Thursday, June 25, 2015

saamarthy सामर्थ्य


सामर्थ्य 
नारियों जितना ,उतना नहीं पुरुषों में 

मायके और ससुराल  

ससुराल को देते रहो घर में खुशहाली। 

मायके -पिता के घरवालों से बातें थोड़ी देर  करो ,

ज़रा सा मुस्कुराओ वह तो लाखों के लेन -देन  के बराबर. 

बेगम केचेहरे तो गम भरके ,लालिमा लज्जा से नहीं 

क्रोध केअंगारे  बबक उठेगा. 

कहते  हैं  पुरुष   हैं अत्याचारी ,

वह तो केवल दिखावे और बेचारा। 

कर्म तो करने में नारियां कुशल। 

ताजमहल बनवाने  की  क्षमता भले ही पति हत्यारा हो 
बन सकता  है  प्यार का यादगार. 
शूर्पणखा  अपने  भाई के  सर्वनाश की भूमिका 
भर्तृहरी केसन्यास के कारण 
न जाने नारियाँ  अपनेसपना साकार करने में समर्थ।