Monday, September 17, 2012

ॐ गणेशाय नमः। ॐ गणेशाय नमः



हिन्दू धर्म  एक पहेली है।

हिन्दू धर्म मूर्ति पूजा के पक्ष में है या विपक्ष में?

मूर्ति पूजा के पक्ष में है तो 
सुन्दर गणपति की  मूर्ति को 
क्यों समुद्र में फेंकते हैं?
कितने चित्ताकर्षक हैं मूर्तियाँ!
कलाकारों के अथक परिश्रम का फल है।
कितने हजारों के खर्च का मनमोहक रूप है।
मूर्तियाँ ऐसी लगती हैं मानो 
प्रत्यक्ष बोलकर वर देनेवाली हैं।
पूजा पाठ के बाद वर देते समय 
उसे समुद्र में फेंकने से ही 
देश की प्रगति में बाधाएं होती हैं।
शासकों के मन में स्वार्थ भाव 
घर कर लेती हैं;
धन  की लालची पैदा होती हैं।
अपने काले धन को विदेशी बैंकों में जमा कर रखते हैं।
देश में खून -हत्याएं होती हैं।
लूट,भ्रष्टाचार ,घूस आदि का बोल-बाला हैं।
सरकारी कर्मचारियों में पैसे का मोह होता है।
कर्तव्य करने वाले माया के चक्र में फँस जाते हैं।
पुलिस में भी ,अध्यापकों में भी ,डाक्टरों में भी 
अपने पवित्रता भूलकर काम् वास नाएँ  होती हैं।
अतः गणेश के भक्तों!
करोड़ों के रुपयों को देश की,गरीबों की, पीड़ितों की 
सेवा में लगाइयें।
तभी देश की भलाई होगी।
आप की खुद की भलाई होगी।
लौकिक मायामोह तजकर 
अलौकिक मन से सोचिये!!!
भगवान की मूर्तियों को  तरंगों में 
लहराने से आपका जीवनभी लहराता रहेगा।
किनारे पर नहीं लगेगा।
दो मिनट  आँखे बंदकर ध्यान कीजिये।
वास्तविकता सामने झलकेगी।
ॐ  गणेशाय नमः।
ॐ गणेशाय नमः।
ॐ गणेशाय नमः।