Wednesday, September 16, 2015

आया  था अकेला ,
दोस्त मिले अनेक ;
ज्ञान, उम्र , अनुभव ,न्याय ,ईमानदारी  के मार्ग दर्शक ;
 बड़े बड़े ; उनके प्रयत्न ;पर दाल न गला ;
ईश्वर  की माया ;
एक तो रोग ,
न तो बुढ़ापा
न तो  दुर्घटना ;
उनको सदा के लिए संसार से भगा देता;
दोस्त केलिए दोस्त ;
पिता के लिए पुत्र ;
पति  के लिए पत्नी ;
पुत्र के लिए माँ -बाप ;

यम के निर्दय करकमल उठाकर ले चलने से

चन्द  दिन  रहते  हैं ;

फिर ईश्वरीय देन   कहते दुःख सहने के आदि हो जाते !

अशाश्वत संसार में जीने की आशा से
अन्याय अत्याचार भ्रस्टाचार रिश्वत आदि को
अपनाकर  धर्म अर्थ काम मोक्ष में फंसकर
संसार धाम छोड़ देते हैं;
यही दार्शनिक समझाते रहते हैं ,
ढोंगियों के शासक ,सन्यासी उनके अनुचर
सब काल कवलित हो जाते हैं;
संसार योन ही चलता हैं