Sunday, July 17, 2016

कर्म फल

कहते हैं---निष्काम सेवा करो; फल की प्रतीक्षा भगवान पर छोड दो.
वास्तव में सोचो , कितने निष्काम सेवकों को मिला है सम्मान.
नेता को कितना सम्मान ,सेवकों के कारण .
मंदिर के गर्भ-गृह के देव-देवी के सम्मान पुजारी के कारण.
सच्चे सेवक निष्काम कर्मक पर न किसी काध्यान.
खुशामद करो, साथ चलो, हाँ में हाँ मिलाओ ,
धन जोड़ो, दान करो,दानी का सम्मान एक दिन.
ज्ञानी का सम्मान उसके स्वर्गवास के बाद.
निष्काम सेवा कर, कर्मफल जरूर आपके वंशज भोगेंगे.
पेड़ लगा रहा था , बूढा!
राहगीर ने पुछा---फल देने दस साल लगेंगे.
क्यों करते हो यह काम; तुम तो भोगोगे नहीं.
बूढ़े का अंग तो अति शिथिल,
कमान सा बन गया शरीर वह बोला--
मेरे कर्मफल न मिलेगा तो मुझे,
मेरे वंशज तो फल भोगेंगे ;
और किसी को फल मिलेगा ही;
यही है निष्काम कर्म फल,परोपकार.
सोचो, करो, निष्काम कर्म. फल तो मिलेगा ही.

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