर्षक हैं मूर्तियाँ!
कलाकारों के अथक परिश्रम का फल है।
कितने हजारों के खर्च का मनमोहक रूप है।
मूर्तियाँ ऐसी लगती हैं मानो 
प्रत्यक्ष बोलकर वर देनेवाली हैं।
पूजा पाठ के बाद वर देते समय 
उसे समुद्र में फेंकने से ही 
देश की प्रगति में बाधाएं होती हैं।
शासकों के मन में स्वार्थ भाव 
घर कर लेती हैं;
धन  की लालची पैदा होती हैं।
अपने काले धन को विदेशी बैंकों में जमा कर रखते हैं।
देश में खून -हत्याएं होती हैं।
लूट,भ्रष्टाचार ,घूस आदि का बोल-बाला हैं।
सरकारी कर्मचारियों में पैसे का मोह होता है।
कर्तव्य करने वाले माया के चक्र में फँस जाते हैं।
पुलिस में भी ,अध्यापकों में भी ,डाक्टरों में भी 
अपने पवित्रता भूलकर काम् वास नाएँ  होती हैं।
अतः गणेश के भक्तों!
करोड़ों के रुपयों को देश की,गरीबों की, पीड़ितों की 
सेवा में लगाइयें।
तभी देश की भलाई होगी।
आप की खुद की भलाई होगी।
लौकिक मायामोह तजकर 
अलौकिक मन से सोचिये!!!
भगवान की मूर्तियों को  तरंगों में 
लहराने से आपका जीवनभी लहराता रहेगा।
किनारे पर नहीं लगेगा।
दो मिनट  आँखे बंदकर ध्यान कीजिये।
वास्तविकता सामने झलकेगी।
ॐ  गणेशाय नमः।
ॐ गणेशाय नमः।
ॐ गणेशाय नमः।