Monday, February 23, 2015

सुमार्ग --नलवली--अव्वैयार

अव्वैयार  -सुमार्ग --11 तो 15


11.


अव्वैयार कहती हैं :--

हे  पेट!एक दिन  का खाना  छोड़ दो तो  न छोड़ोगे;

दो दिन का खाना एक साथ लो तो न मानोगे ;

दुःख प्रद मेरे पेट!तू    मेरा दुख   न जानोगे !

मेरे  पेट !तेरे  साथ जीना दुर्लभ.



१२.

 नदी  तट  पर  के पेड़ गिर  पड़ेगा;

राज- भोग  का जीवन भी मिट जायेगा;
लेकिन कृषी ही ऐसा धंधा
  जिसका कभी न होगा पतन.

१३ 

इस  सुन्दर भू -गर्भ पर ,
जीने के लिए जो भाग्यवान पैदा हुए हैं ,

उसको कोई मिटा नही सकता;

मरनेवाले को कोई रोक नहीं सकता;

भीख माग्नेवाले को कोई  रोक नहीं सकता.

१४ .

भीख  माँगकर ,अपमानित  जीवन जीने  से 

मर्यादा की रक्षा  करते हुए  मरना  बेहतर है;

15.

नमः शिवाय   मन्त्र  जपते हुए ,

जो  जीते  है  न उनको  होगा कभी दुःख या डर;

शिव भगवान का नाम जपना  ही बुद्धिमानी है.
बाकी सब उपाय दुःख दूर करने   बुद्धिमानी  नहीं  है.