Wednesday, August 12, 2015

मरमर के जीना ही यथा राजा

यथा। राजा  तथा  प्रजा 
रामायण के राजा दशरथ  के तीन
वह तो सत्युग
कुंती के पति नाम मात्र के
मंत्रोच्चारण से देव देते संतान
वहतो द्वापर युग
फिर भी सारे पात्र प्रशंसनीय
कलियुग में विवाह निंदा और अपमान
करुणानिधि के तीन पत्नियाँ
जयलिता श्रीमती या कुमारी
पति बदलना पत्नी बदलना
साधारण की बात बन गयी
जमाना है ग्रेजुवेटों का
तलाक के  मुकद्दमा का
इश्क की कहानियाँ
हीरो चित्रपट के पूर्व भाग में
हीरोयिन के आने तक शरीफ बदमाश
कलियुग है अति सूक्ष्म

खुल जाता है भ्रष्टाचारी
दंड भी सुनाया जाता है
पर  दंड सुनाने के बाद
अपराधी को छुडाने
एक बडी भीड होती है जमा।
जज ही बदनामी
कलियुग की बात है विचित्र ।