Monday, March 4, 2013

११ .  मैया  ---------तू पूत।।

सन्दर्भ :--मैया  मोहिं -------मत तू पूत।।
व्याख्या:---सूरदास इस पद में  बालकों के बीच के झगड़े का सूक्ष्म निरीक्षण करके वर्णन करते हैं।
व्याख्या:- बालक कृष्णन अपनी माँ  से अपने बड़े भाई बलराम के बारे में शिकायत  करता है --माँ ! बड़े भाई ने मुझे बहुत खिझाया  है ;वह मुझसे कहता है---तूने मुझे कहीं से खरीद लाई  है;मुझे तूने जन्म नहीं दिया है;इस गुस्से के कारण मैं खेलने नहीं जाता।वह बार-बार पूछता है कि  तेरे माता -पिता कौन हैं?तू काला है।  यशोदा और नन्द गोरे  हैं।  वह इस बात को एनी गो बालकों को भी सिखा देता है। सब चुटकी दे-देकर हँसी  उड़ाते है। तू तो मुझे मारती है ।भाई पर अपना क्रोध नहीं दिखाती।
श्री कृष्ण के क्रोध भरी बातें सुनकर यशोदा ने कृष्ण से कहा--हे कन्हैया!मेरी बातें सुन।बलराम तो  अपने जन्म से धूर्त  है। मैं अपने गो धन पर कसम खाती हूँ --मैं माँ  हूँ।तू पुत्र  है। उसने ऐसा नहीं कहा कि तू मेरा पुत्र है। इसमें कवी की चतुराए मालूम होती है।यशोदा झूठ नहीं बोली।कसम भी खाया।
विशेष ;-बाल लीला का सहज वर्णन के साथ कवी के अनुभव् जन्य मौलिक ज्ञान अभिव्यक्त होता है।